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भारत-इंग्लैण्ड का पाँचवाँ टेस्ट मैच शुरू भी नहीं हुआ और झगड़ा हो गया, आगे क्या होगा?

टीम डायरी

भारत और इंग्लैण्ड के बीच पाँच दिवसीय मैचों की जारी श्रृंखला का पाँचवाँ और अन्तिम मैच 31 जुलाई से शुरू होना है। इंग्लैण्ड के ओवल क्रिकेट मैदान पर यह मुकाबला है, जो भारत के नजरिए से बेहद ही अहम है। कारण कि श्रृंखला में इंग्लैण्ड तो 2-1 से पहले आगे चल रही है। वह इस अन्तिम मुकाबले को जीते या इसे बराबरी पर छोड़े, उसके नतीजे में कोई फर्क नहीं आएगा। दोनों ही स्थितियों में श्रृंखला की विजेता इंग्लैण्ड ही रहेगी। अलबत्ता, भारत के लिए अन्तिम मैच जीतने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। तभी वह श्रृंखला बराबर कर सकता हे। 

सो, जाहिर सी बात है कि भारत पर इस अन्तिम मुकाबले को लेकर दबाव कुछ अधिक है। इसका असर मैच के दौरान तो बाद में दिखेगा, मैदान पर अभी से  दिखने लगा है। वाकिआ मंगलवार, 29 जुलाई का ही है। भारतीय टीम ओवल के मैदान में अभ्यास सत्र के लिए आई हुई थी। उसी दौरान पिच बनाने वाले लोग विशेषज्ञ (क्यूरेटर) ली फोर्टिस की अगुवाई में अपना काम कर रहे थे। तभी भारतीय टीम के मुख्य प्रशिक्षक गौतम गम्भीर के सहयोगियों में से एक सदस्य कूलिंग बॉक्स लेकर आए। अभ्यास सत्र के दौरान जरूरत के हिसाब का पानी और हल्का-फुल्का खाने-पीने का सामान इसमें रखा जाता है। इसका वजन यही कोई 10 किलोग्राम के आस-पास ही रहता है। 

तो जैसे ही कूलिंग बॉक्स लाने वाले सदस्य पर फोर्टिस की नजर पड़ी, उन्होंने जोर से चिल्लाकर उसे हिदायत दी, “पिच से दूर रहो”। अपने साथियों के लिए हमेशा किसी से भी लड़ जाने वाले गौतम गम्भीर को यह बात नागवार गुजरी। वह उस समय नेट्स के पास खड़े थे। उन्होंने वहीं से ऊँची आवाज में फोर्टिस को हिदायत दे डाली, “मेरे साथी से इस तरह बात मत करो।” कोई और होता तो शायद गम्भीर की हिदायत को गम्भीरता से ले भी लेता। लेकिन फोर्टिस के बारे में बताया जाता है कि वह भी गरम दिमाग वाले आदमी ही हैं। तिस पर वह अपनी पिच के लिए भी संवेदनशील रहते हैं। मैच शुरू होने से पहले तक उसके आस-पास किसी को फटकने भी नहीं देते। 

लिहाजा, इन्हीं कारणों से दो गरम दिमाग के लोगों में फिर दूसरी भिडन्त हो गई। वह भी पहले से कुछ अधिक गम्भीर सी। इस बार गौतम गम्भीर अपने सहयोगी प्रशिक्षकों के साथ पिच का जाइजा लेने पहुँच गए थे। हालाँकि, अभी वे लोग उसके पास भी पहुँचते कि फोर्टिस ने फिर अपना रंग दिखाया। उन्होंने अपने एक मातहत को गम्भीर के पास भेजकर यह कहलवाया, “पिच के चारों तरफ खिंचे ढाई मीटर के दायरे से भीतर पैर न रखें।” अब इतना सुनते ही गम्भीर आपे से बाहर हो गए। वह सीधे फोर्टिस के पास जाकर उन्हें उनकी ‘हैसियत दिखाने’ लगे। यहाँ तक कहा, “तुम पिच बनाने वाले हो, ज्यादा बड़ा बनने की कोशिश न करो।” जवाब में फोर्टिस ने भी गम्भीर को खूब खरी-खोटी सुनाई। वह तो भला हो, भारत के बल्लेबाजी प्रशिक्षक सितांशु कोटक का, जो उन्होंने समय रहते बीच-बचाव कर लिया। वह फोर्टिस को पकड़कर दूसरी तरफ ले गए और उन्हें समझाकर शान्त किया। 

इसके बाद मामला ठण्डा पड़ा। इसमें अच्छी बात यह रही कि अब तक दोनों पक्षों में में से किसी ने भी ऊपरी स्तर पर मामले की औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है। लेकिन चिन्ताजनक बात यह है कि जब अभी मैच से पहले गरमा-गरमी का यह आलम है, तो मुकाबला शुरू होने के बाद क्या होगा? 

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(नोट : घटना का पूरा सिलसिलेवार ब्यौरा सितांशु कोटक ने सार्वजनिक किया है।) 

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