“अगर ट्रम्प 20 साल पहले राष्ट्रपति बन जाते, तो हमारे बच्चे भारत के नागरिक होते”, मैंने अभी एक दिन पहले ही अपने दोस्तों के एक…
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70 या 90 नहीं, मैंने तो हफ़्ते में 100 घंटे भी काम किया, मगर उसका ‘हासिल’ क्या?
अभी 70 या 90 घंटों की बात तो भूल जाइए। मैंने हफ़्ते में 100 घंटे भी काम किया है। वह भी लगाताार 6 महीने तक।…
View More 70 या 90 नहीं, मैंने तो हफ़्ते में 100 घंटे भी काम किया, मगर उसका ‘हासिल’ क्या?“घर में पत्नी का चेहरा पति कितनी देर देखेगा”, ऐसा भाव रखने वाला व्यक्ति प्रतिष्ठित कैसे?
भारतीय संस्कृति कर्म प्रधान है। वैदिक ऋषि ने व्यक्ति के लक्ष्यों की अवधारणा प्रस्तुत की, तब उसने धर्म के बाद अर्थ की अवधारणा को दूसरे…
View More “घर में पत्नी का चेहरा पति कितनी देर देखेगा”, ऐसा भाव रखने वाला व्यक्ति प्रतिष्ठित कैसे?भोपाल त्रासदी से कारोबारी सबक : नियमों का पालन सिर्फ़ खानापूर्ति नहीं होनी चाहिए
मध्य प्रदेश सरकार भोपाल के यूनियन कार्बाइड परिसर का जहरीला रासायनिक कचरा ठिकाने लगाने की प्रक्रिया में है। इसके लिए कचरे को भोपाल से इन्दौर…
View More भोपाल त्रासदी से कारोबारी सबक : नियमों का पालन सिर्फ़ खानापूर्ति नहीं होनी चाहिएअधर्मसापेक्षता आत्मघाती है, रक्षा वैदिक यज्ञ संस्कृति से होगी
शृंखला के पूर्व भागों में हमने सनातन के नाम पर प्रचलित भ्रांतियों को देखा। इन भ्रांतियों के प्रचलित और प्रभावशाली होने के कारण यानी वैदिक…
View More अधर्मसापेक्षता आत्मघाती है, रक्षा वैदिक यज्ञ संस्कृति से होगीमाने या नहीं, स्मार्ट फोन, मुफ़्त इन्टरनेट और ‘सोशल’ मीडिया ‘अब महामारी’ बन रही है!
पहले चन्द सुर्ख़ियों पर नज़र डालिए। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), इन्दौर का एक छात्र था, रोहित। प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। उसके हाथ…
View More माने या नहीं, स्मार्ट फोन, मुफ़्त इन्टरनेट और ‘सोशल’ मीडिया ‘अब महामारी’ बन रही है!ध्याान रखिए, करियर और बच्चों के भविष्य का विकल्प है, माता-पिता का नहीं!
अपने करियर के साथ-साथ माता-पिता के प्रति ज़िम्मेदारियों को निभाना मुश्क़िल काम है, है न? यह सवाल मेरे ज़ेहन में अभी रविवार को ख़ास तौर…
View More ध्याान रखिए, करियर और बच्चों के भविष्य का विकल्प है, माता-पिता का नहीं!हमारे राष्ट्रगान में जिस ‘अधिनायक’ का ज़िक्र है, क्या वह ‘भारत की नियति’ ही है?
भारत के राष्ट्रगान ‘जन गण मन…’ से जुड़ी अहम तारीख़ है, 27 दिसम्बर। सन् 1911 में इसी तारीख़ को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता (कोलकाता…
View More हमारे राष्ट्रगान में जिस ‘अधिनायक’ का ज़िक्र है, क्या वह ‘भारत की नियति’ ही है?भारत के लोग बैठकों में समय पर नहीं आते, ये ‘आम धारणा’ सही है या ग़लत?
भारत के लोग आधिकारिक बैठकों में समय पर नहीं आते, यह एक ‘आम धारणा’ है। लेकिन क्या यह सही है? ज़वाब को दो उदाहरणों से…
View More भारत के लोग बैठकों में समय पर नहीं आते, ये ‘आम धारणा’ सही है या ग़लत?भाषा के पिछलग्गू हम! चौंकिए नहीं, यदि कभी NATURE ‘नटूरे’ और FUTURE ‘फुटूरे’ हो जाए!
पहले इस वीडियो को थोड़ा वक़्त दीजिए। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का वीडियो है, ट्रेनों के आने-जाने की नित्य उद्घोषणा का। इस उद्घोषणा को ध्यान…
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