टीम डायरी
इसी साल के जून महीने की बात है यह। पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ के जरिए निर्णायक कार्रवाई के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दुनिया और खुद को ‘विश्व का शक्तिमान’ समझने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को बता दिया था कि बस, “अब बहुत हुआ। भविष्य में पाकिस्तान की ओर से की गई कोई भी आतंकी हरकत को ‘युद्ध की कार्रवाई’ माना जाएगा। उसी के अनुरूप भारत प्रतिक्रिया देगा।” साथ में यह भी बताया था, “ऑपरेशन सिन्दूर सिर्फ रुका है, खत्म नहीं हुआ है।”
इसके बाद इसी तरह के और भी बयान आते रहे। कभी रक्षा मंत्री का, कभी तीनों सेनाओं के प्रमुख का, तो कभी सेना अध्यक्षों में से किसी न किसी का। बीच में इतने महीनों तक कोई आतंकी हरकत नहीं हुई, इसलिए इन बयानों पर किसी ने गौर नहीं किया। लेकिन तभी दिल्ली में 10 नवम्बर को बम धमाका हो गया। उसमें अब तक 15 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है। यह आत्मघाती विस्फोट था। इसे राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने ‘आतंकी हमला’ माना है। यानि पाकिस्तान की ओर से ‘युद्ध की कार्रवाई’ हो चुकी है और सात दिन बीत चुके हैं।
इसके बावजूद अब तक पाकिस्तान के खिलाफ किसी कार्रवाई की सुगबुगाहट सुनाई नहीं देती। हाँ, बयान जरूर जारी हैं। अभी 17 नवम्बर, सोमवार को ही सेना प्रमुख उपेन्द्र द्विवेदी ने एक कार्यक्रम में कहा है, “पाकिस्तान के खिलाफ 88 घण्टे चला ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ तो महज ट्रेलर था। अगर पाकिस्तान हमें फिर ऐसा कोई मौका देता है, तो इस बार हम उसे सिखा देंगे कि पड़ोसियों के साथ कायदे से कैसे रहा जाता है।” तो भाई सवाल यह है कि पाकिस्तान मौका दे चुका है। उसने ‘युद्ध की कार्रवाई’ कर दी है। उसे सबक कब सिखाया जाएगा?
अलबत्ता इसका जवाब भी सेना प्रमुख के बयान के अगले हिस्से में मिलता नजर आता है। उनके मुताबिक, “आज की तारीख में कोई नहीं कह सकता कि अगर युद्ध शुरू हुआ तो कितने दिन में खत्म होगा। पिछला अभियान हमने 88 घण्टों में खत्म किया। अगला चार दिन, चार सप्ताह, चार महीने या चार साल भी चल सकता है। क्या हम उतने समय तक युद्ध के लिए तैयार हैं? क्या हमारे पास उतनी रसद, साज-ओ-सामान, आदि की पर्याप्तता है कि लड़ाई खत्म होने तक निर्बाध आपूर्ति होती रहे? यदि नहीं है, तो पहले इंतजाम करना होगा।”
इस पूरे बयान का मतलब क्या निकाला जाए? क्या भारत अभी अपनी तैयारी परख रहा है? या तैयारी कर रहा है? या फिर युद्ध में जाने अथवा न जाने को लेकर असमंजस में है? तीनों में से कोई भी स्थिति हो, भारत के पक्ष में तो कतई नहीं कही जा सकती। हाँ, पाकिस्तान की जिहादी फौज का हौसला बढ़ाने वाली स्थिति जरूर कहला सकती है। वही जिहादी फौज, जो भारत के लिए ही नहीं, खुद पाकिस्तान के लिए नासूर बन चुकी है। वही जिहादी फौज, जिसको अगर पूरी तरह ठिकाने लगाकर ठण्डा नहीं किया गया, तो न पाकिस्तान का भला होगा, न ही हिन्दुस्तान का। आज नहीं तो कल, किसी न किसी को यह काम करना ही होगा। याद रखिएगा।
