तन सिन्दूरी-मन सिन्दूरी, ऊपर शोभित गगन सिन्दूरी।सींचा अपने खून से जिसको, वीरों की यह धरा सिन्दूरी।।(भारत की इस धरती को लाखों-करोड़ों साल से वीरों ने…
View More कविता जो बताती है- पहला ऑपरेशन सिन्दूर नरेन्द्र मोदी ने नहीं, तो किसने शुरू किया!Tag: प्रेरक
शुभमन से सुनिए- ‘ज़िम्मेदारियाँ कितनी भी हों, एक समय में एक पर ध्यान देंगे तभी सफल होंगे’
भारत की टैस्ट क्रिकेट टीम का कप्तान बनने के बाद शुभमन गिल ने पहली बार अपने मन की बात साझा की है। भारतीय क्रिकेट कन्ट्रोल…
View More शुभमन से सुनिए- ‘ज़िम्मेदारियाँ कितनी भी हों, एक समय में एक पर ध्यान देंगे तभी सफल होंगे’ईमानदारी से व्यापार नहीं किया जा सकता, इस बात में कितनी सच्चाई है?
अगर आप ईमानदार हैं, तो आप कुछ बेच नहीं सकते। क़रीब 20 साल पहले जब मैं अमेरिका में था, तब मेरे एक दोस्त ने मुझसे यह…
View More ईमानदारी से व्यापार नहीं किया जा सकता, इस बात में कितनी सच्चाई है?‘मदर्स डे’ माँ घर की कच्ची रसोई में अक्सर, सिर्फ भोजन नहीं प्रेम पकाती है!
माँ घर की कच्ची रसोई में अक्सरसिर्फ भोजन नहीं प्रेम पकाती है। स्नेह की धीमी आँच पर बड़े लाड़के साथ वह पकवान बनाती है। उसके…
View More ‘मदर्स डे’ माँ घर की कच्ची रसोई में अक्सर, सिर्फ भोजन नहीं प्रेम पकाती है!बेटी के नाम नौवीं पाती : मुझमें और अधिक मनुष्यता भरने के लिए शुक्रिया मेरी गिलहरी
प्रिय मुनिया मेरी लाडो! मैं तुम्हें यह पत्र तब लिख रहा हूँ, जब लगभग माहभर के लिए स्कूल जाने के बाद तुम्हारी छुट्टियाँ शुरू हो…
View More बेटी के नाम नौवीं पाती : मुझमें और अधिक मनुष्यता भरने के लिए शुक्रिया मेरी गिलहरीबच्चों को ‘नम्बर-दौड़’ में न धकेलें, क्योंकि सिर्फ़ अंकसूची से कोई ‘कलेक्टर’ नहीं बनता!
एक ज़माने में बोलचाल के दौरान कुछ जुमले चलते थे- ‘तुम कोई कलेक्टर हो क्या कहीं के’ या ‘ज़्यादा कलेक्टरी झाड़ने की कोशिश न करो’।…
View More बच्चों को ‘नम्बर-दौड़’ में न धकेलें, क्योंकि सिर्फ़ अंकसूची से कोई ‘कलेक्टर’ नहीं बनता!‘बढ़िया छत्तीसगढ़िया’ कहानी : मैं तुलसी यूट्यूब के आँगन की, सब कुछ हूँ मैं तेरे साजन की!
साल 1978 में एक फिल्म आई थी, ‘मैं तुलसी तेरे आँगन की’। उसमें इन्हीं शब्दों के साथ एक गीत था, “मैं तुलसी तेरे आँगन की।…
View More ‘बढ़िया छत्तीसगढ़िया’ कहानी : मैं तुलसी यूट्यूब के आँगन की, सब कुछ हूँ मैं तेरे साजन की!जयन्ती : गुरु गोलवलकर मानते थे- केवल हिन्दू ही पन्थनिरपेक्ष हो सकता है!
बात साल 1973 की है, राँची की। कार्यकर्ताओं के मध्य बैठक में अपने भाषण में श्री गुरुजी अर्थात् मा. गोलवलकर जी ने अपने भाषण में…
View More जयन्ती : गुरु गोलवलकर मानते थे- केवल हिन्दू ही पन्थनिरपेक्ष हो सकता है!बेटी के नाम सातवीं पाती : हमारी चुप्पियाँ तुम्हारे इंतजार में हैं, तुम जल्दी आना….।
प्रिय मुनिया, मेरी गिलहरी तुम आज पूरे तीन साल की हो गई हो। इस बार भी तुम्हें पत्र लिखने में पूरा एक साल बीत गया।…
View More बेटी के नाम सातवीं पाती : हमारी चुप्पियाँ तुम्हारे इंतजार में हैं, तुम जल्दी आना….।कहानियाँ सिर्फ़ क़िताबों में नहीं होतीं, क़िताबों की भी होती हैं…,पढ़िए एक क़िताब की कहानी!
क़िताब की यह कहानी शुरू होती है, दिसम्बर-2022 से। उस महीने में मैंने फेसबुक पर एक क़िताब से सम्बन्धित सूचना देखी। शीर्षक था, ‘प्रहर :…
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