Narendra Modi

प्रधानमंत्री ने लक्ष्य तय कर दिए हैं, अब यह हम पर है कि उन्हें कैसे और कब हासिल करते हैं!

निकेश जैन, इन्दौर मध्य प्रदेश

उन्होंने अपना दृष्टि स्पष्ट तौर पर सामने रख दी है। देश के लिए लक्ष्य तय कर दिए हैं। इसके बाद अब यह हम पर है कि इन लक्ष्यों को कब तक और कैसे हासिल करते हैं। 

स्वतंत्रता दिवस पर इस बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भाषण पहले से एकदम अलग था। एक नहीं, कई मायनों में अलग। अब तक वह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की बात करते रहे हैं। लेकिन इस बार उन्होंने उन क्षेत्राें का भी खास जिक्र किया, जिनमें भारत का आत्मनिर्भर होना समय की पहली माँग है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत के पास अपने लड़ाकू विमानों के लिए खुद के जेट इंजन होने चाहिए। यही नहीं, ऑपरेटिंग सिस्टम से लेकर साइबर सिक्योरिटी और डीप टेक से आर्टिफिशियल इन्टेलिजेंस तक, सब भारत का अपना होना चाहिए। आज के समय की यह पहली जरूरत है।” 

मतलब, उन्होंने साफ बता दिया है कि देश  को 1- जेट इंजन तकनीक, 2- ऊर्जा, 3- फार्मा, 4- सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी, तथा 5- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता चाहिए। सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी के मामले में ऑपरेटिंग सिस्टम (ओएस) की उन्होंने बात की। मुझे यह बात बहुत पसन्द आई। इसलिए कि हमने भविष्य के खतरों को अभी से सूँघ लिया है। हमें पता होना चाहिए कि अब तक सभी तरीके के ओएस विदेश में बनते हैं। दूसरे देशों की कम्पनियाँ ही उनकी मालिक हैं और वह दिन दूर नहीं जब ये कम्पनियाँ कभी भी, किसी भी मौके पर हमें गच्चा दे देंगी। अभी-अभी नायरा एनर्जी कम्पनी से जुड़ा मामला इस आशंका का ताजा प्रमाण है।

गुजरात की ‘नायरा एनर्जी’ पर पश्चिमी देशों ने इस कारण प्रतिबन्ध लगाया कि वह रूस से कच्चा तेल आयात कर रही है। इस फैसले में पश्चिमी देशों का साथ देते हुए अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कम्पनी माइक्रोसॉफ्ट ने नायरा एनर्जी में संचालित अपने ऑपरेटिंग सिस्टम बन्द कर दिए। यह इसी चार अगस्त की बात है। पूरे दो दिन तक माइक्रोसॉफ्ट ने नायरा के ओएस बहाल नहीं किए। बुधवार, छह अगस्त को ओएस बहाल किए गए। इन दो दिनों में कम्पनी को अपने काम के सिलसिले में भारी परेशानी के साथ नुकसान भी उठाना पड़ा, क्योंकि माइक्रोसॉफ्ट के ओएस पर चल रहे उसके सब कंप्यूटर, आदि ठप पड़ गए। इस घटना ने भारतीय तकनीक जगत की आँखें खोल दीं। 

मतलब, हमारी जरूरत तो सामने है ही, खतरा और चुनौती भी हमारे दरवाजे पर दस्तक दे चुकी है। ऐसे में अब देखने की बात होगी कि भारत के प्रौद्योगिकी क्षेत्र के पेशेवर और उद्यमी इस जरूरत को पूरा करने और खतरे से निपटने के लिए कदम कब उठाते हैं? चुनौती का सामना कब, कैसे करते हैं। वे प्रधानमंत्री की दिखाई दिशा की ओर किस तरह आगे बढ़ते हैं? उम्मीद करनी चाहिए कि सूचना-प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कुछ सक्षम और भरी हुई जेबों वाली बड़ी कम्पनियाँ अपने मुनाफे का कुछ हिस्सा इन कामों में लगाएँगीं, लक्ष्यों को हासिल करेंगी! 

क्या ख्याल है?

