सरकारी स्कूलों में पीने के पानी की स्थिति।
ज़ीनत ज़ेदी, शाहदरा, दिल्ली से
आज-कल एक अहम खबर सुर्खियाँ बटोर रही है। यह कि पंजाब के फिरोजपुर के सरकारी विद्यालय में रोज़ तीन से चार बार घंटियाँ बजाई जा रही हैं। ताकि बच्चों को पानी पीने की याद आए। वे पानी पीएँ। और घंटी बजते ही स्कूल के सभी विद्यार्थी अनिवार्य रूप से पानी पीते भी हैं। यह सिलसिला वैसे, कोई नया नहीं है। जानकारी के मुताबिक, यह शुरुआत केरल से हुई है। क़रीब तीन साल पहले। फिर कर्नाटक, तेलंगाना, आन्ध्र आदि राज्यों से होते हुए ये मामला पंजाब पहुँचा है। इस बारे में कुछ समय पहले ही #अपनीडिजिटलडायरी पर भी जानकारी दी गई है। इसमें बताया गया कि घंटी बजाकर बच्चों के लिए पानी पीने की पहल आख़िर शुरू करने की ज़रूरत ही क्यों पड़ी।
अलबत्ता, इस ख़बर के बहाने हम एक अहम सवाल पर विचार कर सकते हैं। और ये सवाल है कि हिन्दुस्तान में आज़ादी के इतने साल बाद और यहाँ तक कि दुनिया में अब तक, ख़ास तौर पर सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए पीने के पानी समुचित प्रबन्ध क्यों नहीं हो पाया है? अभी इसी फरवरी में संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था यूनेस्को की रिपोर्ट आई है। इसमें बताया गया है कि दुनियाभर में स्कूलों में पढ़ने वाले एक तिहाई बच्चों को पीने के पानी सुविधा प्राप्त नहीं है। यही नहीं, क़रीब दो साल पहले 2021 में भारत सरकार की ओर से राज्यसभा में बताया गया कि देश के 42,000 के लगभग ऐसे स्कूल हैं, जहाँ बच्चों के लिए पीने के पानी का पर्याप्त प्रबन्ध नहीं है।
अब कोई कह सकता है कि यह रिपोर्ट दो साल पुरानी है। स्थिति में अब तक कुछ सुधार हो चुका होगा। पर नहीं। थोड़ा ठहरिए। जम्मू-कश्मीर में एक स्वयंसेवी संस्था है, ‘प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन’। उसने इस साल जनवरी में एक रिपोर्ट दी। उसमें बताया कि राज्य के 30 फ़ीसद सरकारी स्कूलों में पीने के पानी का समुचित इन्तिज़ाम नहीं है। लिहाज़ा सवाल फिर वही कि क्यों नहीं है? क्या स्कूली बच्चों को इतना अधिकार भी नहीं कि वह अपनी प्यास बुझाने के लिए दो घूँट पानी पी सकें? उनके लिए इसका समुचित प्रबन्ध हो जाए?
क्या हमारी सरकार को इस पर विचार नहीं करना चाहिए? पर्याप्त पानी शरीर के लिए अनिवार्य है। इसमें ऐसे अनेक गुण होते हैं, जो पाचन क्रिया सुधारने में मदद करते हैं। शरीर की कोशिकाओं को ताज़ा करते हैं। चेहरे पर चमक लाने में भी उपयोगी हैं। इसीलिए इंसानी शरीर दिन में कम से कम दो-तीन लीटर पानी चाहता है। कल्पना कीजिए, क्या विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे छह-आठ घंटे तक की स्कूल टाइमिंग के लिए इतना पानी घर से ला सकते हैं? क्या उन्हें स्कूलों में ही इसका अच्छा इन्तिज़ाम नहीं मिलना चाहिए? और साथ ही बीच-बीच में इतना समय भी कि वे अपने शरीर की पानी की ज़रूरत पूरी करते रहें। लगातार पानी पीते रहें? यह सवाल इसलिए क्योंकि कई स्कूलों में अनुशासन के नाम पर बच्चों को पानी पीने के लिए कक्षा से बहार तक नहीं जाने दिया जाता। यह भी सच्चाई है।
ऐसे में, सभी जागरूक लोगों से अनुरोध है कि इस विषय पर सोचें और सुझाव दें। ताकि विद्यार्थियों की समस्या का कोई समाधान निकल सके।
जय हिन्द
——
(ज़ीनत #अपनीडिजिटलडायरी के सजग पाठक और नियमित लेखकों में से एक हैं। दिल्ली के आरपीवीवी, सूरजमलविहार स्कूल में 10वीं कक्षा में पढ़ती हैं। लेकिन इतनी कम उम्र में भी अपने लेखों के जरिए गम्भीर मसले उठाती हैं। उन्होंने यह आर्टिकल सीधे #अपनीडिजिटलडायरी के ‘अपनी डायरी लिखिए’ सेक्शन पर पोस्ट किया है।)
——-
ज़ीनत के पिछले लेख
8- शिक्षक वो अज़ीम शख़्सियत है, जो हमेशा हमें आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है
7- हो सके तो अपनी दिनचर्या में ज्यादा से ज्यादा हिन्दी का प्रयोग करें, ताकि….
6- खुद को पहचानिए, ताकि आप खुद ही खुद से महरूम न रह जाएँ
5- अनाज की बरबादी : मैं अपने सवाल का जवाब तलाशते-तलाशते रुआसी हो उठती हूँ
4- लड़कियों को भी खुले आसमान में उड़ने का हक है, हम उनसे ये हक नहीं छीन सकते
3- उड़ान भरने का वक्त आ गया है, अब हमें निकलना होगा समाज की हथकड़ियाँ तोड़कर
2- दूसरे का साथ देने से ही कर्म हमारा साथ देंगे
1- सुनें उन बच्चों को, जो शान्त होते जाते हैं… कहें उनसे, कि हम हैं तुम्हारे साथ
देश में जनगणना होने वाली है। मतलब जनसंख्या कितनी है और उसका स्वरूप कैसा है,… Read More
जय जय श्री राधे Read More
अभी एक तारीख को किसी जरूरी काम से भोपाल से पन्ना जाना हुआ। वहाँ ट्रेन… Read More
भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर का उद्घाटन 13 फरवरी 2026 को हुआ। इसे… Read More
‘भ्रष्ट’ का अर्थ है- जब कोई अपने धर्म (कर्तव्य-पथ) से दूर हट जाए और ‘आचार’… Read More
ऐसी सूचना है कि अंग्रेजों की ईस्ट इण्डिया कम्पनी फिर दिवालिया हो गई और उसका… Read More