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मध्य प्रदेश में नई परिवहन नीति के विरोध में होली के समय बसें बंद, ये तो सीना-जोरी हुई न?
आज, 25 फरवरी 2026 की सुबह एक बड़े स्थानीय अखबार में हास्यास्पद-सा समाचार पढ़ा। इसमें बताया गया कि मध्यप्रदेश के सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र की यातायात…
उन्हें 50 साल बाद की चिंता है, इसलिए वह ऑक्सीजन देने वाला पीपल काटना चाहते हैं!!
आधुनिक दौर की ‘विकास-लीला’ ने सिर्फ बाहरी तौर पर ही माहौल नहीं बदला है। इंसान के भीतर भी बहुत कुछ बदल डाला है। यूँ कि…
शादी से पहले शारीरिक सम्बन्ध को ‘न’, अगर यह सोच ‘पुरातनपंथी’ है तो भी क्या बुराई है?
अगर इन सभी प्रश्नों का उत्तर ‘हाँ’ में है, तो सोचिए कि इस तरह की समस्या का निदान क्या है? क्या थोड़ी पुरातनपंथी सोच बनाए रखने में कोई बुराई है, अगर उसके जरिए समाधान मिलता हो तो? हमारा चरित्र, हमारा व्यक्तित्त्व, हमारा भविष्य सुरक्षित, बेदाग रहता हो तो? निश्चित रूप से, ऐसी पुरातनपंथी में कोई बुराई नहीं है।
चाल-कुचालों के बीच क्या जातियों-समाजों का आपसी अनुबंध सनातन को बचा सकता है?
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी की सरकार जो तीखी आलोचना हुई, वैसी कभी देखने-सुनने को नहीं…
क्या हम आज जो ‘धर्माचरण’ कर रहे हैं, उससे अधर्म की अभिवृद्धि हो रही है?
नव-हिन्दुत्व के आगमन के साथ तीर्थ – धाम, मन्दिरों में दर्शनार्थियों की और कथा-प्रवचनों के आयोजनों की बाढ़ सी आई है। वैष्णवदेवी, काशी, अयोध्या, पुरी,…
विवाह पर लाखों खर्च करने वालों के लिए तेलंगाना के ये आईएएस-आईपीएस मिसाल हैं!
भारत में शादियों का मौसम शुरू हो चुका है। देश के लगभग सभी समुदायों में विवाह सामाजिक प्रतिष्ठा का विषय होता है। इस प्रतिष्ठा के…
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सेवा-तीर्थ में ‘भारतीय भाषाओं’ की सेवा नहीं हुई, आगे शायद ही हो!! वीडियो से समझिए!
भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर का उद्घाटन 13 फरवरी 2026 को हुआ। इसे नया नाम भी मिला ‘सेवा-तीर्थ’। क्यों? ताकि यह नाम याद…
भारत में सवर्ण होना क्या अब अपराध है, देखिए यह वीडियो और सोचकर बताइए!
दिल्ली विश्वविद्यालय जहाँ से पूरे देश में शैक्षिक ही नहीं अपितु सामाजिक क्रान्तियों के सूत्रपात होते हैं। उसी विश्वविद्यालय में जहाँ स्त्री-विमर्श (फेमिनिज्म) के झण्डे…
‘श्रमेव जयते’-अशुद्ध! ‘भारत की भाषा’ का ध्यान भारत सरकार नहीं रखेगी तो कौन रखेगा?
‘श्रमेव जयते’ अशुद्ध, ‘श्रमेव जयते’ कष्टकर, ‘श्रमेव जयते’ चिन्ताजनक, ‘श्रमेव जयते’ हास्यास्पद। भारत सरकार की ओर से दिए गए नारे पर यह टिप्पणियाँ देश के…
संसद परिसर में ‘सांसद ने भौं-भौं’ से बताया- पालतू कहाँ हैं, किसने पाले हुए हैं!
संसद में एक ‘नामी सांसद’ हैं, जिन्हें विधायी कामकाज से ज्यादा इस बात में दिलचस्पी रहती है कि वे कब किसी को धक्का मारकर गिरा…
भारत-दक्षिण अफ्रीका टेस्ट श्रृंखला : “हम उन्हें घुटनों पर लाना चाहते थे”…और ले आए!
दक्षिण अफ्रीका ने भारतीय क्रिकेट टीम को पाँच दिवसीय मैचों की श्रृंखला के
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‘नेशनल डॉक्टर्स डे’ : दिल से निकली ये शुक्राने की आवाज़ बहुतों के दिल तक पहुँचेगी!
एक सच्चा वाक़िआ, और उतना ही सच्चे दिल से अदा किया गया शुक्रिया। यक़ीनी तौर पर शुक्राने की ये आवाज़ उन तमाम डॉक्टर्स और उनके…
सुनिए और पढ़िए…, एक कविता प्रेम की : ग़र कहीं नहीं मिली मैं तो मिलूँगी वहीं
एक कविता अपनी छोड़ आई हूँ मैं उसके घर,चार नज़रों में जबदो नाकों जितनी दूरी थी, ग़र कहीं नहीं मिली मैं तो मिलूँगी वहींजहाँ पहुँचने…
पूछती हो, तुम्हारा प्रेम क्या है? सुनो…
पूछती हो, तुम्हारा प्रेम क्या है? सुनो! तुम जानती हो मुझे शायद मुझसे बेहतर ही।चंद शौक, यादों और नापसंदगियों की दास्तां है।। और तुम भी…
राग झिंझोटी : एक छोटी सी कोशिश
बहुत मधुर राग है। राग झिंझोटी। खमाज थाट के अन्तर्गत इसे वर्गीकृत किया गया है। रात के दूसरे पहर (नौ से 12 बजे के बीच)…
ख़ुद के अंदर कहीं न कहीं, तुम अब भी मौजूद हो
मैं मिल जाती हूँ ख़ुद से जब हवा मुझे छूकर गुज़रती है वो याद दिलाती है मुझे बार बार कि मैं मौजूद हूँ सूखे पत्तों…


















