टीम डायरी
केन्द्र सरकार के एक आदेश के हवाले से मीडिया-सोशल मीडिया में सूचना चल रही है। इसमें देश के तमाम नागरिकों को सचेत किया गया है कि वे तीन महीने के भीतर पाइप से घरेलू गैस का इंतजाम करा लें। वरना उन्हें सिलेण्डर वाली गैस (एलपीजी) से भी हाथ धोना पड़ सकता है? अलबत्ता, इस सूचना के विस्तार में जाने पर पता चलता है कि यह सिर्फ सनसनी पैदा करने वाला शीर्षक है। कारण हम बताते हैं।
दरअसल, सरकार का यह आदेश अभी सिर्फ उनके लिए जिनके घरों या परिसरों में पीएनजी (पाइपलाइन वाली प्राकृतिक गैस) की आपूर्ति का बंदोबस्त हो चुका है। इसके बावजूद वे उसका उपयोग कर नहीं रहे हैं और तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के सिलेण्डर लेते हैं। लिहाजा, सरकार ऐसे लोगों को सख्ती के दायरे में लाई है क्योंकि ईरान-इजराइल-अमेरिका के युद्ध के बीच दुनियाभर में एलपीजी आपूर्ति पर जबर्दस्त विपरीत असर पड़ा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। हालाँकि अभी देश में संकट जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन आपूर्ति पर दबाव स्पष्ट नजर आने लगा है। और चूँकि ईरान-इजराइल-अमेरिका का मसला इतना उलझ चुका है कि वहाँ युद्ध रुक गया तब भी एलपीजी, पेट्रोल, डीजल, आदि की आपूर्ति व्यवस्थित होने में महीनों लग जाएँगे।
इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने पूरे देश में पीएनजी का इंतजाम तेज करने का निर्णय लिया है। सरकारी अफसरों को इसके लिए अधिक अधिकार दिए गए हैं, ताकि वे तेजी से पाइपलाइन बिछवाने बंदोबस्त कर सकें। जो कंपनियाँ पीएनजी की लाइन डालती हैं, उन्हें भी सख्त नियमों के दायरे में लाया गया है। साथ ही, जिनके घरों में या आस-पास पीएनजी लाइन पहुँच चुकी है, उनके लिए तो एलपीजी का विकल्प ही बंद करने का आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश के मुताबिक, पीएनजी सुविधा जहाँ है वहाँ अधिकृत प्रतिनिधि घर-घर जाकर लोगों से संपर्क करेंगे। उनके यहाँ कनेक्शन की स्थिति जाँचेंगे। अगर है, तो तुरंत प्रभाव से एलपीजी की जगह उसी का उपयोग करने का सुझाव देंगे। यदि नहीं है, तो तीन महीने की समय-सीमा देंगे। ताकि पीएनजी का इंतजाम करा लिया जाए। इस समय-सीमा के बाद संबंधित लोगों का एलपीजी कनेक्शन बंद हो जाएगा।
यद्यपि इस जानकारी के बावजूद कुछ आँकड़ों पर भी गौर करना जरूरी है। तो केन्द्र सरकार के ही आँकड़े बताते हैं कि देशभर में मार्च-2026 की स्थिति में लगभग 33.2 करोड़ एलपीजी कनेक्शन हैं। इनके लिए गैस आपूर्ति में 66 करोड़ के करीब सिलेण्डर लगते हैं। जबकि दूसरी ओर, पीएनजी की सुविधा सिर्फ 1.42 करोड़ घरों तक ही पहुँची है। वह भी गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में ऐसे घरों की संख्या अधिक है। और सरकार की ही मानें तो देश के अधिकांश घरों तक पाइप से गैस पहुँचने में अभी चार-पाँच साल लगेंगे। तो घबराइए मत, मीडिया-सोशल मीडिया की ‘सनसनी’ पर ध्यान भी मत दीजिए। हाँ, इतना जरूर है कि यदि किसी के नजदीक तक पीएनजी सुविधा पहुँच चुकी है, तो तत्काल प्रभाव से कनेक्शन ले लीजिए। इसमें सबका फायदा है।
