अगर इन सभी प्रश्नों का उत्तर ‘हाँ’ में है, तो सोचिए कि इस तरह की समस्या का निदान क्या है? क्या थोड़ी पुरातनपंथी सोच बनाए रखने में कोई बुराई है, अगर उसके जरिए समाधान मिलता हो तो? हमारा चरित्र, हमारा व्यक्तित्त्व, हमारा भविष्य सुरक्षित, बेदाग रहता हो तो? निश्चित रूप से, ऐसी पुरातनपंथी में कोई बुराई नहीं है।