नीलेश द्विवेदी, भोपाल मध्य प्रदेश
भारत के पौराणिक साहित्य को मिथक या कपोल कल्पना बताकर खारिज करने वाले पश्चिम जगत और पश्चिमी दुनिया के जैसी सोच रखने वालों के लिए यह सूचना खास तौर पर काम की हो सकती है। क्योंकि इस सूचना से रामायण काल में हुए श्रीलंका के राजा रावण के 10 सिरों का रहस्य पुख्ता प्रमाण के साथ उजागर होता है। दरअसल, अमेरिका में एक विश्वविद्यालय है, नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी। वहाँ के शोधकर्तााओं ने नींद में आने वाले सपनों की गुत्थी सुलझाने की कोशिश की। उसी अध्ययन के दौरान उन्हें मालूम चला कि मानव मस्तिष्क के जिस बड़े हिस्से को हम सुप्त यानि सोया हुआ सा मान लेते हैं, वास्तव में वह वैसा है नहीं।
हमारा अवचेतन मस्तिष्क उस समय खास तौर पर सक्रिय होता है, जब हम सो रहे होते हैं। उस दौरान वह दिनभर में हमारे सामने आई समस्याओं का समाधान ढूँढ रहा होता है। वह भी किसी एक सुनिश्चित तरीके से नहीं, बल्कि 10 भिन्न-भिन्न तरीकों से। इतना ही नहीं, सपनों की सूरत में हमें हमारा अवचेतन समाधान बता ओर दिखा भी रहा होता है। यद्यपि हम चूँकि अपने अवचेतन मस्तिष्क के संकेतों को समझ नहीं पाते, उस पर ध्यान नहीं देते, इसलिए उसके द्वारा बताए गए समाधान भी हमारे हाथ से फिसल जाते हैं। और हम अगली सुबह फिर वैसी ही या नई तरह की समस्याओं में उलझ जाते हैं। ऐसे ही क्रम चलता रहता है।
इस अध्ययन के निष्कर्ष ‘न्यूरोसाइंस ऑफ कॉन्शसनेस’ नामक पत्रिका में हाल ही में प्रकाशित हुए हैं। जो कोई विस्तार से उन्हें पढ़ना-समझना चाहे, इन्टरनेट की मदद लेकर आसानी से पढ़-समझ सकता है। और आजकल को मशीनी बुद्धि (एआई) का दौर है। मशीनी बुद्धि वाले कई मंच हैं, उन पर बस एक सवाल पूछने की देर है कि वे तमाम विस्तृत जवाब लेकर सामने हाजिर हो जाएँगे। लिहाजा, इस शोध के विषय में यहाँ और ज्यादा लिखने की जरूरत नहीं। यद्यपि, पश्चिम से ही प्रेरित मशीनी बुद्धि वाले तमाम मंच भारतीय सन्दर्भ में जो नहीं बता सकते, उस पर जरूर यहाँ बात हो सकती है। सो, इस अध्ययन को उसी सन्दर्भ में देखते हैं।
भारत के पौराणिक साहित्य का जिसने भी अध्ययन किया होगा, उसने रामायण काल में हुए लंका के राजा रावण का नाम जरूर सुना होगा। वही रावण, जिसने अयोध्या के राजकुमार (तब युवराज या राजा के तौर पर राज्याभिषेक नहीं हुआ था) श्री राम की पत्नी सीता का अपहरण किया था। फिर उनके साथ हुए युद्ध में मारा गया। वही रावण जिसके बल और प्रताप का वर्णन करने के लिए रामायण के विभिन्न संस्करणों में उसे 10 सिर व 20 भुजाओं वाला बताया गया। वही रावण जिसकी नाभिकुण्ड में अमृत था, ऐसा भी बताया जाता है। इसीलिए उसके सिर और भुजाओं को बार-बार काटे जाने पर भी वे हर बार फिर उग आते थे। लिहाजा श्री राम ने अंत में 31 बाण एक साथ चलाकर पहले उसकी नाभि में रखा अमृत सोखा और फिर सिर-भुजाएँ काटे।
