वह मानो किसी सपने से उठी हो। रात के सपने से, भयावह रात के सपने से बाहर आकर सीधे तनकर खड़ी हो गई हो। उसकी…
View More ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : वहाँ रोजी मैडबुल का अब कहीं नामो-निशान नहीं था!Author: From Visitor
सांस्कृतिक पुनर्जागरण कैसे होगा? और उसका मार्गदर्शन कौन करेगा?
हमारे सांस्कृतिक पुनर्जागरण में सनातन श्रौत यज्ञ परम्परा के महत्व का अन्तिम भाग दो सप्ताह पहले पूरा किया। एक बोझिल, अरुचिकर और पुरातनपन्थी विषय पर…
View More सांस्कृतिक पुनर्जागरण कैसे होगा? और उसका मार्गदर्शन कौन करेगा?‘मायावी अम्बा और शैतान’ : वह पटाला थी, पटाला का भूत सामने मुस्कुरा रहा था!
दुनिया एकाएक आदिमयुगीन अराजकता में पहुँच गई। बेलगाम नफरत और क्रोध की जहरीली हवा अंबा के फेंफड़ों में भर गई थी। वह अपने आप में…
View More ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : वह पटाला थी, पटाला का भूत सामने मुस्कुरा रहा था!70 या 90 नहीं, मैंने तो हफ़्ते में 100 घंटे भी काम किया, मगर उसका ‘हासिल’ क्या?
अभी 70 या 90 घंटों की बात तो भूल जाइए। मैंने हफ़्ते में 100 घंटे भी काम किया है। वह भी लगाताार 6 महीने तक।…
View More 70 या 90 नहीं, मैंने तो हफ़्ते में 100 घंटे भी काम किया, मगर उसका ‘हासिल’ क्या?“घर में पत्नी का चेहरा पति कितनी देर देखेगा”, ऐसा भाव रखने वाला व्यक्ति प्रतिष्ठित कैसे?
भारतीय संस्कृति कर्म प्रधान है। वैदिक ऋषि ने व्यक्ति के लक्ष्यों की अवधारणा प्रस्तुत की, तब उसने धर्म के बाद अर्थ की अवधारणा को दूसरे…
View More “घर में पत्नी का चेहरा पति कितनी देर देखेगा”, ऐसा भाव रखने वाला व्यक्ति प्रतिष्ठित कैसे?‘मायावी अम्बा और शैतान’ : डायन को जला दो! उसकी आँखें निकाल लो!
“गए, गायब हो गए! सब गायब हो गए!” एक आदमी खाली जगह की ओर इशारा करते हुए बेवकूफों की तरह बड़बड़ाने लगा। एक क्षण पहले…
View More ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : डायन को जला दो! उसकी आँखें निकाल लो!भोपाल त्रासदी से कारोबारी सबक : नियमों का पालन सिर्फ़ खानापूर्ति नहीं होनी चाहिए
मध्य प्रदेश सरकार भोपाल के यूनियन कार्बाइड परिसर का जहरीला रासायनिक कचरा ठिकाने लगाने की प्रक्रिया में है। इसके लिए कचरे को भोपाल से इन्दौर…
View More भोपाल त्रासदी से कारोबारी सबक : नियमों का पालन सिर्फ़ खानापूर्ति नहीं होनी चाहिएअधर्मसापेक्षता आत्मघाती है, रक्षा वैदिक यज्ञ संस्कृति से होगी
शृंखला के पूर्व भागों में हमने सनातन के नाम पर प्रचलित भ्रांतियों को देखा। इन भ्रांतियों के प्रचलित और प्रभावशाली होने के कारण यानी वैदिक…
View More अधर्मसापेक्षता आत्मघाती है, रक्षा वैदिक यज्ञ संस्कृति से होगी‘मायावी अम्बा और शैतान’ : डायन का अभिशाप है ये, हे भगवान हमें बचाओ!
बर्फीली ओस ने उसके चेहरे को जो ठंडक दी, वह किसी नए आतंक की आमद का ऐलान भी था। इसलिए कि इससे पहले किसी को…
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अपने करियर के साथ-साथ माता-पिता के प्रति ज़िम्मेदारियों को निभाना मुश्क़िल काम है, है न? यह सवाल मेरे ज़ेहन में अभी रविवार को ख़ास तौर…
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