निकेश जैन, इन्दौर मध्य प्रदेश
मैंने ऑरेकल (सूचना-तकनीक क्षेत्र की दिग्गज अमेरिकी कम्पनी) साल 2006 में छोड़ी क्योंकि मुझे वहाँ ऐसा लगने लगा था, जैसे मैं कोई सरकारी नौकरी कर रहा हूँ। हाँ, सरकारी नौकरी!
मैं इस कम्पनी के बेंगलुरू स्थित दफ्तर में काम किया करता था। लेकिन मेरे पास कोई काम नहीं था। बल्कि मैं ही क्या, मेरे साथ बैठने वाले लगभग सभी सहकर्मी मेरी तरह ही थे, बिना काम के। इस कारण दिन में अक्सर वे सब अपने-अपने लैपटॉप पर आईसीआईसीआई डायरेक्ट के जरिए शेयरों की खरीद-फरोख्त में लगे रहते थे। बीच में जब चाय-कॉफी के लिए फुर्सत का समय मिलता तो, उस वक्त भी चर्चा का विषय यही रहता कि किस कम्पनी के शेयर चढ़ रहे हैं और किसके गिर रहे हैं।
मेरा मन इस स्थिति से उचट गया था। इसलिए मैंने पहले तो अपनी टीम के सभी साथी ही बदल डाले। इससे छह महीने तक तो सब काम अच्छे से चलने लगा। लेकिन तभी कुछ रणनीतिक बदलाव हुए और फिर पहले वाली स्थिति बन गई। जिस काम में नई टीम के साथ मैं लगा हुआ था, वही अटक गया और हम फिर बिना काम के हो गए। अगले छह महीने तक फिर वही हालात!
मुझे यह देखकर अक्सर अचरज होता था कि कंपनी आखिर इतने सारे बिना काम के कर्मचारियों का बोझ कैसे उठाती होगी? हो सकता है, इसलिए कि हम लोग उसके लिए सस्से कामगार थे? या ये भी सम्भव है कि अमेरिका के कर्मचारी हम भारतीयों से भी ज्यादा निठल्ले होते हों। पता नहीं। मगर हाँ, उस समय तो यह सब ऐसे ही आराम से चलता रहा। पर शायद अब नहीं।
समय बदल गया है। ऑरेकल ने हाल ही में अपने कुल भारतीय पेशेवरों में से 3,000 को नौकरी से निकाल दिया है। भारत में काम करने वाले उसके कुल पेशेवरों का यह लगभग 10 फीसदी हिस्सा है। इसी दौरान अमेरिकी पेशेवरों में से सिर्फ 188 को ही नौकरी से निकाला गया। आखिर दोनों के बीच इतना बड़ा अंतर क्यों? क्योंकि पहले तो अमेरिकी पेशेवरों के निकाले जाने की संख्या ही भारतीयों की तुलना में अधिक हुआ करती थी। अधिक ही नहीं, बहुत अधिक। तो अब ऐसा क्या हो गया?
इस सवाल के जवाब के लिए मौके पर भी गौर करना होगा। भारतीय पेशेवरों की यह छँटनी ऐसे वक्त पर हुई है, जब अमेरिका और भारत के कारोबारी सम्बन्धों में तनाव बना हुआ है। ये सम्बन्ध इस समय खराब दौर से गुजर रहे हैं। तो क्या दोनों देशों की कारोबारी लड़ाई का असर भारतीयों की नौकरियों पर पड़ने लगा है? क्या ऑरेकल नौकरियाँ वापस अमेरिका ले जा रही है?
मालूम नहीं क्या सच्चाई है? किसी की कोई राय हो, तो दे सकता है।
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𝗜 𝗹𝗲𝗳𝘁 𝗢𝗿𝗮𝗰𝗹𝗲 𝗶𝗻 𝟮𝟬𝟬𝟲 𝗯𝗲𝗰𝗮𝘂𝘀𝗲 𝗶𝘁 𝗳𝗲𝗹𝘁 𝗹𝗶𝗸𝗲 𝗮 𝗴𝗼𝘃𝗲𝗿𝗻𝗺𝗲𝗻𝘁 𝗷𝗼𝗯 𝘁𝗼 𝗺𝗲!! Yes, government job…
I was working in their Bangalore office but there was NO work! The entire floor used to login to ICICI Direct to trade stocks during day time. The coffee breaks discussions used to be Indian stock market and high flying shares.
I got bored very soon. First, I changed my team; 6 months went well but then sudden strategic change and the entire project got stalled… again no work for next 6 months.
I used to wonder how did this company afford such non productive work-force!!
Well, because we were cheap labor I guess?
Or perhaps even US employees were as non productive?
Whatever was the reason it worked that time but now times have changed.
𝟯𝟬𝟬𝟬 𝗹𝗮𝘆 𝗼𝗳𝗳𝘀 𝗶𝗻 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮!! 𝗜𝘁’𝘀 𝟭𝟬% 𝗼𝗳 𝗼𝘃𝗲𝗿𝗮𝗹𝗹 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮’𝘀 𝘄𝗼𝗿𝗸𝗳𝗼𝗿𝗰𝗲. 𝗧𝗵𝗮𝘁’𝘀 𝗵𝘂𝗴𝗲 𝗯𝘂𝘁 𝗶𝘁’𝘀 𝗼𝗱𝗱 𝘁𝗼𝗼. Why?
Because usually the numbers are higher in US and negligible in India. But this time around their US numbers are just in hundreds (188 to be precise).
So it’s 188 in US v/s 3000 in India! There’s more than meets the eye 🤔
This layoff doesn’t look normal to me. The timing is also interesting when US and India are in a sort of cold war. Is Geo Politics playing here? Is Oracle trying to move jobs back to US?
Can’t say for sure but something is not adding up!
Any opinion?
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(निकेश जैन, कॉरपोरेट प्रशिक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी- एड्यूरिगो टेक्नोलॉजी के सह-संस्थापक हैं। उनकी अनुमति से उनका यह लेख अपेक्षित संशोधनों और भाषायी बदलावों के साथ #अपनीडिजिटलडायरी पर लिया गया है। मूल रूप से अंग्रेजी में उन्होंने इसे लिंक्डइन पर लिखा है।)
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