Ahmedabad-Plane-Crash

अहमदाबाद विमान हादसे का दोष ‘वे’ हमारे पायलटों पर मढ़ रहे हैं…,सरकार चुप क्याें है?

नीलेश द्विवेदी, भोपाल मध्य प्रदेश

अहमदाबाद से लन्दन जा रहे एयर इण्डिया के यात्री विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के पीछे तमाम तकनीकी कारण हो सकते हैं। इस बात के पुख्ता संकेत मिल रहे हैं। पूर्व में ऐसी तकनीकी खामियों के उदाहरण भी हैं। यही नहीं, जो विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ, वह हादसे कुछ देर पहले दिल्ली से अहदाबाद आया था। उस उड़ान के पायलट ने उसमें एक विशिष्ट तकनीकी खामी की बात रजिस्टर में दर्ज भी कराई थी। इसके बावजूद अमेरिकी मीडिया और उसका समर्थक भारतीय पक्ष अहमबाद विमान हादसे के लिए उस उड़ान के पायलट, खासकर मुख्य पायलट, को दोषी ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। ताकि कैसे भी विमान बनाने वाली कम्पनी बोइंग को बचाया जा सके। 

अमेरिका के प्रमुख अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जनरल’ में एक अमेरिकी अधिकारी के आकलन के आधार पर रिपोर्ट छापी गई है। इसमें हादसे से ठीक पहले अहमदाबाद-लन्दन उड़ान के पायलटों के बीच हुई बातचीत से अनुमान लगाया गया है कि सम्भवत: विमान के मुख्य पायलट सुमित सभरवाल ने विमान की ईंधन आपूर्ति को ‘रन’ से ‘कटऑफ’ की स्थिति में डाला। अखबार के मुताबिक, विमान के उड़ान भरते ही सह-पायलट क्लाइव कुन्दर ने मुख्य पायलट सभरवाल से पूछा था, “आपने दोनों इंजनों के फ्यूल स्विच ‘रन’ ने ‘कटऑफ’ स्थिति में क्यों डाले?” इस पर मुख्य पायलट ने कोई भी जवाब नहीं दिया, वह शान्त रहे। जबकि सह-पायलट बुरी तरह घबरा गए थे। 

‘वॉल स्ट्रीट जनरल’ के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी का यह अनुमान भारत के विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो (एएआईबी) की प्रारम्भिक रिपोर्ट पर आधारित है। हालाँकि, इस अखबार की रिपोर्ट पर भारत में सवाल उठ रहे हैं। फेडरेशन ऑफ इण्डियन पायलट्स (एफआईपी) की ओर से कहा गया है, “जाँच रिपोर्ट अधूरी है और अपरिपक्व भी। इसमें पायलटों (के संगठन) का पक्ष भी शामिल नहीं है। ऐसे में विमान हादसे के लिए उड़ान के पायलटों को दोष देना गैरजिम्मेदार रवैए का प्रमाण है। इससे भी बड़ी बात है कि प्राथमिक जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक कैसे हुई?” इसी तरह, एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन-इण्डिया (एएलपीए) की ओर से भी कहा गया, “अहदाबाद-लन्दन विमान के पायलटों ने तो मरते-मरते भी पुख्ता किया कि जमीन पर विमान गिरने से कम से कम नुकसान हो। उन्होंने आखिरी साँस तक विमान की ईंधन आपूर्ति भी दोबारा शुरू करने की कोशिश की। उन्हें दोषी कैसे माना जा सकता है?” 

