Awadh-Holi

अवध में होरी : माता सीता के लिए मना करना सम्भव न था, वे तथास्तु बोलीं और मूर्छित हो गईं

अवध में उत्सव की तैयारी हो रही थी। होली को अब बस केवल तीन दिन ही शेष बचे थे। राजा दशरथ जी के महल में…

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Shri Krishn

जो रस बरस रहा बरसाने, सो रस तीन लोक में न

पूरे बरसाने गाँव में रंग बरस रहा था। लेकिन गोपियों की दृष्टि नन्दगाँव वाली पगडंडी की ओर लगी थी। कृष्ण की प्रतीक्षा में गोपियों की…

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ideological-struggle

दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे….

सोशल मीडिया और फोन पर सम्पर्क ठीक है, लेकिन सीखने-समझने के लिए आमने-सामने की मुलाकात और बातचीत करना बहुत जरूरी है। कल शाम को ऐसी…

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Shiv-Holi

भूत, पिशाच, बटोरी…. दिगम्बर खेलें मसाने में होरी

होलिका दहन को अभी चार दिन शेष थे। किन्तु फागुन की फागुआहट ने सबको सराबोर कर लिया था। काशी तो कुछ ज्यादा ही उत्सवी लहक…

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Pyre

एकान्त की अकुलाहट : मौत के तांडव में मुस्कान के मोती ढूँढने का नाम है जीवन

दुख बहुत आहिस्ते से आता है और लम्बे समय तक जीवन की झोली में पड़ाव डालता है। अपना दायरा बड़ा करता है। और एक दिन…

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Gender Eqality

लड़कियों को भी खुले आसमान में उड़ने का हक है, हम उनसे ये हक नहीं छीन सकते

“लैंगिक समानता” (gender equality)। हम इसका मतलब अक्सर ये निकाल लेते हैं कि महिला वह काम करे, जो पुरुष करते हैं। उनकी आदतों को अपना…

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bediyan

उड़ान भरने का वक्त आ गया है, अब हमें निकलना होगा समाज की हथकड़ियाँ तोड़कर

क्या इंसान का वजूद महज़ एक पुतले जितना है? जो दुनिया के बनाए कानून और रस्मों का आँखें बन्द कर पालन करे, बस? आखिर क्यों…

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Hari Ji

काँपते हाथों में बाँसुरी हिलती रहे और सुर थमे रहें, तो समझिए वे हाथ ‘हरि जी’ के हैं

एक क़िस्सा दिखाता हूँ। हाँ, दिखाता ही हूँ। देखिए। मध्य प्रदेश के शहर भोपाल में ‘भारत-भवन’ का अंतरंग सभागार। खचाखच भरा हुआ। यहाँ तीन-चार सौ…

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Helping Hands

दूसरे का साथ देने से ही कर्म हमारा साथ देंगे

बचपन से कोई भी अच्छा या बुरा काम करने पर हमने अपने बड़ों से अक्सर सुना है कि इंसान जैसा बोता है, वेसा ही काटता…

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Dipression

सुनें उन बच्चों को, जो शान्त होते जाते हैं… कहें उनसे, कि हम हैं तुम्हारे साथ

हम एक ऐसे दौर में ज़िन्दगी गुजर रहे हैं, जहाँ हमारे करीबियों के पास भी हमारे लिए वक्त नहीं है। या कह लीजिए कि वे…

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