Bhagat Singh

जन्म तिथि : एक विचारधारा हैं ‘शहीद’ भगत सिंह, आइए , उनकी ‘धारा को आगे बढ़ाएँ

पवन जैन ‘घुवारा’, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश

भारत के यशस्वी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और क्रान्तिकारी शहीद भगत सिंह की आज, 28 सितम्बर को जन्म तिथि है। कुछ जगहों पर यह तारीख 27 सितम्बर भी मिलती है। हालाँकि मायने तारीखें नहीं रखतीं, बल्कि वह विचार रखता है, जो भगत सिंह के नाम के साथ आज भी जीवित है, हमारे बीच है। साल 1907 में पंजाब के बंगा गांव (अब पाकिस्तान का हिस्सा) में जन्मे भगत सिंह अपने आप में एक पूरी विचारधारा हैं। विचारधारा देशभक्ति की। विचारधारा देश के लिए संघर्ष करने की। विचारधारा देश को आगे ले जाने की।

बचपन से ही जिज्ञासु भगत सिंह के मन-मस्तिष्क को जलियाँवाला बाग हत्याकांड (1919) ने इतना झकझोर डाला था कि वह छोटी उम्र में ही देश की आजादी के संघर्ष में कूद पड़े। कम उम्र में ही शहीद हो गए। तब से उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष के लिए खासकर जाना जाता है। लेकिन वास्तव में उन्होंने क्रान्ति बन्दूक से नहीं, बल्कि विचारों से की थी। अपने संघर्ष से उन्होंने हमें सिखाया कि वास्तविक बदलाव संघर्ष व बलिदान से भर से नहीं, सोचने और सवाल करने की शक्ति से आता है। उनकी वैचारिक लड़ाई सिर्फ ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ नहीं थी, बल्कि एक ऐसे भारत के लिए भी थी जो समानता, न्याय और स्वतंत्रता पर आधारित हो।

उन्होंने कहा था, “अगर बहरों को सुनाना है, तो आवाज को बहुत ऊँचा करना होगा। आजादी केवल राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव भी होनी चाहिए।” उन्होंने अपने लेखों में समाजवाद, धर्म और स्वतंत्रता पर बहुत स्पष्ट विचार व्यक्त किए। उनका मानना था कि असल आजादी तभी मिलेगी, जब जनता शिक्षित व जागरूक होगी। भगत सिंह ने एक ऐसे भारत की कल्पना की, जहाँ सबको समान अधिकार, अवसर मिलें। शोषणविहीन, न्यायसंगत और वैज्ञानिक सोच पर आधारित समाज हो। उन्होंने एक ऐसी शासन-व्यवस्था की कल्पना की, जो जनता की सेवा करे, न कि अपने स्वार्थ के लिए सत्ता का दुरुपयोग करे। 

सोचिए, क्या ये विचार आज भी प्रासंगिक नहीं हैं? आज जब बेहतर शिक्षा-व्यवस्था व तर्कशील सोच की जरूरत पहले से कहीं अधिक महसूस होती है, शहीद भगत सिंह के विचार पहले से अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं। आज जब हम आर्थिक असमानता, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, सामाजिक भेदभाव जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, शहीद भगत सिंह के विचार ज्यादा प्रासंगिक हो जाते हैं। आइए, हम इन विचारों की ‘धारा’ को आगे बढ़ाएँ।

शहीद भगत सिंह की जन्म तिथि पर हमारी ओर से यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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(पवन जैन मूल रूप से बुन्देलखण्ड के टीकमगढ़ जिले के सक्रिय सामाजिक तथा राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। जनसामान्य से जुड़े मसलों पर वह लगातार आवाज बुलन्द करते हैं। उनकी पत्नी प्रियंका भी उन्हीं की तरह सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय रहती हैं। लेख के रूप में वे अपने विचार #अपनीडिजिटलडायरी को व्हाट्स एप के जरिए भेजते हैं।) 

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