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संसद परिसर में ‘सांसद ने भौं-भौं’ से बताया- पालतू कहाँ हैं, किसने पाले हुए हैं!

टीम डायरी

संसद में एक ‘नामी सांसद’ हैं, जिन्हें विधायी कामकाज से ज्यादा इस बात में दिलचस्पी रहती है कि वे कब किसी को धक्का मारकर गिरा दें। कब टीशर्ट पहनकर अपनी फड़कती हुई भुजाओं की माँसपेशियाँ दिखाकर बताएँ कि वे किसी से डरते नहीं हैं। गम्भीर मसलों की चर्चा के दौरान अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे ही कब किसी को आँख मार दें। अपनी सीट से उठकर कब किसी के गले लग जाएँ, यह दिखाने के लिए देखो- हमारे मन में किसी के लिए नफरत नहीं। कब अपने साथी सांसदों को उकसाएँ-भड़काएँ कि वे जरूरी-गैरजरूरी मसलों से संसद में हंगामा खड़ा करें। ताकि कार्रवाई बाधित हो और सरकार को विधायी काम करने में मुश्किल आए। 

तो इसी क्रम में संसद के जारी शीतकालीन सत्र के दौरान नया मामला सामने आया है। देश की सबसे पुरानी और ‘पहले बड़ी कही जाने वाली पार्टी’ की सांसद दो दिन पहले संसद परिसर के भीतर अपनी कार में कुत्ता लेकर पहुँच गईं। इस पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने आपत्ति की तो महिला सांसद ने उल्टा सवाल कर दिया कि ऐसा कौन सा कानून-नियम है जो संसद परिसर में कुत्ता लाने से रोकता हो? अलबत्ता वे चूँकि खुद सांसद हैं, इसलिए अपने सवाल का जवाब, औचित्य भी उन्हें पता ही होगा, ऐसी अपेक्षा है। आखिर नियम-कानून बनाने, बदलने, आदि का अधिकार को उनके जैसे लोगों को ही है। पर कुछ मर्यादाएँ, परम्पराएँ भी हैं, जो उन्हीं लोगों ने ही निर्धारित की हुई हैं। 

लिहाजा उन्हीं मर्यादाओं-परम्पराओं को आधार बनाकर माननीया सांसद के विरुद्ध विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने की तैयारी की जा रही है, ऐसी सूचना है। इस सूचना के बाद जब सम्बन्धित सांसद महोदया से मीडियावालों ने प्रतिक्रिया चाही तो जानते हैं उन्होंने क्या जवाब दिया? “भौं, भौं”!! जी हाँ, कुत्ते वाली भौं, भौं और फिर अपने रास्ते चली गईं। नीचे उनका वीडियो भी दिया गया है, देखा जा सकता है। हालाँकि कहानी यहाँ खत्म नहीं होती। बल्कि इससे आगे भी है, जो उन ‘नामी सांसद महोदय’ से जुड़ती है, जिनका सबसे पहले जिक्र किया।

दरअसल, संसद परिसर में कुत्ता लाने वाली सांसद की पार्टी का मालिकाना उन ‘नामी सांसद’ और उनके परिवार के पास है, ऐसी सोच उनके दल के नेताओं के दिमागों में ही नहीं, बाहर अन्य दलों में दृढ़ हो चुकी है। राजनीति से इतर क्षेत्र के लोग भी यह मान चुके हैं। लिहाजा, मीडियावालों ने स्वाभाविक रूप से उन ‘नामी नेता’ से भी संसद परिसर में कुत्ता लाए जाने वाली घटना पर प्रतिक्रिया लेनी चाही, तो उन्होंने अपनी हमेशा की आदत के मुताबिक टिप्पणी की और बोले, “संसद के भीतर पालतू को लाना मना हो सकता है, लेकिन भीतर नहीं।” स्वाभाविक रूप से उन्होंने टिप्पणी सत्ता पक्ष के सांसदों पर की थी, जिसके लिए वह जाने भी जाते हैं, क्योकि वह तो प्रधानमंत्री पद की मर्यादा तक नहीं देखते। मौजूदा प्रधानमंत्री को भी ‘चोर’, ‘डण्डे से मारेंगे’, आदि कहते रहते हैं। 

यद्यपि इस पूरे प्रसंग में ‘रोचक-सोचक’ बात रही ‘नामी सांसद’ की सहयोगी सांसद महोदया की ‘भौं भौं’ प्रतिक्रिया इस प्रतिक्रिया ने समझने वालों को यह बात आसानी से समझा दी कि वास्तव में ‘पालतू कहाँ हैं, किसने पाले हुए हैं’! वैसे यह ‘नामी सांसद’ महोदय सच में, कुत्ते पालने के शौकीन भी बताए जाते हैं। 

समझ गए न? समझ ही गए होंगे, समझदार को तो इशारा ही काफी होता है!! 

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