आज शाम गायत्री मन्दिर जाना हुआ। वहाँ जाता हूँ तो अक्सर कोई न कोई बुज़ुर्ग मिल जाता है। उनसे बातें करता हूँ, तो कुछ नया…
View More माँ की ममता से बड़ी कोई शक्ति नहींTag: अपना पन्ना
बंगाल, भाजपा और क्लबहाउस
क्लबहाउस (ऐपल यूजर्स के लिए बतकही का अड्डा) पर चुनाव रणनीतिकार प्रशान्त किशोर के साथ चुनिन्दा पत्रकारों (पढ़ना चाहिए, मौजूदा सत्तारूढ़ पार्टी के आलोचक) की बातचीत लीक…
View More बंगाल, भाजपा और क्लबहाउसशान्ति और स्थिरता व्यक्तित्व में गहराई से आती है..
अक्सर कहा जाता है, ‘गहरी नदी का बहाव हमेशा शान्त होता है।’ एकदम सही है। लेकिन क्या इसी ‘कहन’ का दूसरा पहलू ये नहीं है…
View More शान्ति और स्थिरता व्यक्तित्व में गहराई से आती है..कुमार गन्धर्व : जिनके गाए ‘निर्गुण’ से गुण-अवगुण परिभाषित कर पाता हूँ!
भारतीय मनीषा, विलक्षण संगीतकार और महान गायक पंडित कुमार गंधर्व का आज जन्मदिन है। कर्नाटक से मालवा के देवास में आ बसे। फिर यहीं जीवनभर…
View More कुमार गन्धर्व : जिनके गाए ‘निर्गुण’ से गुण-अवगुण परिभाषित कर पाता हूँ!‘मत कर तू अभिमान’ सिर्फ गाने से या कहने से नहीं चलेगा!
पूरा जीवन राय बनाने में, विचारों को संश्लित करने में, सघन अनुभूतियों की जमीन को उर्वरा बनाने में ही निकलता नज़र आ रहा है। यह…
View More ‘मत कर तू अभिमान’ सिर्फ गाने से या कहने से नहीं चलेगा!आचार्य चार्वाक के मत का दूसरा नाम ‘लोकायत’ क्यों पड़ा?
भरत अपने ननिहाल से वापस अयोध्या पहुँचते हैं। अयोध्या में स्थितियाँ बहुत विकट थीं। एक तरफ राज सिंहासन प्रतीक्षा कर रहा था। दूसरी तरफ पिता की…
View More आचार्य चार्वाक के मत का दूसरा नाम ‘लोकायत’ क्यों पड़ा?चार्वाक हमें भूत-भविष्य के बोझ से मुक्त करना चाहते हैं, पर क्या हम हो पाए हैं?
आचार्य चार्वाक बड़ी सुन्दर बात कहते हैं। उनकी बातें आज वर्तमान युग के एकदम अनुकूल हैं। बल्कि एक विचार तो यह भी हो सकता है कि वर्तमान बैंकिंग प्रणाली में प्रचलित…
View More चार्वाक हमें भूत-भविष्य के बोझ से मुक्त करना चाहते हैं, पर क्या हम हो पाए हैं?रातभर नदी के बहते पानी में पाँव डालकर बैठे रहना…फिर याद आता उसे अपना कमरा
उजालों में अँधेरे देखने का आदी था वो। जब दुनिया जागती, उसे लगता कि अब सूरज ढला है। रातभर नदी के बहते पानी में पाँव डालकर बैठे रहना…फिर…
View More रातभर नदी के बहते पानी में पाँव डालकर बैठे रहना…फिर याद आता उसे अपना कमरामैं अगर चाय छोड़ सकता हूँ, तो यक़ीन करना चाहिए- कोई कुछ भी कर सकता है
चाय। चाय केवल इसीलिए नहीं पी जाती कि अच्छी लगती है। चाय पीने के और भी कई कारण हो सकते हैं। चाय आदर-सत्कार की अनिवार्य…
View More मैं अगर चाय छोड़ सकता हूँ, तो यक़ीन करना चाहिए- कोई कुछ भी कर सकता हैकाश, चाँद की आभा भी नीली होती, सितारे भी और अंधेरा भी नीला हो जाता!
इसी गाढ़ी नीली दीवार के पीछे लटका है, माघ के शुक्ल पक्ष का चाँद, जो पूनम से होते हुए आज चौथ पर एक चौथाई कम हो गया…
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