White color terror

दिल्ली में धमाका, सफेदपोश आतंकियों की धरपकड़, जीपीएस स्पूफिंग…क्या ये सब जुड़े हैं?

टीम डायरी

दिल्ली में सोमवार, 10 नवम्बर की शाम लाल किले के पास ट्रैफिक सिग्नल पर धमाका हो गया। सूचनाओं के अनुसार धीरे-धीरे सिग्नल के पास आती एक कार में धमाका हुआ है। इसमें आठ लोगों की मौत हुई है। जबकि लगभग 24 लोगों के घायल होने की सूचना है। कई लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। मरने वालों की संख्या बढ़ भी सकती है। इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) तथा राष्ट्रीय सुरक्षा गारद (एनएसजी) जैसी एजेंसियों ने जाँच शुरू कर दिया है। पता लगाया जा रहा है कि घटना आतंकी साजिश का हिस्सा है या फिर महज कोई हादसा। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं। 

इससे कुछ घण्टों पहले सोमवार को ही जम्मू-कश्मीर पुलिस ने ‘सफेदपोश आतंकियों’ के तंत्र का भण्डाफोड़ किया। अब तक जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और गुजरात से आठ आतंकी पकड़े जा चुके हैं। ये सभी जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवात-उल-हिन्द नामक आतंकी संगठनों से जुड़े बताए गए हैं। आतंकियों में तीन पेशेवर डॉक्टर हैं। अन्य भी उच्च शिक्षित और सम्मानित पेशों में हैं। इसी कारण इन्हें ‘सफेदपोश आतंकी’ कहा गया है। इनसे 360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट बरामद किया गया है। भारी मात्रा में हथियार, कारतूस भी मिले हैं। साथ ही ऐसे रासायनिक पदार्थ और सामग्री भी, जो बम धमाकों में इस्तेमाल होती है। 

इसमें सबसे अधिक चिन्ताजनक बात गुजरात से पकड़े गए आतंकियों से सामने आई है। वहाँ अहमद मोहियुद्दीन सैयद नाम का आतंकी पुलिस के हत्थे चढ़ा है। उसने चीन से डॉक्टरी (एमबीबीएस) की पढ़ाई की है। इसके बाद वह वैश्विक आतंकी संगठन ‘इस्लामिक स्टेट’ और पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से जुड़ गया। उनके प्रभाव में वह रेसिन नामक प्रोटीन (अरण्डी के पौधे में होता है) से ऐसा जहर बनाने की तैयारी में था, जिसमें न गन्ध हो, न रंग, न स्वाद। एकदम पानी की तरह। इस जहर को वह जनसामान्य तक पहुँचने वाली खाने-पीने की चीजों में मिलाकर बड़ी तादाद में लोगों को मौत की नींद सुलाने की साजिश रच रहा था। 

हालाँकि सम्बन्धित राज्यों की पुलिस ने आपसी समन्वय से 15 दिन की मेहनत के बाद इस गिरोह और उसकी साजिश का भण्डाफोड़ कर दिया। अलबत्ता, इसी बीच दिल्ली में एक और घटना हो गई। ‘जीपीएस स्पूफिंग’ की घटना, जिसके बारे में #अपनीडिजिटलडायरी ने पहले ही आशंका जताई थी। डायरी पर छह नवम्बर को प्रकाशित लेख में सवाल उठाया गया था कि नई दिल्ली हवाई अड्‌डे पर ‘जीपीएस स्पूफिंग’ की घटनाएँ किसी साजिश का हिस्सा तो नहीं? क्या यात्री विमानों को उनकी दिशा, स्थान, और समय से जानबूझकर भटकाया जा रहा है या ऐसा किसी तकनीकी कारण से हाे रहा है? इसके अगले ही दिन, सात नवम्बर को नई दिल्ली हवाई अड्‌डे पर जीपीएस प्रणाली ठप पड़ गई और करीब 800 यात्री उड़ानों पर इसका विपरीत असर पड़ा। 

इस सिलसिले में सोमवार, 10 नवम्बर को ही एक हिन्दी अखबार ने खुलासा किया है कि प्रारम्भिक जाँच में जीपीएस स्पूफिंग की घटना किसी बड़ी साजिश का ही हिस्सा लगती है। इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ने खुद इस मामले की जाँच की निगरानी करने का फैसला किया है। लिहाजा, फिर एक सवाल उठता है कि ऊपर बताई गई ये तीनों घटनाएँ कहीं आपस में जुड़ी हुई तो नहीं हैं? अगर वास्तव ऐसा है तो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से यह समय बेहद चिन्ताजनक माना जा सकता है!    

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