समीर शिवाजीराव पाटिल, भोपाल मध्य प्रदेश
अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय (व्हाइट हाउस) ने एक मई 2025 को ‘रिलीजियस लिबर्टी कमीशन’ (धार्मिक स्वतंत्रता आयोग) बनाने के बाबत एक आदेश पर दस्तखत किए। वजह? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के समर्थक मतदाताओं में बड़ी संख्या इवेंजेलिकल ईसाईयों (दुनिया में ईसाई धर्म के प्रचारक) की है।
इससे पहले ट्रम्प शासन की शुरुआत में ‘यूएसएआईडी’ (यूएस एजेंसी फॉर इन्टरनेशनल डेवलमेन्ट) नामक संस्था को सरकार से मिलने वाली वित्तीय मदद रोकी गई थी। इसके बाद ‘यूएस कमीशन फॉर रिलीजियस फ्रीडम’ जैसी संस्थाओं का सरमाया भी हट गया था। इन दोनों संस्थाओं के बारे में दो बातें ध्यान देने की हैं। पहला- यूएसएआईडी पर दुनिया के अन्य देशों आन्तरिक मामलों (इनमें धार्मिक, राजनैतिक, सामाजिक, आदि शामिल) में बेजाँ दखलन्दाजी के आरोप रहे हैं। दूसरा- यूएस कमीशन फॉर रिलीजियस फ्रीडम के बारे में कहते हैं कि उसका मुख्य उद्देश्य दुनियाभर में ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार या दूसरे शब्दों में कहें तो अन्य धर्मावलम्बियों को ईसाई बनाने का है। संस्था को पूर्व में इस काम के लिए यूएसएआईडी से बड़ी वित्तीय मदद मिलती रही है, ऐसा भी बताया जाता है।
तो अब जबकि अमेरिका में नई शक्ल-ओ-सूरत के साथ धार्मिक स्वतंत्रता आयोग सामने आ रहा है, ईसाई धर्म प्रचार की गतिविधियाँ भारत सहित दुनियाभर में फिर तेज हाेने की आशंकाएँ जताई जा रही हैं। इन आशंकाओं को बीते दिनों का एक घटनाक्रम मजबूत आधार भी देता है, जिसमें ‘इंवेजेलिकल फैलोशिप ऑफ इण्डिया’ ने भारत में ‘रिलीजियस लिबर्टी फैलोशिप’ (धार्मिक स्वतंत्रता अध्येतावृत्ति) के लिए विज्ञापन निकाला है।
स्पष्ट है कि भारतीय संविधान में मतान्तरण के खिलाफ मौजूद अवधारणा के विरुद्ध अब अमेरकी दखलंदाजी के जरिए वैश्विक कथानक अथवा धारणा बनाकर भारत में सनातनी परम्परा के विरुद्ध षड्यंत्र फिर तेज होने वाला है। इस षड्यंत्र के तहत भ्रामक विचारोंं को फैलाने के लिए पक्षपाती अदालतें, पीत-पत्रकारिता करने वालों, और बिकने को हमेशा तैयार स्वयंसेवी संगठन तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं का तंत्र सक्रिय होने वाला है।
लिहाजा, अब देखने लायक बात यह होगी कि हिन्दुत्व के नाम पर सत्ता भोग रहे या उन्हें निर्देशित करने वाले लोग अपने उत्तरदायित्व के प्रति कितने सजग हैं? आम सनातनी धार्मिक व्यक्ति के लिए भी प्रश्न होगा कि वह अपनी सरकार अथवा हिन्दू समाज के हित परिप्रेक्ष्य में आने वाले समय में क्या कुछ कर सकता है?
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(नोट : समीर #अपनीडिजिटलडायरी की स्थापना से ही साथ जुड़े सुधी-सदस्यों में से एक हैं। भोपाल, मध्य प्रदेश में नौकरी करते हैं। उज्जैन के रहने वाले हैं। पढ़ने, लिखने में स्वाभाविक रुचि हैं। वैचारिक लेखों के साथ कभी-कभी उतनी ही विचारशील कविताएँ लिखते हैं। डायरी के पन्नों पर लगातार उपस्थिति दर्ज़ कराते हैं। सनातन धर्म, संस्कृति, परम्परा तथा वैश्विक मसलों पर अक्सर श्रृंखलाबद्ध लेख भी लिखते हैं।)
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