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मोबाइल ‘हमें हर पल देख-सुन रहा’ है, अब सरकारें और उसके मुखिया भी मानने लगे हैं!

टीम डायरी

मोबाइल फोन हर पल हमें देख-सुन रहा है। अब यह बात सरकारें और मुखिया तक मानने लगे हैं। प्रमाण के तौर पर अभी हाल ही सामने आई एक तस्वीर को लिया जा सकता है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू की यह तस्वीर दुनियाभर में चर्चित हुई है। इसमें वह अपने मोबाइल के कैमरे पर लाल टेप चिपकाए हुए किसी से बात करते नजर आ रहे हैं। इसके बाद खबरनवीसों ने मामले को समझने की कोशिश की तो मालूम चला कि इजराइल में सरकार ने सभी स्तरों पर, संवेदनशील प्रशासनिक और सामरिक स्थलों में विशेषरूप से इसी तरह मोबाइल के इस्तेमाल की व्यवस्था कर रखी है। ताकि मोबाइल के कैमरे से किसी तरह की जासूसी ‘सम्भव’ न हो सके! है न अचरज की बात? 

अलबत्ता यह कहानी कोई अभी की नहीं है। अब से करीब 10 साल पहले सितम्बर 2016 में अमेरिकी आंतरिक जासूसी संस्था- संघीय जाँच ब्यूरो (एफबीआई) के तत्कालीन प्रमुख जेम्स कॉमी ने सार्वजनिक रूप से माना था कि वह कई बार अहम मौकों पर अपने लैपटॉप, आदि के कैमरे पर टेप चिपका लेते हैं, सुरक्षा के लिहाज से। यही नहीं, इससे करीब एक साल बाद 2017 में इसमें एक अमेरिकी विशेषज्ञ ने बताया था कि फेसबुक, व्हाट्स एप, स्नैपचैट, इंस्टाग्राम, ट्विटर (अब एक्स), आदि एप आपके मोबाइल फोन के कैमरे और माइक से आपकी जासूसी करते हैं। यहाँ तक कि अगर आप गुसलखाने में मोबाइल फोन ले जाते हैं, तो वहाँ की तस्वीरें भी आपकी जानकारी के बिना ली जा सकती हैं। क्योंकि आपने खुद इन एप्लीकेशन को कैमरे और माइक के इस्तेमाल की अनुमति दी होती है। 

इतने पर भी यकीन न हो, तो थोड़ा इन्टरनेट पर जाकर खोज-बीन कीजिए। लोकलसर्किल्स नामक संस्था की सर्वेक्षण रपट मिलेगी। वह भी अभी-अभी की। इसके मुताबिक, भारत के लगभग 66 प्रतिशत लोगों ने माना है कि उनकी निजी बातचीत से सुराग लेकर कुछ ही देर में उनके मोबाइल पर उसी तरह के विज्ञापन आने लगते हैं। मतलब? स्पष्ट है कि हमारे मोबाइल फोन के माइक से हमारी हर तरह की बातें कहीं न कहीं सुनी जा रही हैं। रिकॉर्ड हो रही हैं। मिनटों में उनका विश्लेषण हो रहा है और उसके आधार पर हमें विज्ञापनों में लुभाने-फँसाने की कोशिश की जा रही है। और गौर कीजिए, यह सर्वेक्षण भी कोई ऐसा-वैसा नहीं है। देशभर के 346 जिलों के लोगों से इस बारे में बातचीत की गई है। 

इतना ही नहीं, मोबाइल, सस्ते इन्टरनेट और सोशल मीडिया की खतरनाक त्रिमूर्ति युवाओं में डिजिटल लती बना रही है, यह एक अलग तरह की समस्या है। अभी 29 जनवरी , 2026 को आए आर्थिक सर्वेक्षण में केन्द्र सरकार ने खुद इस बात को माना है। इस समस्या के बारे में आर्थिक सर्वेक्षण में बात की है। केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश करते हुए कहा है, “डिजिटल लत के कारण बच्चों की नींद कम हो रही है। ध्यान भटक रहा है। वे काम और पढ़ाई पर एकाग्र नहीं हो पाते। इससे सामाजिक पूँजी का नुकसान हो रहा है।” सर्वेक्षण में यह भी माना गया है कि 15 से 24 साल के बच्चों में खास तौर पर डिजिटल लत की वजह से तनाव, अवसाद, खुद पर भरोसे की कमी, साइबर असुरक्षा की भावना, जैसी समस्याएँ लगातार सामने आ रही हैं, बढ़ रही हैं। इसे रोकने की जरूरत है। 

मतलब हमारे हाथ में नजर आने वाला मोबाइल नाम का छोटा सा खिलौना हर तरह से खतरनाक है। इसे हम जितनी जल्दी समझ लें, उतना बेहतर। नहीं तो फिर इतनी देर हो जाएगी कि हम समस्या का समाधान ढूँढ नहीं पाएँगे।

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