आवाज़ मद्धम है, तो शायद थोड़ा ज़ोर लगे सुनने में। लाइनें भी चन्द ही हैं। इसलिए वक़्त एक मिनट से भी कम का लगेगा। लेकिन…
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शहरों में किरदार, किरदारों में शहर रहते हैं, हमने सुना है….
सोहबत अपना असर दिखाती ही है जनाब। माहौल भी पुरअसर हुआ करता है। अब देखिए न, अभी 20 मई को, शनीचर की रोज़ शहर भोपाल…
View More शहरों में किरदार, किरदारों में शहर रहते हैं, हमने सुना है….जिसने अपने लक्ष्य समझ लिया, उसने जीवन को समझ लिया, पर उस लक्ष्य को समझें कैसे?
जब भी किसी दुविधा में हों या मन खराब हो, तो हमें ध्यान करने की सलाह दी जाती है। ये चलन नया नहीं है, बल्कि…
View More जिसने अपने लक्ष्य समझ लिया, उसने जीवन को समझ लिया, पर उस लक्ष्य को समझें कैसे?बुद्ध के आनन्द ने राजकुमारों से पहले एक नाई की प्रव्रज्या क्यों कराई?
तथागत बुद्ध के शिष्यों में आनन्द प्रमुख थे। तथागत के सभी शिष्यों में आनन्द को ही भगवन् का सामिप्य सबसे अधिक प्राप्त था। यह आनन्द…
View More बुद्ध के आनन्द ने राजकुमारों से पहले एक नाई की प्रव्रज्या क्यों कराई?गीतातत्त्वमीमांसा : समसामयिक चिन्तन में सनातन धर्म प्रस्थान पर एक पठनीय टीका
श्रीमद्भगवद्गीता सनातन धर्म के सर्वसार ग्रन्थ के रूप में मान्य है। उपनिषद् (वेद), ब्रह्मसूत्र के साथ श्रीमद्भगवद्गीता को प्रस्थानत्रयी कहा जाता है। आस्तिक परम्परा में…
View More गीतातत्त्वमीमांसा : समसामयिक चिन्तन में सनातन धर्म प्रस्थान पर एक पठनीय टीकाक्या स्कूली बच्चों को पानी पीने तक का अधिकार नहीं?
आज-कल एक अहम खबर सुर्खियाँ बटोर रही है। यह कि पंजाब के फिरोजपुर के सरकारी विद्यालय में रोज़ तीन से चार बार घंटियाँ बजाई जा…
View More क्या स्कूली बच्चों को पानी पीने तक का अधिकार नहीं?‘स्माइली वाली लड़की’ : प्रेम के अव्यक्त व अलौकिक रूप का शानदार चित्रण
विकास वशिष्ठ के उपन्यास ‘स्माइली वाली लड़की’ में प्रेम के अव्यक्त व अलौकिक रूप का शानदार चित्रण है। जितना बेहतर पात्रों का चरित्र, उतनी ही…
View More ‘स्माइली वाली लड़की’ : प्रेम के अव्यक्त व अलौकिक रूप का शानदार चित्रणशिक्षक वो अज़ीम शख़्सियत है, जो हमेशा हमें आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है
ज़िन्दगी में दो ही लोग चाहते हैं कि हम उनसे ज्यादा कामयाब हों। पहले- हमारे माता-पिता और दूसरे हमारे शिक्षक। हम कितने भी अमीर या…
View More शिक्षक वो अज़ीम शख़्सियत है, जो हमेशा हमें आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करता हैसंस्कार हमारे जीवन में कैसे अच्छी या बुरी भूमिका निभाते हैं?
संस्कार एक ऐसा शब्द है, जो हम अपने बचपन से ही और अभी भी रोज कहीं न कहीं सुनते ही रहते हैं। संस्कार का हमारे…
View More संस्कार हमारे जीवन में कैसे अच्छी या बुरी भूमिका निभाते हैं?हो सके तो अपनी दिनचर्या में ज्यादा से ज्यादा हिन्दी का प्रयोग करें, ताकि….
हमारे द्वारा प्रयोग में लाने वाली भाषा न सिर्फ संचार का जरिया है बल्कि वह हमारी पहचान भी है। हमारा जन्म भारत जैसे महान देश…
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