टीम डायरी
दिल्ली के अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पिछले तीन-चार दिनों से जीपीएस (ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम) स्पूफिंग की घटनाएँ सामने आ रही हैं। यह एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमें विमान के पायलट को उसकी दिशा, स्थिति (लोकेशन), आदि के बारे गलत संकेत भेजे जाते हैं। इससे विमान दिशा भटक जाता है। जानकारों के मुताबिक यह साइबर हमले का एक रूप है। कई बार तकनीकी खामी के कारण भी ऐसी स्थिति बनती है।
सामने आई सूचनाओं के मुताबिक, दिल्ली अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के हवाई यातायात नियंत्रक (एटीसी) की ओर से नागरिक विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) को जानकारी दी गई है। इसमें बताया गया है कि हवाई अड्डे के करीब 100 किलोमीटर के दायरे में जीपीएस स्पूफिंग की घटनाएँ सामने आई हैं। इसके कारण कई उड़ानों को दिल्ली में नहीं उतारा जा सका। उन्हें जयपुर हवाई अड्डे के लिए रवाना करना पड़ा। यही नहीं, विमानों की आवाजाही के समय और उससे जुड़ी सूचनाओं के प्रसार में भी कई तरह की गफलतें सामने आ रही है।
इस सूचना के बाद डीजीसीए ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। इसमें यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि जीपीएस स्पूफिंग से विमानों के भटकने की ये घटनाएँ तकनीकी खामी की वजह से हो रही हैं या फिर किसी मानवीय दखलंदाजी से जानबूझकर ऐसा किया जा रहा है? सम्भावनाएँ दोनों हो सकती हैं।
यहाँ बताते चलें कि दिल्ली अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमानों के उतरने और उड़ान भरने से जुड़ी तकनीकी व्यवस्था के उन्नयन (अपग्रेडेशन) का काम चल रहा है। इससे भी जीपीएस स्पूफिंग की स्थिति बन सकती है। दूसरा- मानवीय दखलंदाजी से भी इंकार नहीं किया जा सकता क्योंकि जैसा कि पहले बताया गया जीपीएस स्पूफिंग अमूमन एक तरह का साइबर हमला होता है। इसके माध्यम से किसी सामरिक या राहत-बचाव अभियान, आदि को विफल करने या अन्य देश, खासकर दुश्मन के विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश की जाती है।
