निकेश जैन, इन्दौर मध्य प्रदेश
आपकी सेहत आपकी नौकरी से ज्यादा जरूरी है। अपनी टीम के हर सदस्य को बीते दिनों में यही ध्यान दिलाया। और इसका कारण क्या था? इससे महज दो-तीन पहले मुझे खुद इस बात का एक बार फिर आभास हुआ, जब मैं अपने पिताजी को लेकर इन्दौर के एक मशहूर अस्पताल में गया।
वहाँ मैंने देखा कि बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में रोज की तरह ही काफी भीड़-भाड़ थी। बहुत सारे लोग किसी न किसी डॉक्टर को दिखाने के लिए अपनी बारी आने की प्रतीक्षा कर रहे थे। मैंने देखा कि वहाँ हर तरह के मरीज हैं। साथ में उनके परिजन भी। इनमें से कुछ लोग डॉक्टर को दिखा लेने के बाद पैसे चुकाने के लिए भी लाइन में लगे हुए थे। फीस भी कितनी? 1,500 रुपए, जो सबके लिए मामूली नहीं होगी।
इतनी भीड़ के कारण मुझे भी वहाँ करीब चार घन्टे लग गए। इस दौरान एक-दो डॉक्टरों के पास जाना हुआ और कुछ जाँचें भी करानी पड़ीं। लेकिन अस्पताल में इतनी देर में ही मैं बुरी तरह थक गया। या कहूँ तो एकदम पस्त हो गया। लिहाजा, जब मैं घर पहुँचा तो सिर्फ एक ही ख्याल बार-बार दिमाग में आ रहा था कि कितना अच्छा हो, अगर किसी को अस्पताल जाना ही न पड़े। जब तक हो सके, वह वहाँ से दूर रहे।
यह सम्भव है। बस, इसका एक ही तरीका है, स्वस्थ जीवनशैली। ख्याल रखिए, हमारा-आपका काम हमें तनाव या चिन्ता देने वाली आखिरी चीज होनी चाहिए। हालाँकि आजकल हो ये रहा है कि सबसे पहले और सबसे ज्यादा तनाव नौकरी से ही मिल रहा है। इसके बाद खराब जीवनशैली का नम्बर आता है।
अलबत्ता मैं अपने कार्यस्थल पर यह सुनिश्चित करने की पूरी करता हूँ कि हमें काम की वजह से कोई तनाव न लेना पड़े। काम के कारण किसी अन्य को भी तनाव न देना पड़े। यह हो पा रहा है। किसी पर कोई अतिरिक्त दबाव डाले बिना भी हम अपना आप समय पर पूरा कर के दे रहे हैं। सही मायने में स्वस्थ कार्यवातावरण तैयार करना, उपलब्ध कराना बहुत मुश्किल नहीं है। लेकिन फिर भी अगर कार्यवातावरण की वजह से हम-आप में किसी को भी तनाव हो रहा है तो याद रखिए…
आपकी सेहत आपकी नौकरी से ज्यादा जरूरी है। उम्मीद है, आप संकेत समझ गए होंगे।
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निकेश का मूल लेख
Your health is more important than your job – that’s what I reminded my team yesterday. And what triggered this?
Because I also got reminded about it when I visited the OPD of a famous hospital in Indore yesterday with my father.
The OPD was as busy as it could be. Just too many people waiting for some or other doctor.
The four hours in hospital to meet a couple of doctors and few tests were tiring or I should say depressing.
I was seeing patients of all sorts waiting for their turn; family members waiting in queue to make payments. One consultation cost Rs. 1500, not easy for everyone.
When I reached home, the only thought that came to my mind was that one should avoid visiting a hospital for as long as possible.
And the only way possible is by living a healthy life. Your work should be the last thing which should be source of stress but unfortunately these days work is the primary source of stress and unhealthy lifestyle for many.
In our current setup we don’t take stress and don’t cause stress for others.
Tasks still get finished within time without creating pressure for anyone.
Creating a healthy work environment is not difficult. But if your work environment is causing stress then remember…
Your health is more important than your job… hope you get the hint 😁
Thoughts?
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(निकेश जैन, कॉरपोरेट प्रशिक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी- एड्यूरिगो टेक्नोलॉजी के सह-संस्थापक हैं। उनकी अनुमति से उनका यह लेख अपेक्षित संशोधनों और भाषायी बदलावों के साथ #अपनीडिजिटलडायरी पर लिया गया है। मूल रूप से अंग्रेजी में उन्होंने इसे लिंक्डइन पर लिखा है।)
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निकेश के पिछले 10 लेख
60- आरसीबी हादसा : उनकी नज़र में हम सिर्फ़ ‘कीड़े-मकोड़े’, तो हमारे लिए वे ‘भगवान’ क्यों?
59 – कभी-कभी व्यक्ति का सिर्फ़ नज़रिया देखकर भी उससे काम ले लेना चाहिए!
58- क्यों भारत को अब अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लाना ही होगा?
57- ईमानदारी से व्यापार नहीं किया जा सकता, इस बात में कितनी सच्चाई है?
56- प्रशिक्षित लोग नहीं मिल रहे, इसलिए व्यापार बन्द करने की सोचना कहाँ की अक्लमन्दी है?
55 – पहलगाम आतंकी हमला : मेरी माँ-बहन बच गईं, लेकिन मैं शायद आतंकियों के सामने होता!
54 – हँसिए…,क्योंकि पश्चिम के मीडिया को लगता है कि मुग़लों से पहले भारत में कुछ था ही नहीं!
53 – भगवान महावीर के ‘अपरिग्रह’ सिद्धान्त ने मुझे हमेशा राह दिखाई, सबको दिखा सकता है
52 – “अपने बच्चों को इतना मत पढ़ाओ कि वे आपको अकेला छोड़ दें!”
51 – क्रिकेट में जुआ, हमने नहीं छुआ…क्योंकि हमारे माता-पिता ने हमारी परवरिश अच्छे से की!
