कलि युग में भक्ति मार्ग पाखण्ड से घिरा रहता है, इसलिए भगवान के भजन-पूजन, नाम जप, आदि की सुविधा उसके सरलतम रूप में होने पर…
View More ‘सरल भक्तमाल’- 11..: तर्क कोई कितने भी दे, वैष्णव भक्ति के मूल सम्प्रदाय तो चार ही हैं!Tag: अपना पन्ना
फिल्म ‘थ्री इडियट’ के फुनसुक वाँगड़ू नहीं हैं सोनम वाँगचुक, फिर भी ऐसा प्रचार क्यों?
शिक्षा प्रणाली में मूलभूत सुधार और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की माँग के साथ लद्दाख के सामाजिक, शैक्षिक और पर्यवारण कार्यकर्ता सोनम…
View More फिल्म ‘थ्री इडियट’ के फुनसुक वाँगड़ू नहीं हैं सोनम वाँगचुक, फिर भी ऐसा प्रचार क्यों?‘सरल भक्तमाल’- 10..: अब हम सीधे कलियुग में हुए भगवान के भक्तों के चरित्र क्यों कहेंगे?
‘श्री भक्तमाल’ के करीब-करीब सभी संस्करणों में कथा का क्रम सत युग में हुए भगवान के भक्तों जीवन प्रसंगों से शुरू होता है। फिर त्रेता…
View More ‘सरल भक्तमाल’- 10..: अब हम सीधे कलियुग में हुए भगवान के भक्तों के चरित्र क्यों कहेंगे?क्या हिन्दुत्त्व को अब सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की फिर से समीक्षा नहीं करनी चाहिए?
बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की अभूतपूर्व विजय और प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी के दीर्घतम कार्यकाल वाले उत्सव की निष्पत्ति नैतिक अशुचिता पर…
View More क्या हिन्दुत्त्व को अब सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की फिर से समीक्षा नहीं करनी चाहिए?‘सरल भक्तमाल’- 9…: प्रियादास कौन थे, उन्होंने भक्तमाल-टीका 90 साल बाद कैसे लिखी?
‘श्री भक्तमाल’ के बारे में दिलचस्प बात यह है कि वर्तमान में, इस महान् ग्रंथ की पूर्णता ‘श्री भक्ति रस बोधिनी’ के बिना होती नहीं…
View More ‘सरल भक्तमाल’- 9…: प्रियादास कौन थे, उन्होंने भक्तमाल-टीका 90 साल बाद कैसे लिखी?‘सरल भक्तमाल’- 8…: श्री नाभादास जी का यह नाम कैसे पड़ा, और इसका मतलब क्या है?
श्री भक्तमाल जैसे सुन्दर, महान् ग्रंथ की रचना करने वाले गोस्वामी श्री नाभादास जी का असली नाम यह नहीं था। उनके माता-पिता ने उनका क्या…
View More ‘सरल भक्तमाल’- 8…: श्री नाभादास जी का यह नाम कैसे पड़ा, और इसका मतलब क्या है?‘सरल भक्तमाल’-7…: हनुमान जी हैं बाल-ब्रह्मचारी, तो नाभादास जी ‘हनुमानवंश’ के कैसे?
‘श्री भक्तमाल’ के मुख्य रचनाकार गोस्वामी श्री नाभादास जी के जन्म और वंश के बारे में दो-तीन कहानियाँ कही-सुनी जाती हैं। एक कहानी में उन्हें…
View More ‘सरल भक्तमाल’-7…: हनुमान जी हैं बाल-ब्रह्मचारी, तो नाभादास जी ‘हनुमानवंश’ के कैसे?‘सरल भक्तमाल’-6…: श्री नाभादास जी के हाथों ‘भक्तदाम’ ग्रंथ प्रकट कैसे हुआ?
गोस्वामी श्री नाभादास जी के हाथों जब ‘श्री भक्तमाल’ प्रकट हुआ, जब उन्होंने पहली बार इसे लिखा, तो इसका नाम उन्होंने ‘भक्तदाम’ रखा था। यह…
View More ‘सरल भक्तमाल’-6…: श्री नाभादास जी के हाथों ‘भक्तदाम’ ग्रंथ प्रकट कैसे हुआ?पर्यावरण दिवस, ईंधन बचाने की बातें और निजी कारों का ऐसा तमाम-जाम, दिलचस्प है न?
मैं बेंगलुरू में जहाँ रहता हूँ, वहाँ अपने घर के सामने रोज इस तरह का नजारा देखता हूँ। देख-देखकर सोचता रहता हूँ कि हम पेट्रोल-डीजल…
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…और उनका ग्रीन कार्ड हासिल करने का सपना टूट गया! कोई तो उन भारतीयों को नींद से जगाए और बताए कि वह ‘उनका देश’ नहीं…
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