“गए थे हरि भजन को, ओटन लगे कपास”

  बुद्ध की विशेषता है कि वे एकदम उपदेश देना शुरू नहीं कर देते। घूमते-फिरते बैठे सामान्य पर्यावरण में सहज होकर मित्रवत् बातें करते हुए…

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देखना सहज है, उसे भीतर उतार पाना विलक्षण, जिसने यह साध लिया वह…

आसमान में जब भी देखा, एक नहीं हजार आकार नजर आए। भिन्न-भिन्न प्रकार के। किसी ने उनके हू-ब-हू चित्र बना दिए। किसी ने मिट्टी से…

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कोई है ही नहीं ईश्वर, जिसे अपने पाप समर्पित कर हम मुक्त हो जाएँ!

बुद्ध बड़े मनोवैज्ञानिक व्यक्ति हैं। उन्होंने मनुष्य के मन को समझा और पाया कि मनुष्य हर समय पाप-पुण्य के फेर में पड़ा रहता है। इसलिए…

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पहचान खोना अभेद्य किले को जीतने सा है!

अभी धूप भी थी और बरसात भी। बचपन में ऐसी स्थिति में हम कहते थे चिड़ा-चिड़ी का ब्याह हो रहा है। बड़ा प्रतीक है, मौसम…

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बुद्ध कुछ प्रश्नों पर मौन हो जाते हैं, मुस्कुरा उठते हैं, क्यों?

एक बार बुद्ध के पास मौलुंकपुत्त नामक व्यक्ति आया। उसने बुद्ध से पूछा कि क्या वाक़ई ईश्वर है?  बुद्ध ने ज़वाब दिया, “क्या वाक़ई में…

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पूर्णता ही ख़ोख़लेपन का सर्वोच्च और अनन्तिम सत्य है!

सुनता है गुरु ज्ञानी, गगन में आवाज़ हो रही झीनी-झीनी। —— अड़सठ घाट भीतर हैं, कहाँ जाना है? न गंगा, न यमुना, सुमिरन कर ले…

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महात्मा बुद्ध आत्मा को क्यों नकार देते हैं?

किन्हीं सेठ जी को अपने धन पर बहुत गर्व था। वे जब किसी को धन से मदद करते, तो सब जगह उसका बख़ान किया करते…

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अधूरापन जीवन है और पूर्णता एक कल्पना!

हम सब अधूरे हैं। आधे-अधूरे काम करते हैं। अधूरेपन में जीते हैं। अधूरे रहकर ही जीवन समाप्त करते हैं। अपने अधूरेपन के कारण ही जीवन…

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कृष्ण और बुद्ध के बीच मौलिक अन्तर क्या हैं?

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर कृष्ण के विविध रूपों की लोगों ने अपने-अपने मतानुसार आराधना की। प्राय: श्रीक़ष्ण का बाल रूप और उनके उस स्वरूप की लीलाएँ हर व्यक्ति…

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…पर हे कृष्ण! मैं हूँ तुम्हारे साथ, जीने और संग मरने के लिए भी!

कृष्ण एक अभिशप्त मानव, निर्वासित देवता…। सुनने में अटपटा लगा न, अस्वीकार्य भी? ऐसा ही होता है। सच अक़्सर अस्वीकार्य और कड़वा सा लगता है। इसीलिए उस पर महिमामंडन…

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