Trump Tweet

मैं खुश हूँ कि भारत ने बन्दूक की नोंक पर अमेरिका से व्यापार समझौता नहीं किया!

निकेश जैन, इन्दौर मध्य प्रदेश

“वे मिलकर अपनी मरी हुई अर्थव्यवस्थाओं को गर्त में ले जा सकते हैं।” अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत और रूस पर यह टिप्पणी की है। यकीन नहीं होता कि वास्तव में उन्होंने ऐसा कहा है….

इस टिप्पणी का स्पष्ट मतलब है कि भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौता फिलहाल तो नहीं हो रहा है। इसी कारण इस तरह हताश टिप्पणी अमेरिकी शासन प्रमुख की ओर से की जा रही हैं। 

वैसे, भारतीय नागरिक के तौर पर कहूँ तो मैं इस स्थिति से खुश हूँ। इसलिए कि बन्दूक के नोंक पर भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौता करने से इंकार कर दिया है। इसलिए कि मेरी सरकार अपनी जमीन पर सीना तानकर खड़ी है। व्यापारिक धमकियों के सामने झुकी नहीं है। व्यापार ऐसे होता भी नहीं है। 

भारत की अर्थव्यवस्था पूर्व में इससे भी खराब स्थितियों से गुजर चुकी है। हर बार वह ऐसे हालात से मजबूत होकर ही निकली है। ऐसे में 25% सीमा शुल्क लगाए जाने की चुनौती (अमेरिका की, वहाँ पहुँचने वाले भारतीय उत्पादों पर) का भी आसानी से सामना कर ही लेगी। इसलिए चिन्ता की कोई खास बात नहीं है।

इन हालात में अब हम 1.4 अरब भारतीयों का भी कर्तव्य बनता है कि हम इस आपदा को अपने लिए अवसर बनाने में अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाएँ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तो हमेशा कहते हैं न, “आपदा सिर्फ आपदा नहीं होती, उसमें अवसर भी छिपा होता है।” हमें अब उनकी बात को सही साबित करना है। 

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निकेश का मूल लेख

𝗧𝗵𝗲𝘆 𝗰𝗮𝗻 𝘁𝗮𝗸𝗲 𝘁𝗵𝗲𝗶𝗿 dead 𝗲𝗰𝗼𝗻𝗼𝗺𝗶𝗲𝘀 𝗱𝗼𝘄𝗻 𝘁𝗼𝗴𝗲𝘁𝗵𝗲𝗿!!! Can’t believe he really said that……..

This clearly means India-US trade deal is not happening and frustration is coming out in the form of a tweet!

As an Indian citizen, I am happy that my government stood their ground and did not bow down to a trade threat. Can’t do business at a gun-point!

Indian economy has survived much worse things so surviving 25% tariff is not a big deal.

Let’s use this disaster and convert this into an opportunity for 1.4B people.

Like PM Modi always says this could be our “आपदा में अवसर” moment…..

Thoughts? 

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(निकेश जैन, कॉरपोरेट प्रशिक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी- एड्यूरिगो टेक्नोलॉजी के सह-संस्थापक हैं। उनकी अनुमति से उनका यह लेख अपेक्षित संशोधनों और भाषायी बदलावों के साथ #अपनीडिजिटलडायरी पर लिया गया है। मूल रूप से अंग्रेजी में उन्होंने इसे लिंक्डइन पर लिखा है।)

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निकेश के पिछले 10 लेख

63- अतिथि देवो भव: – तो क्या उनके सामने हम ऐसे नाचने लगेंगे, वह भी दफ्तर में?
62- इसी गैरजिम्मेदार रवैये के कारण मैंने बोइंग के विमानों से यात्रा पूरी तरह ही बन्द कर दी है!
61- आपकी सेहत आपकी नौकरी से ज्यादा जरूरी है, ध्यान रखिए!
60- आरसीबी हादसा : उनकी नज़र में हम सिर्फ़ ‘कीड़े-मकोड़े’, तो हमारे लिए वे ‘भगवान’ क्यों?
59 – कभी-कभी व्यक्ति का सिर्फ़ नज़रिया देखकर भी उससे काम ले लेना चाहिए!
58- क्यों भारत को अब अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लाना ही होगा?
57- ईमानदारी से व्यापार नहीं किया जा सकता, इस बात में कितनी सच्चाई है?
56- प्रशिक्षित लोग नहीं मिल रहे, इसलिए व्यापार बन्द करने की सोचना कहाँ की अक्लमन्दी है? 
55 – पहलगाम आतंकी हमला : मेरी माँ-बहन बच गईं, लेकिन मैं शायद आतंकियों के सामने होता!
54 – हँसिए…,क्योंकि पश्चिम के मीडिया को लगता है कि मुग़लों से पहले भारत में कुछ था ही नहीं!

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