अकबर के समय तक हर स्तर पर हिंदु जीवन पद्धति और तौर-तरीकों को स्वीकार करने की मंशा दिखती थी। यही कारण था कि अकबर ने प्रशासन में हिंदुओं…
View More औरंगज़ेब को क्यों लगता था कि अकबर ने मुग़ल सल्तनत का नुकसान किया?Author: Apni Digital Diary
बड़ा दिल होने से जीवन लम्बा हो जाएगा, यह निश्चित नहीं है
दिन के चौबीस घंटों में एकांत यूँ ही आता है, टुकड़ों में और हम उसमें एकसार होते हैं। फिर जीवन में लौट जाते हैं, जहाँ शोर है…
View More बड़ा दिल होने से जीवन लम्बा हो जाएगा, यह निश्चित नहीं हैबड़े पैमाने पर धर्मांतरण के बावज़ूद हिन्दुस्तान में मुस्लिम अलग-थलग क्यों रहे?
भारत पर आक्रमण करने वाले मुसलिम आक्रांताओं में मुग़ल आख़िरी थे। यहाँ मुग़लिया सल्तनत की स्थापना बाबर ने की, 1526 में। मुग़लों ने पहले उत्तर…
View More बड़े पैमाने पर धर्मांतरण के बावज़ूद हिन्दुस्तान में मुस्लिम अलग-थलग क्यों रहे?इंसान की असली परख कैसे होती है?
एक पुरानी कहानी है। एक राजा हुआ करता था। उसका नियम था कि उसके शहर के हाट-बाजार में जो भी सामान नहीं बिकता, उसे वह खरीद…
View More इंसान की असली परख कैसे होती है?आज़ादी का 75वां साल : तंत्र और जन के बीच अब भी एक डंडे का फ़ासला!
और उस दिन ‘तंत्र’ की ‘जन’ से मुलाकात हो गई। पाठकों को लग सकता है कि भाई ‘तंत्र’ और ‘जन’ दोनों की मुलाकात का क्या चक्कर…
View More आज़ादी का 75वां साल : तंत्र और जन के बीच अब भी एक डंडे का फ़ासला!हिन्दी के मुहावरे, बड़े ही बावरे
हिन्दी का थोडा़ आनन्द लेते हैं। हिन्दी के मुहावरों की भाषा, उनकी अहमियत, उनकी ख़ासियत समझने की कोशिश करते हैं। हालाँकि इस ख़ूबसूरती से इन मुहावरों को चन्द…
View More हिन्दी के मुहावरे, बड़े ही बावरेहक़ दे इंडिया, इन ‘लड़ाकियों’ को हमारी सांत्वना नहीं चाहिए!
भारतीय महिला हॉकी टीम टोक्यो ओलम्पिक खेलों में चौथे नम्बर रही। शुक्रवार, छह अगस्त को ब्रिटेन ने नज़दीकी मुकाबले में भारत की टीम पर चार-तीन से जीत…
View More हक़ दे इंडिया, इन ‘लड़ाकियों’ को हमारी सांत्वना नहीं चाहिए!जो जीवन को जितनी जल्दी समझ जाएगा, मर जाएगा
मेरे कमरे में जब सुबह धूप आती है, तो बहुत गुनगुनी होती है। दोपहर तक परवान चढ़ती है और शाम फिर ठंडी पड़ने लगती है।…
View More जो जीवन को जितनी जल्दी समझ जाएगा, मर जाएगासम्यक प्रयत्न; बोल्ट ने ओलम्पिक में 115 सेकेंड दौड़ने के लिए जो श्रम किया, वैसा!
बुद्ध अपने प्रतीत्य समुत्पाद के तीसरे भाग अर्थात् समाधि की बात करते हैं। भारतीय दर्शन में समाधि अत्यधिक महत्त्वपूर्ण विचार है। बुद्ध समाधि में तीन चीजों को…
View More सम्यक प्रयत्न; बोल्ट ने ओलम्पिक में 115 सेकेंड दौड़ने के लिए जो श्रम किया, वैसा!“बापू, अब तो मुझे आत्मग्लानि होने लगी है। ख़ुद पर ही शर्म आने लगी है।”
अरसा हो गया। इतने वर्षों से बापू को एक ही पोजिशन में बैठे हुए देखते-देखते। झुके हुए से कंधे। बंद आँखें। भावविहीन चेहरा। कहने की जरूरत…
View More “बापू, अब तो मुझे आत्मग्लानि होने लगी है। ख़ुद पर ही शर्म आने लगी है।”