इन्दौर में मेरे एक मित्र हैं। व्यवसायी हैं। लेकिन वह अपना व्यवसाय बन्द करना चाहते हैं। क्यों? इसलिए उन्हें अपने व्यवसाय के लिए कुशल और…
View More प्रशिक्षित लोग नहीं मिल रहे, इसलिए व्यापार बन्द करने की सोचना कहाँ की अक्लमन्दी है?Tag: रोचक-सोचक
इन बातों में रत्तीभर भी सच है, तो पाकिस्तान मुस्लिमों का हितैषी मुल्क कैसे हुआ?
सबसे पहले तो यह वीडियो देखिए ध्यान से। इसमें जो महिला दिख रही हैं, उनका नाम नायला क़ादरी बलूच है। वह बलूचिस्तान की आज़ादी के…
View More इन बातों में रत्तीभर भी सच है, तो पाकिस्तान मुस्लिमों का हितैषी मुल्क कैसे हुआ?देखिए, सही हाथों से सही पतों तक पहुँच रही हैं चिट्ठियाँ!
“आपकी चिट्ठी पढ़कर मुझे वे गाँव-क़स्बे याद आ गए, जिनमें मेरा बचपन बीता” प्रिय दीपक “आपके गाँव की चिट्ठी पर आपका ज़वाब पढ़ा। इस ज़वाब…
View More देखिए, सही हाथों से सही पतों तक पहुँच रही हैं चिट्ठियाँ!मेरे प्रिय अभिनेताओ, मैं जानता हूँ, कुछ चिट्ठियों के ज़वाब नहीं आते, पर ये लिखी जाती रहेंगी!
मेरे प्रिय अभिनेताओ इरफान खान और ऋषि कपूर साहब! मैं आप दोनों से कभी नहीं मिला, लेकिन यूँ लगता ही नहीं कि आपसे कोई वास्ता…
View More मेरे प्रिय अभिनेताओ, मैं जानता हूँ, कुछ चिट्ठियों के ज़वाब नहीं आते, पर ये लिखी जाती रहेंगी!‘आपकी टीम में कौन’ क्रिकेटर का ‘वैभव’, या जुए से पैसा बनाने का सपना बेच रहे ‘आमिर’?
तय कर लीजिए कि ‘आपकी टीम में कौन है’? क्योंकि इस सवाल के ज़वाब के तौर पर जो भी विकल्प हम-आप चुनेंगे, उसके परिणाम दूरगामी…
View More ‘आपकी टीम में कौन’ क्रिकेटर का ‘वैभव’, या जुए से पैसा बनाने का सपना बेच रहे ‘आमिर’?सुनो सखी…, मैं अब मरना चाहता हूँ, मुझे तुम्हारे प्रेम से मुक्ति चाहिए
एक ‘आवारा’ ख़त, छूट गई या छोड़ गई प्रियतमा के नाम! सुनो सखी मैं इतने वर्षों बाद तुम्हें कुछ लिख रहा हूँ। शायद इसे पढ़ते…
View More सुनो सखी…, मैं अब मरना चाहता हूँ, मुझे तुम्हारे प्रेम से मुक्ति चाहिएभारत ने फेंका पासा और पाकिस्तान का पैर कुल्हाड़ी पर, गर्दन फन्दे में! जानिए कैसे?
पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला तो करा दिया, लेकिन उसे शायद ऐसी उम्मीद नहीं रही होगी, जैसी प्रतिक्रिया उसे भारत से मिल…
View More भारत ने फेंका पासा और पाकिस्तान का पैर कुल्हाड़ी पर, गर्दन फन्दे में! जानिए कैसे?चिट्ठी-पत्री आज भी पढ़ी जाती हैं, बशर्ते दिल से लिखी जाएँ…ये प्रतिक्रियाएँ पढ़िए!
महात्मा गाँधी कहा करते थे, “पत्र लिखना भी एक कला है। मुझे पत्र लिखना है, और उसमें सत्य ही लिखना है तथा प्रेम उड़ेल देना…
View More चिट्ठी-पत्री आज भी पढ़ी जाती हैं, बशर्ते दिल से लिखी जाएँ…ये प्रतिक्रियाएँ पढ़िए!बच्चों को ‘नम्बर-दौड़’ में न धकेलें, क्योंकि सिर्फ़ अंकसूची से कोई ‘कलेक्टर’ नहीं बनता!
एक ज़माने में बोलचाल के दौरान कुछ जुमले चलते थे- ‘तुम कोई कलेक्टर हो क्या कहीं के’ या ‘ज़्यादा कलेक्टरी झाड़ने की कोशिश न करो’।…
View More बच्चों को ‘नम्बर-दौड़’ में न धकेलें, क्योंकि सिर्फ़ अंकसूची से कोई ‘कलेक्टर’ नहीं बनता!हँसिए…,क्योंकि पश्चिम के मीडिया को लगता है कि मुग़लों से पहले भारत में कुछ था ही नहीं!
लगता है, पश्चिम का मीडिया चुनिन्दा चीज़ों को भूल जाने की बीमारी की शिकार है। हिन्दी में यह बीमारी ‘स्मृति-लोप’ कहलाती है, जिसमें कोई याददाश्त…
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