त्यागना। इसे सामान्य भाषा में हमेशा के लिए किसी चीज को छोड़ देना कह देते हैं। जैसे दान देना भी त्याग है। वैसे, अक्सर हम धन त्यागने…
View More प्रश्न है, सदियाँ बीत जाने के बाद भी बुद्ध एक ही क्यों हुए भला?Author: Apni Digital Diary
योग क्या है, कभी सोचकर देखा क्या हमने?
बीते छह सालों की तरह इस सातवें साल भी 21 जून को दुनियाभर में ‘अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस’ के आयोजन हुए। ख़ूब तस्वीरें दिखीं। तरह-तरह के आसन,…
View More योग क्या है, कभी सोचकर देखा क्या हमने?जब हमारा अस्तित्त्व नहीं था, संघर्ष तब भी था और जीत भी हमारी थी!
किसी ने वॉट्सएप पर एक सन्देश भेजा। पढ़ते ही इतना प्रासंगिक और सत्यपरक लगा कि मैंने इसे तुरन्त #अपनीडिजिटलडायरी के साथ साझा करने का निर्णय…
View More जब हमारा अस्तित्त्व नहीं था, संघर्ष तब भी था और जीत भी हमारी थी!दूर कहीं पदचाप सुनाई देते हैं…‘वा घर सबसे न्यारा’ ..
शोर में बहुधा एकांत छिन जाने का खतरा रहता है। पर कुछ शोर मन को बहुत भाते हैं। मसलन- चिड़ियों की चहचहाट, टिटहरी की चीख, मुंडेर पर…
View More दूर कहीं पदचाप सुनाई देते हैं…‘वा घर सबसे न्यारा’ ..धर्म-पालन की तृष्णा भी कैसे दु:ख का कारण बन सकती है?
भगवान बुद्ध दुःख के कार्य-कारण बताते हैं। इसमें दुःख समुदाय, यह दूसरा आर्यसत्य है। दुःख है तो दुःख के कारण भी होते ही हैं। इन कारणों को…
View More धर्म-पालन की तृष्णा भी कैसे दु:ख का कारण बन सकती है?ये क्या है, किसी विचार का समर्थन या उससे ग्रस्त-त्रस्त हो जाना?
मामला पूरी तरह निजी है। फिर भी विचार के लिए एक रोचक विषय है और सोचक यानि सोचनीय भी। क्योंकि इसी तरह के मामले अक्सर समाज…
View More ये क्या है, किसी विचार का समर्थन या उससे ग्रस्त-त्रस्त हो जाना?बाबू , तुम्हारा खून बहुत अलग है, इंसानों का खून नहीं है…
देवास के जवाहर चौक में एक ही बड़ी सी दुकान थी झँवर सुपारी सेंटर। मंगरोली सुपारी वहीं मिलती थी, जिसे काटो तो नारियल जैसी लगती थी। घर में एक…
View More बाबू , तुम्हारा खून बहुत अलग है, इंसानों का खून नहीं है…बिहार की इस बेटी को एक कड़क सैल्यूट तो बनता है
उसने एक बँधी हुई छवि को तोड़ा है। जिस समुदाय में लड़कियों की शिक्षा ही विवाद का विषय हो जाया करता है, उसी समाज से…
View More बिहार की इस बेटी को एक कड़क सैल्यूट तो बनता है“अपने प्रकाशक खुद बनो”, बुद्ध के इस कथन का अर्थ क्या है?
भगवन बुद्ध ने दु:ख को पहला सत्य बताया। बड़े अद्भुत हैं बुद्ध। बहुत लम्बी-चौड़ी बात नहीं करते। एक शब्द में बता दिया कि समस्या क्या है। …
View More “अपने प्रकाशक खुद बनो”, बुद्ध के इस कथन का अर्थ क्या है?हम भोजन को भगवान मानते हैं और रोज उनका तिरस्कार करते हैं!
उसका घर कॉलोनी के नुक्कड़ पर है। सामने तीन तरफ़ जाने वाले रास्ते तिकोने से जुड़ते हैं। वहीं एक तरफ़ उस रिहाइश (कॉलोनी) का दरवाज़ा है।…
View More हम भोजन को भगवान मानते हैं और रोज उनका तिरस्कार करते हैं!