निकेश जैन, इन्दौर, मध्य प्रदेश
‘अतिथि देवो भव:’ अर्थात् मेहमान देवता समान होता है। यह भारतीय संस्कृति में निहित एक मूल्य है। लेकिन लगता है, हमारे भारतीय दफ्तर इस अवधारणा को किसी और ही दिशा में ले जा रहे हैं।
अभी इन्टरनेट पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है। इसमें एक कम्पनी के कर्मचारी किसी विदेशी अतिथि को प्रभावित करने, खुश करने की कोशिश कर रहे हैं। कैसे? दफ्तर के भीतर ही नाच कर, ठुमके लगाकर। मुझे समझ नहीं आया कि इस तरह से वे कर्मचारी क्या दिखाना चाहते हैं? क्या यह कि काम के अलावा उन्हें इस तरह नाचना-मटकना भी आता है? सच कहूँ, तो मुझे यह सब बिल्कुल भी ठीक नहीं लगता।
सूचना-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम करने वाली भारतीय कम्पनियों के दफ्तरों में अक्सर यह सब देखा जाता है। जब भी कोई विदेशी मेहमान, कोई बड़ा ग्राहक, या कम्पनी का कोई बड़ा पदाधिकारी दौरे पर आता है, तो सम्बन्धित दफ्तर में काम कर रहे कर्मचारी उसे ऐसे ही किन्हीं तरीकों से प्रभावित करना चाहते हैं।
मैं जानना चाहता हूँ कि हम ऐसे लोगों के साथ बराबरी से पेश क्यों नहीं आते? वे हमारे ग्राहक हो सकते हैं, बड़े अफसर हो सकते हैं, लेकिन फिर भी उनकी ऐसी विशेष मेहमाननवाजी क्यों? ऐसा क्यों नहीं हो सकता कि हम उनसे उतने ही सहज से भाव से, सभ्यता से मिलें, बातचीत करें, व्यवहार करें, जैसे अन्य लोगों से करते हैं? साथ ही, अपने काम पर ध्यान लगाएँ? पता नहीं, भारतीय पेशेवरों को यह बात समझ क्यों नहीं आती?
या फिर यह भी हो सकता है कि भारतीय पेशेवरों के पास अपनी नौकरी बचाने के लिए इसके अलावा कोई और रास्ता ही न रह जाता हो। और अगर ऐसा है, तो दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जा सकता है! मैं खुद कई कम्पनियों में नौकरी कर चुका हूँ। उस दौरान मैंने देखा है कि कम्पनी के मुख्यालय से आने वाले अतिथि के सामने कर्मचारी ऐसे दोहरे हो जाते हैं, मानो नौकरी में तरक्की पाने के लिए उनके पास इसके अलावा कोई रास्ता ही न हो!!
लोग काम छोड़कर सब कुछ करते हैं। अतिथि के साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं, उनके आगे-पीछे होते हैं, हर तरह से उनकी आवभगत करते हैं, उनका मनोरंजन-मनबहलाव करते हैं। मानो, वे कोई फिल्मी सितारा या ऐसे ही कोई अन्य दिग्गज हों। अमेरिका, वगैरा में ऐसा नहीं होता। वहाँ किसी ने कैलीफाेर्निया या अन्य किसी शहर के दफ्तर में किसी मेहमान का ऐसा स्वागत किए जाते हुए देखा हो, तो बताइए? शायद ही कोई बता सके!
हमें भी अपने काम पर ध्यान देते हुए सभी से बराबर का व्यवहार करना सीखना होगा। एक बार यह सीख लिया, तो फिर यूँ किसी के सामने नाचने-मटकने की जरूरत नहीं रह जाएगी। समझे न?
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निकेश का मूल लेख
अतिथि देवो भव: – our Indian offices are taking it to new heights….
This video clip is going viral in which employees are trying to impress or welcome a foreign guest by dancing in the corridor of their office cubicles.
What are they trying to prove? Their extracurricular talent?
This is what I don’t like about Indian IT setups. If someone visits from HQ or if a client visit – they are ready to do anything to impress.
Why can’t we behave from a position of equality? Yes, they are clients or your bosses but why any special treatment?
Be nice and professional to them as you would be to anyone else and just focus on the business!
But unfortunately our Indian leaders in GCCs or IDCs have no other way to keep their jobs I guess so they stoop to such tricks and drama…
I have seen this so many times myself where folks in Indian offices would jump to their HQ guest as that’s the only way to get promoted. They would run to take pictures and then post on LinkedIn as if the guy visiting is a celebrity!!
Have you ever seen anyone dancing when you visit them in your California office?
Learn to behave from a position of equality and you will never participate in such acts.
Thoughts?
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(निकेश जैन, कॉरपोरेट प्रशिक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी- एड्यूरिगो टेक्नोलॉजी के सह-संस्थापक हैं। उनकी अनुमति से उनका यह लेख अपेक्षित संशोधनों और भाषायी बदलावों के साथ #अपनीडिजिटलडायरी पर लिया गया है। मूल रूप से अंग्रेजी में उन्होंने इसे लिंक्डइन पर लिखा है।)
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