परसों शाम अस्पताल से लौटते वक्त मन कुछ अंतर्मुखी हो रहा था। जीवन की सभी परिक्षाओं को लेकर मन में उहापोह हो रही थी और दो…
View More धार्मिक समाज को इतने अत्याचार क्यों सहना पड़ रहा है?Tag: अपना पन्ना
A portrait of MissC
This story was narrated to me by my uncle from the maternal side when I visited him in 2004. After retirement, he chose to stay…
View More A portrait of MissCपरलोक और पुनर्जन्म को विज्ञान माने या न माने, ज्ञान साक्षात् दिखा देता है
परलोक और पुनर्जन्म- दो ऐसी बातें हैं, जिनके बिना धर्म की गहनता को समझना सम्भव नहीं है। विज्ञान या तर्क से इसे न तो साबित कर…
View More परलोक और पुनर्जन्म को विज्ञान माने या न माने, ज्ञान साक्षात् दिखा देता हैआरबीआई के 10 लाख फॉलोअर्स होना ख़बर तो है, पर सबको ये ख़बर क्यों नहीं है?
अभी तीन रोज पहले सवेरे से ही फेसबुक के ज़रिए मिली एक ख़बर ने बड़ा बेचैन कर रखा था। आजकल ख़बरें अख़बार से बाद में,…
View More आरबीआई के 10 लाख फॉलोअर्स होना ख़बर तो है, पर सबको ये ख़बर क्यों नहीं है?हम खुद मजबूत होंगे, तब ही किसी की मदद कर सकेंगे
अल-सुबह सबसे पहले उठना। देर रात सबसे बाद में सोना। परिवार के एक-एक सदस्य की छोटी से बड़ी, हर चीज का ख्याल रखना। घर के…
View More हम खुद मजबूत होंगे, तब ही किसी की मदद कर सकेंगे‘ग्रामोदय से भारत उदय’ की अवधारणा नानाजी देशमुख की थी, हम उसी से फूटे अंकुर हैं!
मैं प्रमोद पांडे। वर्तमान में अमेरिका के कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय में व्याख्याता (Professor) हूँ। हालाँकि मैं मूल रूप से मध्य प्रदेश के सतना जिले के चित्रकूट से…
View More ‘ग्रामोदय से भारत उदय’ की अवधारणा नानाजी देशमुख की थी, हम उसी से फूटे अंकुर हैं!इस वीडियो से वह वज़ह जानते हैं कि नानाजी देशमुख शरदोत्सव के लिए तैयार क्यों हुए?
नानाजी देशमुख ने अगर अपने सहयोगी डॉक्टर भरत पाठक जी को शरदोत्सव के तौर पर अपनी जयन्ती मनाने की सहमति दी तो वह यूँ ही…
View More इस वीडियो से वह वज़ह जानते हैं कि नानाजी देशमुख शरदोत्सव के लिए तैयार क्यों हुए?नानाजी देशमुख शरदोत्सव के रूप में अपना जन्मदिन मनाने को तैयार कैसे हुए?
महाराष्ट्र के कडोली गाँव (हिंगोली जिला) में 11 अक्टूबर 1916 को जब नानाजी देशमुख का जन्म हुआ, उस दिन शरद पूर्णिमा थी। कहा जाता है, शरद पूर्णिमा…
View More नानाजी देशमुख शरदोत्सव के रूप में अपना जन्मदिन मनाने को तैयार कैसे हुए?क्यों हमें ‘कुमारी’ अबू बाकेर और इस्लामिक कीर्तन परम्परा के बारे में जानना चाहिए?
अभी कुछ रोज पहले तक कर्नाटक (दक्षिण भारतीय) संगीत के एक बड़े गायक हुआ करते थे। नाम था, ‘कुमारी’ अबुबाकेर। जैसा नाम दिलचस्प, वैसा ही…
View More क्यों हमें ‘कुमारी’ अबू बाकेर और इस्लामिक कीर्तन परम्परा के बारे में जानना चाहिए?नानाजी देशमुख, जिनका ‘ग्राम-स्वराज’ आज के ‘आत्मनिर्भर भारत’ की राह दिखाता है
भारत में छह लाख से अधिक गाँव हैं। देश की अधिकांश जनसंख्या इन्हीं गाँवों में रहती है। हालाँकि वर्तमान दौर में गाँवों की बड़ी आबादी रोजगार के लिए…
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