तो यह हुई कहानी। अलबत्ता, इसे तार्किकता की कसौटी पर रखें तो यह समझना मुश्किल लगता है कि किसी व्यक्ति के 10 सिर या 20 भुजाएँ हो सकती हैं! तो फिर सच आखिर क्या हो सकता है? इसके जवाब के लिए कुछ बातें समझना व मानना बेहद जरूरी है। इनमें पहली- भारत का पूरा पौराणिक साहित्य ज्ञान-विज्ञान, इतिहास-पुरातत्त्व, आदि की कसौटी पर प्रामाणिक होने के बावजूद आज की तरह सहज-सामान्य भाषा में नहीं लिखा गया है, बल्कि कूट-भाषा में वर्णित है। ठीक वैसे ही जिस तरह आज की तारीख में कंप्यूटर एप्लीकेशंस आदि की कोडिंग की जाती है। क्यों? ताकि कोई उसे खराब न कर सके, उसका दुरुपयोग कर सके।
दूसरी बात- पौराणिक साहित्य में बिम्बों, प्रतीकों, अलंकारों, कल्पनाशीलता, आदि का भी खूब इस्तेमाल हुआ है। ठीक उसी तरह जैसे मौजूदा दौर के शायर अपनी माशूका को सामने से आते हुए देखकर उसकी तारीफ में कह दिया करते हैं कि ‘मानो चांद जमीं पर उतर आया हो’। पर इसका मतलब यह तो नहीं होता कि चांद वाकई जमीन पर उतरा है। ऐसे ही पौराणिक साहित्य में दिए गए विवरणों की कूट-भाषा को समझने के संदर्भ में मानना चाहिए। और, यूँ मानते हुए जब हम रावण के 10 सिरों वाला विवरण समझने की कोशिश करते हैं, तो दो स्थितियों की मिली-जुली तस्वीर बनती है। पहली- रावण की साधना (तप), दूसरी- उसका ज्ञान।
पौराणिक साहित्य के विवरणों से यह तथ्य सर्वमान्य है कि रावण प्रकाण्ड पण्डित था। विभिन्न कलाओं, शास्त्रों आदि का ज्ञाता था वह। उनका उसने अभ्यास भी किया और उन्हें साध भी रखा था। ऐसे में बहुत संभव है कि रावण ने अपने शरीर के सातों चक्रों को अपनी योग-साधना के बल पर जागृत कर रखा हो। और उसी के बलबूते अपने अवचेतन मस्तिष्क पर भी नियंत्रण स्थापित कर लिया हो। वह भी इतना कि उसका अवचेतन मस्तिष्क सिर्फ सोते समय ही नहीं, जागते वक्त भी नियमित रूप से उसे 10 भिन्न-भिन्न तरीकों से सोचकर विभिन्न समस्याओं का समाधान सुझाने लगा हो। और उसकी यह क्षमता सबके सामने प्रत्यक्ष प्रमाणित हो चुकी हो, जिस कारण उसे ‘दस-आनन’ का विशेषण मिल गया हो। यानि 10 सिरों वाला, या 10 सिर से सोचने वाला।
ऐसे ही, रावण की कुण्डलिनियों (सातों चक्रों) के जागृत होने की स्थिति को उसकी नाभि में रखे ‘अमृत’ का दर्जा दिया गया हो, यह भी संभव है। क्योंकि अमृत होता, तो वह मरता नहीं। और फिर चूँकि वह राक्षस था, इस नाते माया यानि राक्षसी जादुई विद्या में भी पारंगत था ही। सो, युद्ध के दौरान इसी विद्या माध्यम से 10 सिरों और 20 भुजाओं का भ्रम पैदा कर के शत्रु को डराना भी उसके लिए कोई बड़ी बात नहीं हो सकती थी। मुमकिन है, यही स्थितियाँ मिलकर रावण को 10 सिर और 20 भुजाओं वाले बलशाली के रूप में सबके सामने लाती रही होंगी। बाकी सच्चाई तो बड़े विद्वान ही जानें, पर लगता क्या है, यह आकलन कितना सही है?