इस मामले में ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ ने एएआईबी की रिपोर्ट के सेकेण्ड-दर-सेकेण्ड विवरण प्रकाशित किए हैं। इनसे पता चलता है कि 12 जून को विमान ने दिन में 1.38.39 बजे उड़ान भरी। जबकि 1.38.42 बजे जब विमान हवा में था तो महज एक सेकेण्ड के अन्तराल में बारी-बारी से दोनों इंजन के फ्यूल स्विच ‘रन’ से ‘कटऑफ’ स्थिति में चले गए। इसके बाद विमान के पायलटों ने 1.38.52 और 1.38.56 बजे दोनों इंजन के फ्यूल स्विच को ‘कटऑफ से ‘रन’ की स्थिति में डाल दिया था। इससे इंजनों में ईंधन की आपूर्ति फिर शुरू हो गई। पहले इंजन ने गति भी पकड़ ली। मगर दूसरा इंजन चालू होने के बावजूद गति नहीं पकड़ सका। इससे हवा में दोबारा से ऊपर उठने के लिए विमान को जितनी ताकत की जरूरत थी, वह नहीं मिल सकी और विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। 

जानकार इसी स्थिति के आधार पर पायलटों को दोषी मानने से इंकार करते हैं। उनके मुताबिक, एक सेकेण्ड में दोनों इंजनों के फ्यूल स्विच बन्द कर पाना किसी पायलट के वश की बात नहीं। कारण कि एक ही इंजन का फ्यूल स्विच बन्द करने में पाँच चरण की कार्रवाई करनी होती है। इस तरह दोनों इंजन के फ्यूल स्विच बन्द करने हों तो कुल 10 चरणों में काम होगा। यह एक सेकेण्ड में हो ही नहीं सकता। दूसरी बात- अगर मान भी लें कि किसी पायलट ने जानबूझकर दोनों इंजनों की ईंधन आपूर्ति बन्द की, तो फिर दुर्घटना से बचने के लिए वह उसे दोबारा चालू करने में क्यों ही लगता? जबकि जाँच रिपोर्ट कहती है कि पायलटों से ईंधन आपूर्ति फिर चालू कर दी थी? 

इसके अलावा, ‘इण्डियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट भी गौर करने लायक है। इसमें बताया गया है कि एयर इण्डिया का यह विमान जब दिल्ली से अहमदाबाद पहुँचा था तो उसके पायलट ने तकनीकी रजिस्टर में लिखा था, ‘स्टैबिलाइजर पॉजीशन ट्रांसड्यूसर डिफेक्ट’ यानि एक ऐसी तकनीकी खामी जो विमान के सेंसरों से सम्बन्धित है। विमान लन्दन के लिए रवाना हो, इससे ठीक पहले इस तकनीकी खामी को दुरुस्त किया गया था। जानकारों का मानना हैं, “इस तकनीकी खामी के कारण दुर्घटना हुई, ऐसा नहीं कहा जा सकता। लेकिन इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता कि इसकी वजह से विमान के अन्य सेंसरों ने अचानक काम करना बन्द कर दिया हो। सम्भवत: दोनों इंजनों के फ्यूल स्विच भी इसी कारण से अपने बन्द हो गए हों।” ऐसे में सवाल फिर बने रह जाते हैं। 

पहला सवाल- वही, जो पायलटों की संस्था ने पूछा है कि आधी-अधूरी प्रारम्भिक जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक कैसे हुई? छोटे से छोटे मामलों में मीडिया को साधने वाली केन्द्र सरकार ने इतने संवेदनशील मामले में अतिरिक्त सावधानी क्यों नहीं बरती? दूसरा सवाल यह भी है। और तीसरा- कि प्रारम्भिक जाँच रिपोर्ट के आधार पर अपने-अपने विश्लेषण के जरिए अमेरिकी मीडिया और उसके समर्थक हमारे पायलटों को दोषाी ठहरा रहे हैं। उन पायलटों को, जो खुद उस हादसे में अपनी जान गँवा चुके हैं। इसके बावजूद सरकार ने चुप्पी ओढ़ रखी है, भला क्यों? 

इन सवालों के जवाब मिलने चाहिए। केन्द्र सरकार को अगर वाकई आम जनता की फिक्र है, अगर उसे देशहित की चिन्ता है, अगर उस पर अमेरिका का दबाव नहीं है, तो उसे जवाब देना ही चाहिए।

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