प्राचीन ग्रीस की कहानी है। वहाँ के एक बड़े दार्शनिक हुए हैं, सुकरात। एक बार कोई परिचित उनके पास आए। आते ही बड़ी आतुरता से कहने लगे,…
View More एक किस्सा..पीठ पीछे की बातों में दिलचस्पी लेने, यकीन करने वालों के लिए!Author: Apni Digital Diary
ऐसा हम नहीं, बड़े-बुज़ुर्ग कह गए हैं…
बड़ों की बातें हैं। इसी तरह की होती हैं। सालों पहले कही जाती हैं। सालों बाद तक सुनी जाती हैं। उनकी कीमत कहे जाते वक्त…
View More ऐसा हम नहीं, बड़े-बुज़ुर्ग कह गए हैं…बुद्ध बताते हैं, दु:ख से छुटकारा पाने का सही मार्ग क्या है
एक दिन बुद्ध प्रवचन देने के लिए अपने शिष्यों की सभा में पहुँचे। सभी शिष्य यह देख आश्चर्यचकित रह गए कि बुद्ध अपने साथ एक…
View More बुद्ध बताते हैं, दु:ख से छुटकारा पाने का सही मार्ग क्या हैस्वामी विवेकानन्द का पुण्य-स्मरण, उनके जीवन से जुड़ी चार कहानियों के जरिए
1. इसलिए माँ का स्थान सबसे ऊपर : स्वामी विवेकानन्द जी से एक जिज्ञासु ने प्रश्न किया, “माँ की महिमा संसार में किस कारण से गाई…
View More स्वामी विवेकानन्द का पुण्य-स्मरण, उनके जीवन से जुड़ी चार कहानियों के जरिएपहले मुर्गी आई या अंडा, ये महज़ एक पहेली नहीं है!
उसके घर के बाहर चबूतरे पर कुछ बच्चे बैठे-ठाले पहेलियाँ बुझा रहे थे। इन्हीं में से एक पहेली थी, “मुर्गी पहले आई या अंडा आया।” पूछने…
View More पहले मुर्गी आई या अंडा, ये महज़ एक पहेली नहीं है!हम अपने रत्नों का सही सम्मान करना कब सीखेंगे?
ये तस्वीर अपने आप में बहुत कुछ कहती है। वाराणसी की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र। शहनाई का दूसरा नाम कहे जाने वाले उस्ताद बिस्मिल्लाह…
View More हम अपने रत्नों का सही सम्मान करना कब सीखेंगे?विस्मृति बड़ी नेमत है और एक दिन मैं भी भुला ही दिया जाऊँगा!
कल एक बहुत प्रिय मित्र को एकान्तवास में भेज दिया गया। उनका बेटा भी संग में, इस काल में ग्रसित हो गया। कल ही एक…
View More विस्मृति बड़ी नेमत है और एक दिन मैं भी भुला ही दिया जाऊँगा!बुद्ध त्याग का तीसरे आर्य-सत्य के रूप में परिचय क्यों कराते हैं?
बुद्ध होने के लिए इच्छाओं को त्यागना पड़ता है। यह त्याग अत्यधिक कठिन है। इस त्याग को, इस निरोध को मोक्ष का मार्ग भी कहा गया है। “क्षणिकाः…
View More बुद्ध त्याग का तीसरे आर्य-सत्य के रूप में परिचय क्यों कराते हैं?बता नीलकंठ, इस गरल विष का रहस्य क्या है?
रास्ते थे, सड़के थीं, नदियाँ, पहाड़, हवाई किलों से गुजरने वाले पथ और चलने वाले असंख्य पाथेय, जो अपनी-अपनी छाप देकर वहाँ चले गए हैं,…
View More बता नीलकंठ, इस गरल विष का रहस्य क्या है?कबीर की वाणी, कोरोना की कहानी…साधो ये मुर्दों का गाँव…!
आज संत कबीरदास जी की जयन्ती है। ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा तिथि। सन् 1398 में कबीरदास जी का जन्म हुआ, ऐसा बताया जाता है। मतलब आज…
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