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अपना पन्ना
चहेते पन्ने
चार्वाक हमें भूत-भविष्य के बोझ से मुक्त करना चाहते हैं, पर क्या हम हो पाए हैं?
5 years ago
चहेते पन्ने
रातभर नदी के बहते पानी में पाँव डालकर बैठे रहना…फिर याद आता उसे अपना कमरा
5 years ago
चहेते पन्ने
मैं अगर चाय छोड़ सकता हूँ, तो यक़ीन करना चाहिए- कोई कुछ भी कर सकता है
5 years ago
चहेते पन्ने
काश, चाँद की आभा भी नीली होती, सितारे भी और अंधेरा भी नीला हो जाता!
5 years ago
चुनिन्दा पन्ने
‘चारु-वाक्’…औरन को शीतल करे, आपहुँ शीतल होए!
5 years ago
चहेते पन्ने
मैं 70-80 के दशक का बचपन हूँ…
5 years ago
चुनिन्दा पन्ने
जब कोई विमान अपने ताकतवर पंखों से चीरता हुआ इसके भीतर पहुँच जाता है तो…
5 years ago
चहेते पन्ने
परम् ब्रह्म को जानने, प्राप्त करने का क्रम कैसे शुरू हुआ होगा?
5 years ago
चुनिन्दा पन्ने
सही है, भारतीय संस्कृति तभी विकसित हो सकी, जब जीवन व्यवस्थित था!
5 years ago
चुनिन्दा पन्ने
किसी ने पूछा कि पेड़ का रंग कैसा हो, तो मैंने बहुत सोचकर देर से ज़वाब दिया – नीला!
5 years ago
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