टीम डायरी
सूचना-प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र की अग्रणी भारतीय कम्पनी इन्फोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति फिर से चर्चा में हैं। उन्होंने एक बार फिर इस बात की वकालत की है कि भारत के पेशेवरों को “चीन की 9-9-6 वाली कार्य-संस्कृति से सीखना चाहिए। उसे अपनाना चाहिए।” इसे सीधे शब्दों में कहें तो पेशेवरों को सुबह नौ बजे से रात नौ बजे तक सप्ताह में छह दिन काम करना चाहिए। यानि हफ्ते में 72 घण्टे लगातार।
मूर्ति के मुताबिक, इस तरह की कार्य-संस्कृति से न सिर्फ काम करने वालों की तरक्की होगी, उन्हें लाभ होगा, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति भी चीन की तरह तेज हो जाएगी। कैसे? ऐसे कि उकी कम्पनी जैसी कम्पनियाँ लगातार काम करते पेशेवरों के दम पर अधिक उत्पादन करेंगी और अधिक सेवाएँ दे सकेंगी। इससे सीधे तौर पर सबसे पहले तो उन्हें ही ज्यादा लाभ होगा। फिर उनके लाभ से देश की अर्थव्यवस्था को।
और काम करने वालों को क्या मिलेगा? निश्चित रूप से कुछ पैसे ज्यादा मिल जाएँगे। वह हर किसी को चाहिए भी। मगर उसके अलावा ऐसा भी बहुत कुछ मिलेगा, जो नहीं चाहिए। मसलन- नींद पूरी नहीं हो पाएगी। इतने लम्बे काम के घण्टों से थकान ज्यादा होगी। इसके नतीजे में तनाव, उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर), जैसी समस्याएँ भी होंगी ही। इस तरह की समस्याओं से दिल के दौरे या मस्तिष्क आघात जैसे खतरों को आमंत्रण मिलेगा। ऐसा देश के जाने-माने चिकित्सक कह रहे हैं। नारायण मूर्ति की सलाह के बाद देश के एक बड़े अखबार ने कुछ ख्यात चिकित्सकों से बात की। उन सभी की मिली-जुली राय वही है, जो संक्षिप्त रूप से बताई जा चुकी है।
गौर करने लायक है कि नारायण मूर्ति जैसे बड़े कारोबारी, उद्योगपति भी जानते हैं कि इस तरह से लगातार जब व्यक्ति काम, काम, और बस, काम ही करता रहता है, तो वह ऐसी बीमारियों का शिकार हो जाता है। उसके पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर विपरीत असर पड़ता है। फिर भी वे ऐसी सलाह देते हैं। पहले भी वे इस तरह की सलाह दे चुके हैं। तब उन्हें सप्ताह में 70 घण्टे तक लगातार काम करने की कार्य-संस्कृति का समर्थन किया था। अब उसमें दो घण्टे और बढ़ा दिए हैं। क्या सोचकर? इसका जवाब तो वे ही बेहतर दे सकेंगे।
