टीम डायरी
हिन्दी फिल्मों का एक दौर सोमवार, 24 नवम्बर को पूरा हो गया। महान् अभिनेता धर्मेन्द्र जी का निधन हो गया। यद्यपि उनके निधन और उन्हें पंचतत्त्वों में विलीन किए जाने के साथ-साथ अंतिम संस्कार हुआ भारतीय मीडिया का। हाँ, यह चौंकने वाली बात नहीं है और न यह कोई किसी तथ्य या घटना की जबरन अपने हिसाब से व्याख्या करने की कोशिश ही है। यह सच्चाई है, जो सिलसिलेवार तरीके हुई कुछ घटनाओं को देखने समझने के बाद अपने आप सामने आ जाती है। पहली घटना के लिए नीचे दिया गया पहला वीडियो देखा जा सकता है।
#Dharmendra's last rites being performed at Pawan Hans Crematorium. #RIP Legend 💐🥹 #MovieTalkies pic.twitter.com/gpzaE218Fm
— $@M (@SAMTHEBESTEST_) November 24, 2025
धर्मेन्द्र जी का निधन हुआ। इतने बड़े कलाकार, इतनी ख्याति, इतना नाम, इतनी शोहरत। लेकिन मीडिया को शुरुआत के कई घण्टों तक उनके निधन की भनक तक नहीं लगने दी गई। अटकलें लगाई जाती रहीं कि धर्मेन्द्र जी के घर कोई एम्बुलेंस पहुँची है। उनके घर से एम्बुलेंस निकली है, आदि। देओल परिवार के किसी व्यक्ति ने धर्मेन्द्र जी के निधन की सूचना मीडिया को किसी भी रूप में देना जरूरी नहीं समझा। वह तो मुम्बई के पवन हंस शांति स्थल में जब अंतिम संस्कार होने लगा और फिल्म जगत की तमाम जानी-मानी हस्तियाँ वहाँ पहुँचने लगीं, तब कहीं यह पुष्टि हुई कि धर्मेन्द्र जी अब इस दुनिया में नहीं रहे। सवाल स्वाभाविक, कि ऐसा क्यों हुआ?
उत्तर बहुत सहज है। धर्मेन्द्र जी के परिवार के किसी सदस्य को मीडिया पर भरोसा नहीं। जी, इस बात को फिर समझिए कि यह परिवार उन लाखों लोगों में शुमार हो चुका है, जिसके लिए भारतीय मीडिया की विश्वसनीयता संदिग्ध हो चुकी है। या कहें कि कोई विश्वसनीयता रही ही नहीं। सो, फिर सवाल कि ऐसी स्थिति क्यों बनी। जवाब नीचे दिए गए दूसरे वीडियो में है। इसमें दो वीडियो हैं, देख सकते हैं। इन दो में से पहला वीडियो इसी महीने की 11 तारीख के आस-पास का है। उस वक्त धर्मेन्द्र जी काे बीमारी की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जैसे ही मीडिया वालों को यह सूचना मिली, वे सबसे जल्दी और सबसे पहले जानकारी दर्शकों तक पहुँचाने की होड़ में पल-पल की सूचनाएँ देने लगे। जाहिर तौर पर काफी सारी मनगढंत भी। इन्हीं में एक सूचना यह भी दे डाली कि धर्मेन्द्र जी का निधन हो गया है। जबकि ऐसा कुछ नही हुआ था। वे एक-दो दिन में ठीक हो गए।
एक बाप के लिए बेटे का गुस्सा जायज है।😡
— Mr,CooL (@MR_COOL77777) November 13, 2025
शर्म आनी चाहिए Rubika liyakat और अंजना जैसी कठपुतलियों को।
पत्रकारिता के नाम को कलंकित कर दिया है इन्होने अच्छे से #SunnyDeol ने #Dharmendra को मरा हुआ बताने पर मीडिया को गरिया या है।..💔 👊👇 pic.twitter.com/jQTxQXQk6A
इस तरह की मगढ़ंत और फर्जी सुचनाओं पर किसी भी संजीदा व्यक्ति को गुस्सा आ गए, फिर सनी देओल कैसे अछूते रह जाते? वह तो धर्मेन्द्र जी के सबसे बड़े बेटे हैं। इस नाते बुजुर्ग पिता ही नहीं पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके कन्धों पर, जिसे वह पूरी शिद्दत से निभाते भी रहे हैं। लेकिन जब मीडिया वालों की गैरजिम्मेदाराना हरकत उनके ध्यान में आई तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। पिता को अस्पताल से छुट्टी दिलाकर जब वह उन्हें घर ले जा रहे थे, तो मीडिया वालों को देखते ही उनका गुस्सा जाहिर भी हो गया। ऊपर के दो वीडियो में अगला देखिए।
RIP @anjanaomkashyap ji!
— Civic Opposition of India (@CivicOp_india) November 13, 2025
With you an era of journalism is dead! 😭😭😭
pic.twitter.com/ZFfQ5KjqKl
जैसा कि पहले ही कहा, मीडियो वालों की ऐसी ऊलजलूल और गैरजिम्मेदाराना हरकतों से आम आदमी का गुस्सा भी स्वाभाविक है। सो, उसके इजहार का एक तरीका ऐसा भी सामने आया, जो ऊपर दिए गए वीडियो में दिखता है। #अपनीडिजिटलडायरी अलबत्ता, ऐसे विरोध का भी समर्थन नहीं करती, बावजूद इसके ऐसी अभिव्यक्ति को सहज, स्वाभाविक माना जा सकता है क्योंकि मीडिया के लोग गैरजिम्मेदार हरकतों से बाज आ नहीं रहे हैं। धर्मेन्द्र जी के निधन का मामला कोई इकलौता नहीं है। मीडिया वालों ने ऐसे ही पुख्ता तौर पर पुष्टि किए बिना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की भी सूचना जारी कर दी थी। बाद में जब जानकारी झूठी निकली तो ठीकरा सोशल मीडिया पर फोड़ दिया। यही नहीं, पाकिस्तान स्थित आतंकी शिविरों के विरुद्ध भारत के सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ जैसे अतिसंवेदनशील और देश की सुरक्षा से जुड़े मामले में मीडिया वालों ने जिम्मेदारी नहीं दिखाई। वे वाहियात सूचनाएँ देते रहे। इसके लिए वैश्विक स्तर पर भारतीय मीडिया को शर्मिन्दगी भी उठानी पड़ी।
ऐसे में, सवाल यह है कि अब जबकि मीडिया वालों को उनके जीते जी पुष्पांजलि और श्रद्धांजलि अर्पित की जाने लगी है, उन्हें मृत बताया जाने लगा है, तो क्या अब उनकी आँखें खुलेंगी? सबसे पहले और सबसे जल्दी की जगह क्या वे सबसे विश्वसनीय सूचनाओं को प्राथमिकता देंगे? भले थोड़ी देर से सही?
देखने वाली बात होगी यह। हालाँकि, उम्मीद बहुत कम रखिए। इसलिए अपनी मानसिक सेहत दुरुस्त रखने के लिए इनसे दूरी बनाकर ही रखें तो बेहतर।
