सरकारें हादसे की बदबूदार बिछात पर गंदी गोटियां ही चलती नज़र आ रही हैं!

विजय मनोहर तिवारी की पुस्तक, ‘भोपाल गैस त्रासदी: आधी रात का सच’ से, 17/2/2022

भोपाल में भाजपा ने धरना-प्रदर्शन के जरिए मामले को और गरमाने की कोशिश की है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज काली साड़ी पहनकर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं। उन्होंने कहा है कि गैस पीड़ितों को न्याय और राहत दिलाने के लिए भाजपा लोकसभा सत्र के पहले दिन सदन में केस फिर खुलवाने के लिए प्रस्ताव पेश करेगी। साथ ही नियम 184 के तहत 1989 के समझौते को रद्द कर नए समझौता की मांग करेगी। इसमें पीड़ितों को सम्मानजनक मुआवजा और दोषियों को सजा दिलाने की बात शामिल होगी। नियम 184 में पेश प्रस्ताव पर वोटिंग होती है। ऐसे में यदि कांग्रेस इसके खिलाफ वोटिंग करेगी तो उसकी कलई खुल जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार पीड़ितों को मुआवजा नहीं देती है, तो प्रदेश सरकार अपने बजट से इसकी व्यवस्था करेगी। 

उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी, तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुनसिंह और 1996 में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एएम अहमदी को गैस पीड़ितों के साथ धोखा करने का जिम्मेदार ठहराया। भगवा दुपट्टों में नजर आने वाले भाजपा नेता गले में काला गमछा डाले हुए थे। कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के हाथ में भी काला झंडा था और उस पर नारे लिखे हुए थे। इस प्रदर्शन के एक दिन पहले सुषमाजी से उनके घर पर मेरी मुलाकात हुई। कुछ महीने पहले मध्यप्रदेश सरकार ने विधानसभा का सत्र बुलाया था। इसकी थीम थी- मध्यप्रदेश बनाओ। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान बाद में बाकायदा मध्यप्रदेश बनाओ यात्रा पर गांवों की खाक छानने भी निकले थे। उनकी मंशा प्रदेश के विकास के लिए गांव गलियों में जागरूकता पैदा करने की रही होगी। लेकिन कांग्रेस ने, खासतौर से दिग्विजयसिंह ने इसका बड़ा मजाक बनाया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश तो पहले से ही बना हुआ है, आप उसी के मुख्यमंत्री हो, अब यह शिगूफा क्यों? विधानसभा के विशेष सत्र का भी कांग्रेस के विधायकों ने न केवल बहिष्कार किया, बल्कि समानांतर विधानसभा लगाकर इसे हास्य का विषय दिया। 

सुषमा से बातचीत में मैंने कहा कि गैस हादसे पर आए फैसले के बाद यह एक बड़ा अवसर था, जब विधानसभा का विशेष सत्र अवश्य ही बुलाया जाना चाहिए था। भोपाल को इंसाफ की खातिर एक सत्र। इसमें आप इंसाफ की बात करते। किसी पर आरोप लगाने की कोई जरूरत नहीं थी। कांग्रेस को भी इस सत्र का बहिष्कार करने के पहले हजार बार सोचना पड़ता। प्रदेश की छह करोड़ जनता के चुने हुए प्रतिनिधि विधानसभा से यह आवाज बुलंद करते कि सुप्रीम कोर्ट इस केस को फिर से खोले। यह अंतरराष्ट्रीय खबर होती, जो ‘मध्यप्रदेश बनाओ’ जैसे एकदम स्थानीय मुद्दे से ज्यादा सकारात्मक प्रचार भी दिलाती। सुषमाजी ने कहा कि सीएम साहब को यह सुझाव दिया? मैंने कहा कि जरूर देता, लेकिन वे तो विदेश में हैं, वह भी ऐसे वक्त। उन्होंने कहा कि वे संसद के अगले सत्र की शुरुआत में ही भोपाल गैस हादसे पर अपनी बात रखेंगी। फिलहाल मध्यप्रदेश भाजपा विरोध प्रदर्शन करने जा ही रही है। जो भी संभव होगा, हम करेंगे। 

सरकारों की मंशा पहले जो भी रही हो और अब जो भी हो, इस वक्त मीडिया अपने सही काम में लगा है। वह एक के बाद एक परत को छील रहा है। हर छिलाई के बाद कड़वी सच्चाई का एक और घिनौना पन्ना खुल जाता है।…. 

दोनों राजधानियों में सरकारें हादसे की बदबूदार बिछात पर अपनी-अपनी गंदी गोटियां ही चलती नजा आ रही हैं। दिल्ली में मंत्री समूह पर अब देश का दबाव दिखाई दे रहा है। ऐसा लग रहा है कि सरकार समझ रही है कि मुआवजे का पैकेज पीडितों को खुश कर सकता है लेकिन इंसाफ की लड़ाई अब देश के स्तर पर है। इसलिए मंत्री समूह पहली बार केस को फिर से खुलवाने के मुद्दे पर सोचता दिख रहा है। भोपाल में भी इसी दिशा में आगे की रणनीति के लिए विवेक तन्खा का नाम आगे आ रहा है। 

….गृह मंत्री पी चिदंबरम की अध्यक्षता वाले पुनर्गठित मंत्री समूह ने शनिवार को भोपाल गैस त्रासदी मामले में लंबित कानूनी मसलों और मौजूदा कानून विकल्पों पर चर्चा की चर्चा के बाद मंत्री-समूह संभावित निष्कर्षो तक पहुंच गया है। माना जा रहा है कि दोषियों के खिलाफ आरोप हल्के कर देने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका लगाने पर सहमति बन गई है। बैठक के बाद चिदंबरम ने कहा, ‘हमने सभी लंबित कानूनी मुद्दों और संभावित विकल्पों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री को सोमवार को सौंपे जाने वाली रिपोर्ट में ये निष्कर्ष शामिल होंगे।’ बैठक के दौरान एंडरसन के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी चर्चा में उठा। 

