अमन ने ओलिम्पिक में कुश्ती का कांस्य पदक जीता, जबकि विनेश फाइनल में पहुँचने के बाद भी खाली हाथ रहीं।
टीम डायरी
पेरिस ओलिम्पिक खेलों का 11 अगस्त को समापन हो गया। इन खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन को देखा जाए, तो उन्होंने 2020 के टोक्यो ओलिम्पिक की तुलना में एक पदक कम जीता है। पिछली बार उन्होंने एक स्वर्ण, दो रजत और चार काँस्य पदक जीते थे। कुल सात। लेकिन इस बार एक रजत और पाँच काँस्य पदक जीते। कुल छह। अलबत्ता, इस बार भी भारत के पदकों का आँकड़ा सात हो सकता था। बशर्ते, पहलवान विनेश फोगाट महज 100 ग्राम से अपने वज़न से न हारतीं। वे कुश्ती के 50 किलोग्राम भारवर्ग में प्रतिस्पर्धा के फाइनल तक पहुँच गईं थीं। उन्हें स्वर्ण या रजत पदक मिलना तय हो गया था। मगर फाइनल मुक़ाबले में वे प्रतिद्वंद्वी से जीततीं-हारतीं, उससे पहले ही निर्धारित से 100 ग्राम वज़न अधिक होने के कारण उन्हें अयोग्य ठहरा दिया गया।
विनेश अपने वज़न से क्यों हारीं, इस मामले में गड़बड़ कहाँ हुई, इस बारे में #अपनीडिजिटलडायरी पर ही सात अगस्त को बिक्रम प्रताप के लेख में बताया गया था। फाइनल मुक़ाबले से पहले विनेश का वज़न निर्धारित 50 से 2.7 किलोग्राम अधिक हो गया था। उन्होंने अपने दल के सहयोगी विशेषज्ञ सदस्यों ने इसे घटाने की भरसक कोशिश भी की। लेकिन उनके वज़न ने उन्हें 100 ग्राम से मात दे दी। उन्हें बाहर होना पड़ा।
हालाँकि इसी तरह की स्थिति जब भारत के एक अन्य पहलवान अमन सहरावत के साथ भी बनीं, तो उन्होंने अपने वज़न को ठीक 100 ग्राम से ही पहले धूल चटाई। फिर काँस्य पदक के लिए हुए मुक़ाबले में उतरे और प्रतिद्वंद्वी पहलवान को चित कर के तमगा अपने नाम कर लिया। जबकि ग़ौर करने लायक बात ये कि इस अहम मुक़ाबले से ठीक पहले अमन पर उनका वज़न 4.6 किलोग्राम की अधिकता से हावी हो गया था।
लेकिन जैसा ख़बरें बताती हैं, अमन और उनके सहयोगियों ने तय किया कि चाहे कुछ भी हो जाए, वज़न से नहीं हारना है। अलबत्ता, उनके पास वज़न को पटखनी देने के लिए 10 घंटे ही थे। मगर उन्होंने न हार मानी और न वज़न का वज़न दिमाग़ पर चढ़ने दिया। एक बार बहुत थोड़े विश्राम के साथ अमन क़रीब घंटेभर लगातार ट्रेडमिल पर दौड़े। पाँच किस्तों में पाँच बार सॉना बाथ (भाप स्नान) लिया। एक घंटे तक गर्म पानी में रहे। उनकी मालिश की गई। पहले हल्की, फिर 15 मिनट तेज दौड़ लगाई। इस पूरी प्रक्रिया दौरान वे न सोए और न उन्होंने कुछ खाया-पिया। सिर्फ़ गुनगुने पानी में शहद-नींबू मिलाकर पीते रहे। और इस तरह उन्होंने वज़न को हरा दिया।
अमन 57 किलोग्राम भारवर्ग में खेलते हैं और काँस्य पदक के लिए हुए मुक़ाबले से ठीक पहले उनका वज़न 56.9 किलोग्राम पर आ चुका था। लेकिन विनेश के मामले में ऐसा नहीं हो पाया। वज़न घटाने की तमाम प्रक्रियाओं से पूरी शिद्दत के साथ गुज़रने के बावज़ूद वे 12 घंटे में भी 2.7 किलोग्राम वज़न कम नहीं कर पाईं। क्यों? शायद इसलिए कि उन्होंने वज़न का वज़न अपने दिमाग़ पर ले लिया, जो अमन ने नहीं किया।
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