कुछ मर्दों के सीने में न, जैसे कोई किरच होती है। इससे उनका दिल ऐसे ठंडा हो जाता है, जैसे बर्फ का लौंदा। लेकिन तारा…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : सुअरों की तरह हम मार दिए जाने वाले हैं!Category: चुनिन्दा पन्ने
‘मायावी अंबा और शैतान’ : बुढ़िया, तूने उस कलंकिनी का नाम लेने की हिम्मत कैसे की!
……“तुम इस बच्ची के भीतर क्यों हो?” ओझन ने हम से सवाल किया लेकिन उसे सपने में भी उम्मीद नहीं थी कि हम उसे जवाब…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : बुढ़िया, तूने उस कलंकिनी का नाम लेने की हिम्मत कैसे की!फिनलैंड ने फिर बताया कि वह दुनिया में सबसे ज़्यादा ख़ुश कैसे रहता है
फिनलैंड। दुनिया का सबसे ख़ुशहाल मुल्क। छोटा सा देश है। आबादी दिल्ली के मुक़ाबले आधे से भी कम। महज़ 55-56 लाख के आस-पास। इसके बावजूद…
View More फिनलैंड ने फिर बताया कि वह दुनिया में सबसे ज़्यादा ख़ुश कैसे रहता हैआदिपुरुष का विरोध मतलब चेतावनी- अगर आप सीमा लाँघेंगे तो प्रतिकार होगा!
यकीनन पिछले कुछ दिनों से हिन्दुत्व के नवगायक मनोज काफी ‘मुंतशिर’ (बिखरा हुआ) रहे होंगे। वह ‘आदिपुरुष’ की रिलीज के बाद उठे गदर में पहले…
View More आदिपुरुष का विरोध मतलब चेतावनी- अगर आप सीमा लाँघेंगे तो प्रतिकार होगा!मायावी अंबा और शैतान : “अरे ये लाशें हैं, लाशें… इन्हें कुछ महसूस नहीं होगा”
तभी तेज हवा का थपेड़ा अंबा के चेहरे से टकराया और उसके गले से होते हुए भीतर पेट तक उतर गया। इससे उसे ऐसा लगा…
View More मायावी अंबा और शैतान : “अरे ये लाशें हैं, लाशें… इन्हें कुछ महसूस नहीं होगा”‘मायावी अंबा और शैतान’ : वे लोग नहीं जानते थे कि प्रतिशोध उनका पीछा कर रहा है!
खून जमा देने वाली सर्दी में बर्फ पर चलते हुए तलाशी दस्ता धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था। सर्द हवा ऐसी चुभ रही थी, जैसे शरीर…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : वे लोग नहीं जानते थे कि प्रतिशोध उनका पीछा कर रहा है!‘मायावी अंबा और शैतान’ : जन्म लेना ही उसका पहला पागलपन था
वह छोटी बच्ची पूरी रात अपनी माँ को तलाशती रही। जोतसोमा के जंगल की बाड़ के पास पहुँचते ही उसकी साँसें थम गईं। एकाएक वह…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : जन्म लेना ही उसका पहला पागलपन थाभरोसा रखिए… वह क़िस्मत लिखता है, तो वही उसे बदल भी सकता है
ज़िन्दगी वो अज़ीम तोहफा है, जो इस दुनिया को ख़ल्क़ (सृष्टि करना) करने वाले ने हम सबको दिया है। हम ज़िन्दगी को जन्म से मौत…
View More भरोसा रखिए… वह क़िस्मत लिखता है, तो वही उसे बदल भी सकता है‘रे मन चल गाँव की ओर’… यह कोई पलायन नहीं है!
भारत की आत्मा जहाँ बसती है, वह गाँव हैं। ये सुन्दर, सुरम्य स्थल हर भारतीय के मन में हमेशा से बसा रहा है। यहाँ प्रत्येक…
View More ‘रे मन चल गाँव की ओर’… यह कोई पलायन नहीं है!पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों का अपना संगीत होता है, समय निकालकर सुनिएगा ज़रूर!
संगीत इस सृष्टि की प्राचीनतम भाषा है। जानकार बताते हैं और सनातन ग्रन्थों में भी ऐसा उल्लेख है कि सृष्टि के विकास-क्रम में सबसे पहले…
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