चिदंबरम द्वारा समूह के सभी सदस्यों को दिए एजेंडा पेपर में लिखा है, ‘यूनियन कार्बाइड प्लांट में करीब 390 मीट्रिक टन विषैला कचरा था। उसमें से 40 मीट्रिक टन लाइम स्लज को वर्ष 2008 जून के अंत में पीथमपुर ट्रीटमेंट स्टोरेज एंड डिस्पोजल फैसिलिटी में खत्म कर दिया गया था। प्लांट में अभी भी करीब 350 मीट्रिक टन विषैला कचरा पड़ा हुआ है।’ इस कचरे को गुजरात के अंकलेश्वर में खत्म करने की गुजरात सरकार ने जनवरी 2007 में अनुमति दे दी थी। लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध से गुजरात सरकार अक्टूबर 2007 में अपनी रजामंदी से मुकर गई। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने नौ सदस्यीय मंत्री-समूह का गठन भोपाल की निचली अदालत द्वारा त्रासदी के दोषियों को मात्र दो साल की सजा सुनाए जाने के बाद मचे बवाल को देखते हुए किया। प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने 14 जून को समूह को रिपोर्ट 10 दिन में सौंपने को कहा था। 

(जारी….)
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(नोट : विजय मनोहर तिवारी जी, मध्य प्रदेश के सूचना आयुक्त, वरिष्ठ लेखक और पत्रकार हैं। उन्हें हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार ने 2020 का शरद जोशी सम्मान भी दिया है। उनकी पूर्व-अनुमति और पुस्तक के प्रकाशक ‘बेंतेन बुक्स’ के सान्निध्य अग्रवाल की सहमति से #अपनीडिजिटलडायरी पर यह विशेष श्रृंखला चलाई जा रही है। इसके पीछे डायरी की अभिरुचि सिर्फ अपने सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक सरोकार तक सीमित है। इस श्रृंखला में पुस्तक की सामग्री अक्षरश: नहीं, बल्कि संपादित अंश के रूप में प्रकाशित की जा रही है। इसका कॉपीराइट पूरी तरह लेखक विजय मनोहर जी और बेंतेन बुक्स के पास सुरक्षित है। उनकी पूर्व अनुमति के बिना सामग्री का किसी भी रूप में इस्तेमाल कानूनी कार्यवाही का कारण बन सकता है।)
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श्रृंखला की पिछली कड़ियाँ  
27. केंद्र ने सीबीआई को अपने अधिकारी अमेरिका या हांगकांग भेजने की अनुमति नहीं दी
26.एंडरसन सात दिसंबर को क्या भोपाल के लोगों की मदद के लिए आया था?
25.भोपाल गैस त्रासदी के समय बड़े पदों पर रहे कुछ अफसरों के साक्षात्कार… 
24. वह तरबूज चबाते हुए कह रहे थे- सात दिसंबर और भोपाल को भूल जाइए
23. गैस हादसा भोपाल के इतिहास में अकेली त्रासदी नहीं है
22. ये जनता के धन पर पलने वाले घृणित परजीवी..
21. कुंवर साहब उस रोज बंगले से निकले, 10 जनपथ गए और फिर चुप हो रहे!
20. आप क्या सोचते हैं? क्या नाइंसाफियां सिर्फ हादसे के वक्त ही हुई?
19. सिफारिशें मानने में क्या है, मान लेते हैं…
18. उन्होंने सीबीआई के साथ गैस पीड़तों को भी बकरा बनाया
17. इन्हें ज़िन्दा रहने की ज़रूरत क्या है?
16. पहले हम जैसे थे, आज भी वैसे ही हैं… गुलाम, ढुलमुल और लापरवाह! 
15. किसी को उम्मीद नहीं थी कि अदालत का फैसला पुराना रायता ऐसा फैला देगा
14. अर्जुन सिंह ने कहा था- उनकी मंशा एंडरसन को तंग करने की नहीं थी
13. एंडरसन की रिहाई ही नहीं, गिरफ्तारी भी ‘बड़ा घोटाला’ थी
12. जो शक्तिशाली हैं, संभवतः उनका यही चरित्र है…दोहरा!
11. भोपाल गैस त्रासदी घृणित विश्वासघात की कहानी है
10. वे निशाने पर आने लगे, वे दामन बचाने लगे!
9. एंडरसन को सरकारी विमान से दिल्ली ले जाने का आदेश अर्जुन सिंह के निवास से मिला था
8.प्लांट की सुरक्षा के लिए सब लापरवाह, बस, एंडरसन के लिए दिखाई परवाह
7.केंद्र के साफ निर्देश थे कि वॉरेन एंडरसन को भारत लाने की कोशिश न की जाए!
6. कानून मंत्री भूल गए…इंसाफ दफन करने के इंतजाम उन्हीं की पार्टी ने किए थे!
5. एंडरसन को जब फैसले की जानकारी मिली होगी तो उसकी प्रतिक्रिया कैसी रही होगी?
4. हादसे के जिम्मेदारों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए थी, जो मिसाल बनती, लेकिन…
3. फैसला आते ही आरोपियों को जमानत और पिछले दरवाज़े से रिहाई
2. फैसला, जिसमें देर भी गजब की और अंधेर भी जबर्दस्त!
1. गैस त्रासदी…जिसने लोकतंत्र के तीनों स्तंभों को सरे बाजार नंगा किया!

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