टीम डायरी
देश के अब तक के इतिहास में सम्भवत: यह अपनी तरह का पहला आयोजन होने वाला है। ठीक वैसा ही, जैसा दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह का होता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भी अब तक के पूरे कार्यकाल का यह पहला ही मौका होगा, जब वह ‘भारत के राष्ट्रपति’ की तरह परेड की सलामी लेते हुए दिखाई देंगे। उनके सामने से गुजरेंगी केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और राज्यों के पुलिस बलों की टुकड़ियाँ।
केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की टुकड़ियों में शामिल होंगी- सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केन्द्रीय आरक्षित पुलिस बल (सीआरपीएफ), इण्डो-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी), केन्द्रीय औद्याेगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी)। ऐसे ही, असम, त्रिपुरा, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, केरल, आन्ध्र प्रदेश, जैसे कई राज्यों के पुलिस बलों की टुकड़ियाँ होंगी। गुजरात पुलिस के अश्वारोही जवानों की टुकड़ी होगी। ऊँट पर सवार होकर देश की सीमाओं की रखवाली करने वाले जवानों की टुकड़ी परेड में शामिल रहेगी। बीएसएफ के श्वान दल और राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) की टुकड़ियाँ भी परेड में रहेंगी।
असम पुलिस के मोटरसाइकिल सवार जवानों का दल साहसिक करतबों का प्रदर्शन करते हुए निकलेगा। युद्धकला (मार्शल आर्ट) का प्रदर्शन करते जवान दिखेंगे। महिला पुलिस अफसरों और जवानों की टुकड़ियाँ होंगी। महिलाओं की ही टुकड़ी प्रधानमंत्री को सलामी गारद (गार्ड ऑफ ऑनर) देगी। महिला जवान भी युद्धकला और साहसिक करतबों का प्रदर्शन करेंगी। अर्धसैनिक बलों, राज्यों के पुलिस बलों और एनसीसी सहित स्कूलों के बैण्ड होंगे। राष्ट्रीय सुरक्षा गारद (एनएसजी), राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (एनडीआरएफ) और गुजरात, जम्मू-कश्मीर, अण्डमान-निकोबार, मणिपुर, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तराखण्ड, पुड्डुचेरी, जैसे राज्यों की झाँकियाँ होंगी।
अर्धसैनिक बलों के जवानों को शौर्य चक्र और वीरता पदकों से सम्मानित किया जाएगा। साथ ही, भारतीय वायुसेना की ‘सूर्य किरण’ दल हवाई करतबों का प्रदर्शन करेगा। और देशभर के 900 से अधिक कलाकार विभिन्न नृत्य कलाओं का प्रदर्शन करते हुए गुजरेंगे। इन नृत्य कलाओं में शास्त्रीय नृत्य होंगे और लोक नृत्य भी। यह सब होगा, गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयन्ती पर, 31 अक्टूबर को। सरदार साहब की ‘एकता की प्रतिमा’ (स्टैच्यू ऑफ यूनिटी) के पास से गुजरने वाली सड़क पर यह आयोजन है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन का क्रम इसके बाद 15 दिन तक चलता रहेगा और 15 नवम्बर को समापन होगा।
हालाँकि, गौर करने लायक कार्यक्रम 31 अक्टूबर, ‘एकता दिवस’ का होगा, जिसमें करीब-करीब वह सब होगा, जो गणतंत्र दिवस परेड के समय दिल्ली के राजपथ (अब कर्त्तव्य पथ) पर होता है। बस, अनुपस्थिति होगी भी तो तीनों सेनाओंं और ‘भारत के राष्ट्रपति’ की। तो क्या इस कार्यक्रम को ‘भारत के अगले राष्ट्रपति’ की फुल ड्रेस रिहर्सल माना जा सकता है? राजनीति में नामुमकिन कुछ नहीं होता और कोई एक घटनाक्रम सिर्फ एक मन्तव्य साथ लेकर नहीं चलता, बल्कि एक तीर से अनेक निशाने ही साधे जाते हैं।…ध्यान रखिएगा।
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