Aeroplane Fuel

हवाई जहाज के 54 लाख लीटर ईंधन की तस्करी, यह बड़ी साजिश तो नहीं?

टीम डायरी

अभी तक हम सब ने मिट्‌टी के तेल, डीजल, पेट्रोल या फिर मालगाड़ियों से कोयला चुराकर इधर-उधर बेचे जाने की ख़बरें ही सुनी थीं। लेकिन अब दिल्ली पुलिस ने हवाई जहाज के ईंधन की चोरी और तस्करी के एक बड़े मामले का भी भंडाफोड़ भी किया है। मामले में छह लोगों को पकड़ा गया है। 

बताया जाता है कि दिल्ली के मुंडका इलाके में स्थित एक गोपनीय गोदाम पर छापा मारा गया। वहाँ से ही हवाई जहाज के ईंधन की तस्करी का यह कारोबार चल रहा था। वह अब भी बीते तीन साल से। अब तक हवाई जहाज के 54 लाख लीटर ईंधन की तस्करी वहाँ से हो चुकी है। रोज 5,000 लीटर ईंधन चुराया जा रहा था। यानि महीने में 1.5 लाख लीटर। इस कारण सम्बन्धित तेल कम्पनी को हर महीने 1.62 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा था। पुलिस ने गोदाम से चोरी का 72,000 लीटर हवाई जहाज का ईंधन जब्त भी किया है। 

हवाई जहाज के ईंधन की तस्करी करने वाले कितने शातिर थे, यह देखिए। हिन्दुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) के बहादुरगढ़ स्थित डिपो से दिल्ली के इन्दिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्‌डे के लिए रोज तेल के टैंकर निकलते हैं। इन टैंकरों को ऐसे तालाबन्द किया जाता है कि उन्हें सीधे हवाई अड्‌डे पर खोला जा सके। तेल की मात्रा नापने के लिए खास किस्म की छड़ हाेती है। साथ ही, जीपीएस (ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम) के जरिए टैंकरों पर रास्तेभर निगरानी रखने का भी बन्दोबस्त होता है। लेकिन तस्करों ने सबका तोड़ निकाल लिया।

तस्करों ने पहले तो जीपीएस से छेड़छाड़ की, ताकि उन पर निगरानी न रखी जा सके। फिर टैंकरों की नकली चाबियाँ बनवाईं। साथ ही ईंधन की मात्रा नापने वाली विशेष छड़ें भी फर्जी बनवा लीं। सब इंतजाम होने के बाद एचपीसीएल के डिपो से निकले टैंकरों को रास्ते में मुंडका वाले गोपनीय गोदाम की तरफ मोड़ा जाने लगा। वहाँ पर नकली चाबियों से टैंकर खोले जाते थे। तेल निकाला जाता था और फिर टैंकर दिल्ली के अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्‌डे की ओर रवाना कर दिए जाते थे। वहाँ नकली छड़ों की माप से साबित किया जाता था कि तेल पूरा पहुँचा है। इधर, तस्करी वाले ईंधन को खुले बाजार में परिष्कृत (रिफाइंड) तारपीन का तेल बताकर बेचा जाता था। 

देश की राजधानी दिल्ली में इतने संवेदनशील ईंधन की तस्करी का यह सिलसिला तीन साल से चल रहा था और किसी को कानों-कान खबर तक नहीं थी। आश्चर्य की बात है!! वह तो जब अहमदाबाद में एयर इण्डिया का विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ और उसके दोनों इंजनों के बन्द होने के कारणों में ईंधन के साथ हवा अथवा पानी की मिलावट की आशंकाएँ भी जताई गईं, तब सख्ती से जाँच हुई। इसके बाद यह भांडा फूटा है।

इसीलिए अब ये सवाल लाजिम हैं कि क्या यह मामला किसी साजिश की कोई पहली कड़ी तो नहीं है? क्योंकि इतने संवेदनशील ईंधन की तीन साल तक बेरोकटोक तस्करी किन्हीं छुटभैया अपराधियों के वश की बात नहीं हो सकती। दूसरा सवाल  यह भी कि तस्करी का यह मामला क्या सिर्फ दिल्ली तक सीमित है या फिर देश के अन्य स्थानों में इसकी कड़ियाँ बिखरी हैं? इन सवालों के जवाब सख्ती से तलाशे जाने चाहिए।

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