जीनत जैदी, दिल्ली
‘दीवाली’ सुनने में कितना मिठास भरा शब्द है न? दीवाली एक ऐसा त्योहार है, जिसे मनाने के लिए किसी धर्म की जरूरत नहीं। इस देश का हर धर्म दीवाली मनाता है। दीवाली आते ही मिठाइयाँ और उपहार हर घर में पहुँच जाते हैं। फर्क नहीं पड़ता कि वह हिन्दू है या किसी और धर्म का।
हम सब दीवाली मनाने में इतने मग्न हो जाते हैं कि जीवन के अंधेरों को दीपकों की जगमगाहट में भूल जाते हैं। क्योंकि हम केवल दीवाली मनाते हैं, बनाते नहीं हैं। हाँ, हम दीवाली मनाते हैं, क्योंकि दीवाली बनाने वाले तो वे हाथ हैं जो इस त्योहार की तैयारियों में लगे होते हैं। कोई हाथ दीया बना रहा है, कोई मिठाइयाँ तैयार कर रहा है, कोई रंगोली के रंग बना रहा है, तो कोई रंग-बिरंगी बत्तियाँ सजा रहा है।
यह त्योहार हमारे जीवन में खुशियों की बहार लेकर आता है। इसीलिए आप सभी से गुजारिश है कि इस दीवाली उन लोगों की खुशियों का भी ध्यान रखें, जो हमारी दीवाली बनाते हैं।
जय हिन्द
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(ज़ीनत #अपनीडिजिटलडायरी के सजग पाठक और नियमित लेखकों में से है। दिल्ली से ही 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब उच्च शिक्षा के लिए कदम बढ़ा चुकी हैं। इस उम्र में ही अपने लेखों के जरिए बड़े मसले उठाती है। अच्छी कविताएँ लिखती है। लेखन में स्वाभाविक रुचि है और इसी क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती हैं)
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32 – इंसान इतना कमज़ोर कैसे हो रहा है कि इस आसानी से अपनी ज़िन्दगी ख़त्म कर ले?
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