टीम डायरी
ऑस्ट्रेलिया में एक और क्रिकेटर की जान चली गई। छोटा ही था वह। महज 17 साल का। बेन ऑस्टिन नाम था। अपने क्लब में नेट प्रैक्टिस कर रहा था। सामने से उसका एक साथी साइड आर्म (हाथ के जैसा एक उपकरण) से उसे गेंद फेंक रहा था। तभी एक गेंद बेन ऑस्टिन की कनपटी के पास थोड़े नीचे की तरफ जा लगी। वह वहीं गिर पड़ा। यह घटना 28 अक्टूबर, मंगलवार की है। क्लब के सहयोगी उसे तुरंत अस्पताल ले गए। दो दिन तक वह जिन्दगी और मौत से जूझता रहा। आखिरकार गुरुवार, 30 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई।
हादसा मेलबर्न में पूर्वी उपनगरीय इलाके में हुआ। बेन ऑस्टिन वहाँ फर्नट्री गली क्रिकेट क्लब में खेलता था। अभ्यास के दौरान उनने सुरक्षा के सभी इंतजाम किए थे। सिर पर हैलमेट भी था। बस, हैलमेट के नीचे लगाया जाने वाला ‘स्टेम गार्ड’ नहीं पहना था, क्योंकि वह अनिवार्य नहीं होता। यही गलती उसे भारी पड़ गई और जहाँ उम्मीद नही थी, उस जगह लगी गेंद ने उसे क्रिकेट ही नहीं, दुनिया से हमेशा के लिए दूर कर दिया।
इस घटना ने ऑस्ट्रेलिया में ही फिल ह्यूज नाम के एक क्रिकेट खिलाड़ी के निधन की याद दिला दी। वहाँ शेफील्ड शील्ड प्रतियोगिता के दौरान बल्लेबाजी करते हुए फिल ह्यूज को भी गर्दन पर गेंद लगी थी। यह घटना 2014 की है। उनके निधन के बाद राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मैचों के दौरान खिलाड़ियों के लिए हैलमेट के नीचे ‘स्टेम गार्ड’ पहनने का बंदोबस्त किया गया था। लगभग सभी खिलाड़ी वह गार्ड पहनने भी लगे हैं। लेकिन छोटे स्तर के क्रिकेट में ऐसे सुरक्षा उपाय अब भी नहीं अपनाए जाते। इससे बेन ऑस्टिन जैसे उभरते खिलाड़ियों को जान से हाथ धोना पड़ता है।
तो क्या अब क्रिकेट में हर स्तर पर खिलाड़ियों की सुरक्षा के उपायों की समीक्षा नहीं की जानी चाहिए? क्या अधिकतम सुरक्षा के बंदोबस्त नहीं किए जाने चाहिए? जरूर होने चाहिए। जिम्मेदार लोग ध्यान दें इस पर।
