भारत में विभिन्न भाषाएँ बोली जाती हैं। इसीलिए यहाँ बहुभाषाओं के साथ-साथ भाषाओं की शुद्धता भी एक बड़ा विषय रहा है। यह शुद्धता हिन्दी भाषा…
View More ‘भाषा बहता नीर’…इस कहावत को हम कैसे और कितने गलत तरीके से समझते हैं?Author: From Visitor
अमेरिकी ‘रिलीजियस लिबर्टी कमीशन’, यानि भारत में ईसाई धर्मान्तरण का षड्यंत्र फिर तेज!
अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय (व्हाइट हाउस) ने एक मई 2025 को ‘
View More अमेरिकी ‘रिलीजियस लिबर्टी कमीशन’, यानि भारत में ईसाई धर्मान्तरण का षड्यंत्र फिर तेज!इजरायल-ईरान संघर्ष क्या तीसरे महायुद्ध की सुगबुगाहट है?
इजरायल-ईरान युद्ध जमीन पर उतरती किसी मसीही भविष्यवाणी की तरह लगता है। यह इजरायल के लिए जीवन-मरण का प्रश्न है। मगर इसमें भी कोई सन्देह…
View More इजरायल-ईरान संघर्ष क्या तीसरे महायुद्ध की सुगबुगाहट है?बेटी के नाम दसवीं पाती : मैं तुम्हारी शहद से मीठी बातों की मिसरी को बहुत याद करूँगा!
प्रिय मुनिया मेरी लाडो, मैं तुम्हें यह पत्र तब लिख रहा हूँ, जब हमने रात में तुम्हारी शरारतों का एक छोटा सा वीडियो शूट किया…
View More बेटी के नाम दसवीं पाती : मैं तुम्हारी शहद से मीठी बातों की मिसरी को बहुत याद करूँगा!पिता… पिता ही जीवन का सबसे बड़ा संबल हैं
पिता… पिता ही जीवन का सबसे बड़ा संबल हैं। वे कभी न क्षीण होने वाला आत्मबल हैं। संतान के लिए उनका त्याग निश्छल है।उनकी मुट्ठियों…
View More पिता… पिता ही जीवन का सबसे बड़ा संबल हैंHappy Father’s Day : A gratitude to the father’s dedication
“Behind every success every lesson learn and every challenges over comes their often lies the untold story of a father’s on waving dedication and unseen…
View More Happy Father’s Day : A gratitude to the father’s dedicationक्या घर पर रहते हुए भी पेशेवर तरीक़े से दफ़्तर के काम हो सकते हैं, उदाहरण देखिए!
क्या आपकी टीम अपने घर से दफ़्तर का काम करते हुए भी अच्छे नतीज़े दे सकती है? मेरा अपना उदाहरण देखिए। अभी एक-दो दिन पहले…
View More क्या घर पर रहते हुए भी पेशेवर तरीक़े से दफ़्तर के काम हो सकते हैं, उदाहरण देखिए!आरसीबी हादसा : उनकी नज़र में हम सिर्फ़ ‘कीड़े-मकोड़े’, तो हमारे लिए वे ‘भगवान’ क्यों?
एक कामकाजी दिन में किसी जगह तीन लाख लोग कैसे इकट्ठे हो गए? इसका मतलब तो यही हुआ कि या तो हमारे पास कोई ढंग…
View More आरसीबी हादसा : उनकी नज़र में हम सिर्फ़ ‘कीड़े-मकोड़े’, तो हमारे लिए वे ‘भगवान’ क्यों?‘आज्ञा सम न सुसाहिब सेवा’ यानि बड़ों की आज्ञा मानना ही उनकी सबसे बड़ी सेवा है!
एक वैष्णव अथवा तो साधक की साधना का अनुशीलन -आरम्भ आनुगत्य से होता है, परिणति सर्वभावेन शरणागति अर्थात् पूरी तरह शरण में जाने से होती…
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कभी-कभी व्यक्ति का सिर्फ़ नज़रिया देखकर भी उससे काम ले लेना चाहिए! यह मैं अपने जीवन के सच्चे अनुभव से कह रहा हूँ। मैंने कुछ…
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