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निकेश का मूल लेख 

𝗛𝗲 𝘀𝗮𝗶𝗱 𝗶𝘁 𝗮𝗻𝗱 𝘀𝗲𝘁 𝘁𝗵𝗲 𝘃𝗶𝘀𝗶𝗼𝗻; 𝗡𝗼𝘄 𝗶𝘁’𝘀 𝘂𝗽 𝘁𝗼 𝘂𝘀 𝗵𝗼𝘄 𝘁𝗼 𝗲𝘅𝗲𝗰𝘂𝘁𝗲 𝗶𝘁!

“India should have its own 𝗝𝗲𝘁 𝗘𝗻𝗴𝗶𝗻𝗲 for its fighter jets! From 𝗢𝗽𝗲𝗿𝗮𝘁𝗶𝗻𝗴 𝗦𝘆𝘀𝘁𝗲𝗺 to 𝗖𝘆𝗯𝗲𝗿 𝗦𝗲𝗰𝘂𝗿𝗶𝘁𝘆; From 𝗗𝗲𝗲𝗽 𝗧𝗲𝗰𝗵 to 𝗔𝗿𝘁𝗶𝗳𝗶𝗰𝗶𝗮𝗹 𝗜𝗻𝘁𝗲𝗹𝗹𝗶𝗴𝗲𝗻𝗰𝗲 – everything should be 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮’𝘀 own! – that’s the need of the hour”

This independence day speech from PM Modi was very different. He always talked about a self reliant India but today he talked about specific domains which are hurting us badly like:

1. 𝗝𝗲𝘁 𝗘𝗻𝗴𝗶𝗻𝗲 𝗧𝗲𝗰𝗵𝗻𝗼𝗹𝗼𝗴𝘆 ✔️
2. 𝗘𝗻𝗲𝗿𝗴𝘆 ✔️
𝟯. 𝗣𝗵𝗮𝗿𝗺𝗮 ✔️
4. 𝗦𝗼𝗳𝘁𝘄𝗮𝗿𝗲 𝗧𝗲𝗰𝗵𝗻𝗼𝗹𝗼𝗴𝘆 ✔️
𝟱. 𝗦𝗼𝗰𝗶𝗮𝗹 𝗠𝗲𝗱𝗶𝗮 𝗣𝗹𝗮𝘁𝗳𝗼𝗿𝗺𝘀 ✔️

In software technology he talked about our own OS 🫡 – I loved it. Because we are able to smell future threats today. It won’t take long for a foreign player to pull the plug on their OS. (Nayara Energy case is an example)

The need is there, the threat is very much there but only time will tell whether the professional and entrepreneurs in India will follow his appeal and move in this direction or not.

Hope some capable and deep pocket IT companies will divert some of their profits for such new avenues.

Thoughts? 

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(निकेश जैन, कॉरपोरेट प्रशिक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी- एड्यूरिगो टेक्नोलॉजी के सह-संस्थापक हैं। उनकी अनुमति से उनका यह लेख अपेक्षित संशोधनों और भाषायी बदलावों के साथ #अपनीडिजिटलडायरी पर लिया गया है। मूल रूप से अंग्रेजी में उन्होंने इसे लिंक्डइन पर लिखा है।)

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65- अमेरिका 50% शुल्क से ज्यादा नुकसान तो हमारा पहले से कर रहा है, तो अब क्या फर्क? 
64- मैं खुश हूँ कि भारत ने बन्दूक की नोंक पर अमेरिका से व्यापार समझौता नहीं किया!
63- अतिथि देवो भव: – तो क्या उनके सामने हम ऐसे नाचने लगेंगे, वह भी दफ्तर में?
62- इसी गैरजिम्मेदार रवैये के कारण मैंने बोइंग के विमानों से यात्रा पूरी तरह ही बन्द कर दी है!
61- आपकी सेहत आपकी नौकरी से ज्यादा जरूरी है, ध्यान रखिए!
60- आरसीबी हादसा : उनकी नज़र में हम सिर्फ़ ‘कीड़े-मकोड़े’, तो हमारे लिए वे ‘भगवान’ क्यों?
59 – कभी-कभी व्यक्ति का सिर्फ़ नज़रिया देखकर भी उससे काम ले लेना चाहिए!
58- क्यों भारत को अब अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लाना ही होगा?
57- ईमानदारी से व्यापार नहीं किया जा सकता, इस बात में कितनी सच्चाई है?
56- प्रशिक्षित लोग नहीं मिल रहे, इसलिए व्यापार बन्द करने की सोचना कहाँ की अक्लमन्दी है?

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