देवास के जवाहर चौक में एक ही बड़ी सी दुकान थी झँवर सुपारी सेंटर। मंगरोली सुपारी वहीं मिलती थी, जिसे काटो तो नारियल जैसी लगती थी। घर में एक…
View More बाबू , तुम्हारा खून बहुत अलग है, इंसानों का खून नहीं है…Tag: अपना पन्ना
“अपने प्रकाशक खुद बनो”, बुद्ध के इस कथन का अर्थ क्या है?
भगवन बुद्ध ने दु:ख को पहला सत्य बताया। बड़े अद्भुत हैं बुद्ध। बहुत लम्बी-चौड़ी बात नहीं करते। एक शब्द में बता दिया कि समस्या क्या है। …
View More “अपने प्रकाशक खुद बनो”, बुद्ध के इस कथन का अर्थ क्या है?रास्ते की धूप में ख़ुद ही चलना पड़ता है, निर्जन पथ पर अकेले ही निकलना होगा
रास्ते की धूप में ख़ुद ही चलना पड़ता है। चाहे नरम धूप हो या कड़क। सब देह को ही सहना है। धूप जब भीतर आत्मा तक छनकर…
View More रास्ते की धूप में ख़ुद ही चलना पड़ता है, निर्जन पथ पर अकेले ही निकलना होगाबुद्ध की दृष्टि में दु:ख क्या है और आर्यसत्य कौन से हैं?
भगवान बुद्ध ने पंचवर्गीय भिक्षुओं को अपनी बात सुनने के लिए मना लिया। तथागत ने उन्हें समझाया। उनकी रुचि देख जो पहला उपदेश दिया वह…
View More बुद्ध की दृष्टि में दु:ख क्या है और आर्यसत्य कौन से हैं?बीती जा रही है सबकी उमर पर हम मानने को तैयार ही नहीं हैं
अड़सठ घाट भीतर हैं। कहाँ जाना है? न गंगा, न यमुना, सुमिरन कर ले मेरे मना, मन चंगा तो कठौती में ही गंगा है। बीती जा रही है…
View More बीती जा रही है सबकी उमर पर हम मानने को तैयार ही नहीं हैंवैशाख पूर्णिमा, बुद्ध का पुनर्जन्म और धर्मचक्रप्रवर्तन
वन में वैशाख पूर्णिमा को जन्मा राजकुमार फिर वन की तरफ चल दिया। पुनः जन्म लेने हेतु। वह राजगृह के घने वनों में भटकता रहा।…
View More वैशाख पूर्णिमा, बुद्ध का पुनर्जन्म और धर्मचक्रप्रवर्तनलगता है, हम सब एक टाइटैनिक में इस समय सवार हैं और जहाज डूब रहा है
यहाँ आसमान में कड़क बिजलियाँ चमक रही है। बादलों की गड़गड़ाहट में किसी की आवाज सुनाई नहीं देती। बरसात की बूंदें बड़े ओलों के रूप में…
View More लगता है, हम सब एक टाइटैनिक में इस समय सवार हैं और जहाज डूब रहा हैये पंछियों की चहचहाहट नहीं, समय का गीत है
ये राजस्थान के एक गाँव का दृश्य है। सवेरा अभी हुआ नहीं है। बस होने को है। यह सूर्योदय से ठीक पहले की वेला है।…
View More ये पंछियों की चहचहाहट नहीं, समय का गीत हैसिद्धार्थ के बुद्ध हो जाने की यात्रा की भूमिका कैसे तैयार हुई?
लगभग 2,600-2,700 वर्ष पूर्व भारत-भारती पर भासमान भास्कर का उदय हुआ। उसने भारत ही नहीं, सम्पूर्ण विश्व को प्रकाशित किया। यह सूर्योदय कपिलवस्तु के सिंहासन…
View More सिद्धार्थ के बुद्ध हो जाने की यात्रा की भूमिका कैसे तैयार हुई?लगता है, अपना खाने-पीने का कोटा खत्म हो गया है!
एक संतरा सामने है, एक सेवफ़ल, एक बड़ा सा पपीता, एक कीवी, कुछ बेर रखे हैं। मैं सोचता हूँ कि आज भोजन न करूँ। इन चीज़ों से अपनी…
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