सिर्फ सुनने में दिलचस्पी रखने वालों के लिए ऑडियो फाइल नीचे दी गई है… श्रीभक्तमाल कोई साधारण ग्रंथ नहीं है, ऐसा हमारे संत-महात्माओं का कहना…
View More ‘सरल भक्तमाल’-4…: असाधारण ग्रंथ, जिसकी कहानियाँ भगवान भी मन लगाकर सुनते हैं!Category: Audio
‘सरल भक्तमाल’-3…ठाकुर जी ने ‘अप्रत्यक्ष प्रोत्साहन’ दिलाया श्रीराजेन्द्रदास जी महाराज से!
कहानी सिर्फ सुनना चाहें, तो ऑडियो नीचे दिया गया है, सुन सकते हैं… श्रृंखला की दूसरी कड़ी में बात निकली थी कि किस तरह ठाकुर…
View More ‘सरल भक्तमाल’-3…ठाकुर जी ने ‘अप्रत्यक्ष प्रोत्साहन’ दिलाया श्रीराजेन्द्रदास जी महाराज से!‘सरल भक्तमाल’-2…ठाकुर जी ने भक्तमाल की सेवा में मुझे कैसे लगाया?
सिर्फ सुनना चाहें तो नीचे ऑडियो फाइल पर क्लिक कर सकते हैं… यह बहुत महत्त्वपूर्ण प्रश्न है, खुद मेरे और सभी सुनने वालों के लिए…
View More ‘सरल भक्तमाल’-2…ठाकुर जी ने भक्तमाल की सेवा में मुझे कैसे लगाया?सरल भक्तमाल’-1…. आखिर इसकी जरूरत क्यों?
सिर्फ सुनना चाहें तो नीचे ऑडियो फाइल पर क्लिक कर सकते हैं… श्रृंखला की पहली कड़ी में हम बात करेंगे कि आखिर ‘सरल भक्तमाल’ प्रयास…
View More सरल भक्तमाल’-1…. आखिर इसकी जरूरत क्यों?‘नेशनल डॉक्टर्स डे’ : दिल से निकली ये शुक्राने की आवाज़ बहुतों के दिल तक पहुँचेगी!
एक सच्चा वाक़िआ, और उतना ही सच्चे दिल से अदा किया गया शुक्रिया। यक़ीनी तौर पर शुक्राने की ये आवाज़ उन तमाम डॉक्टर्स और उनके…
View More ‘नेशनल डॉक्टर्स डे’ : दिल से निकली ये शुक्राने की आवाज़ बहुतों के दिल तक पहुँचेगी!सुनिए और पढ़िए…, एक कविता प्रेम की : ग़र कहीं नहीं मिली मैं तो मिलूँगी वहीं
एक कविता अपनी छोड़ आई हूँ मैं उसके घर,चार नज़रों में जबदो नाकों जितनी दूरी थी, ग़र कहीं नहीं मिली मैं तो मिलूँगी वहींजहाँ पहुँचने…
View More सुनिए और पढ़िए…, एक कविता प्रेम की : ग़र कहीं नहीं मिली मैं तो मिलूँगी वहींपूछती हो, तुम्हारा प्रेम क्या है? सुनो…
पूछती हो, तुम्हारा प्रेम क्या है? सुनो! तुम जानती हो मुझे शायद मुझसे बेहतर ही।चंद शौक, यादों और नापसंदगियों की दास्तां है।। और तुम भी…
View More पूछती हो, तुम्हारा प्रेम क्या है? सुनो…राग झिंझोटी : एक छोटी सी कोशिश
बहुत मधुर राग है। राग झिंझोटी। खमाज थाट के अन्तर्गत इसे वर्गीकृत किया गया है। रात के दूसरे पहर (नौ से 12 बजे के बीच)…
View More राग झिंझोटी : एक छोटी सी कोशिशख़ुद के अंदर कहीं न कहीं, तुम अब भी मौजूद हो
मैं मिल जाती हूँ ख़ुद से जब हवा मुझे छूकर गुज़रती है वो याद दिलाती है मुझे बार बार कि मैं मौजूद हूँ सूखे पत्तों…
View More ख़ुद के अंदर कहीं न कहीं, तुम अब भी मौजूद होआज तुमसे कहना चाहता हूँ…, ऐसा लिखने वाले को पढ़िए और कहने वाले को सुनिए!
आज तुमसे कहना चाहता हूँ… कभी तुम से कहा नहीं कि तुम खाना बहुत अच्छा बनती।तुम्हारे घरेलू कामों की कभी तारीफ नहीं की।तुमने कितनी सफाई…
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