जीवन में जब होने, खोने और पाने के मायने जल्दी समझ आ जाते हैं, तो समझदार व्यक्ति ही आगे जाने या ख़ुद को ख़त्म करने…
View More हम जितने वाचाल, बहिर्मुखी होते हैं, अन्दर से उतने एकाकी, दुखी भीTag: अपना पन्ना
बुद्ध की बताई ‘सम्यक समाधि’, ‘गुरुओं’ की तरह, अर्जुन के जैसी
आतंक के शिकंजे में दबोचे जा चुके अफ़ग़ानिस्तान से आज, 24 अगस्त 2021 को गुरु ग्रन्थ साहिब की तीन प्रतियाँ भारत आई हैं। गुरु ग्रन्थ…
View More बुद्ध की बताई ‘सम्यक समाधि’, ‘गुरुओं’ की तरह, अर्जुन के जैसीअपने पिंजरे हमें ख़ुद ही तोड़ने होंगे
यूँ तो रोज ही छुट्टी है, लेकिन इन दिनों रविवार का अपना मज़ा है। लिहाज़ा उस रोज़ सोचा कि कुछ बटन टूट गए हैं, उन्हें…
View More अपने पिंजरे हमें ख़ुद ही तोड़ने होंगेसम्यक स्मृति; कि हम मोक्ष के पथ पर बढ़ें, तालिबान नहीं, कृष्ण हो सकें
यादें बड़ी कमाल की चीजें होती हैं। हम अपनी यादों में पूरे संसार को समेटे रहते हैं। ये यादें अच्छी, बुरी, दुख देने वाली और…
View More सम्यक स्मृति; कि हम मोक्ष के पथ पर बढ़ें, तालिबान नहीं, कृष्ण हो सकेंबड़ा दिल होने से जीवन लम्बा हो जाएगा, यह निश्चित नहीं है
दिन के चौबीस घंटों में एकांत यूँ ही आता है, टुकड़ों में और हम उसमें एकसार होते हैं। फिर जीवन में लौट जाते हैं, जहाँ शोर है…
View More बड़ा दिल होने से जीवन लम्बा हो जाएगा, यह निश्चित नहीं हैजो जीवन को जितनी जल्दी समझ जाएगा, मर जाएगा
मेरे कमरे में जब सुबह धूप आती है, तो बहुत गुनगुनी होती है। दोपहर तक परवान चढ़ती है और शाम फिर ठंडी पड़ने लगती है।…
View More जो जीवन को जितनी जल्दी समझ जाएगा, मर जाएगासम्यक प्रयत्न; बोल्ट ने ओलम्पिक में 115 सेकेंड दौड़ने के लिए जो श्रम किया, वैसा!
बुद्ध अपने प्रतीत्य समुत्पाद के तीसरे भाग अर्थात् समाधि की बात करते हैं। भारतीय दर्शन में समाधि अत्यधिक महत्त्वपूर्ण विचार है। बुद्ध समाधि में तीन चीजों को…
View More सम्यक प्रयत्न; बोल्ट ने ओलम्पिक में 115 सेकेंड दौड़ने के लिए जो श्रम किया, वैसा!सम्यक आजीविका : ऐसा कार्य, आय का ऐसा स्रोत जो ‘सद्’ हो, अच्छा हो
कोरोना काल में न जाने कितने लोगों को अपनी आजीविका से विरत होना पड़ा। बहुतों ने इसे नई आजीविका के अवसर के रूप में देखा और नए…
View More सम्यक आजीविका : ऐसा कार्य, आय का ऐसा स्रोत जो ‘सद्’ हो, अच्छा होलम्बी दूरी तय करनी हो तो सिर पर कम वज़न रखकर चलो
आज शाम मौसम अचानक बदल गया। दूध ख़त्म हो गया था फ्रिज में। बहुत हिम्मत करके बाहर निकला और गुमटी से दूध लिया। उसे जब रुपए…
View More लम्बी दूरी तय करनी हो तो सिर पर कम वज़न रखकर चलोसम्यक कर्म : सही क्या, गलत क्या, इसका निर्णय कैसे हो?
मेरे मित्र के बॉस नेत्रहीन हैं। उनका मानना है कि उनके द्वारा किए गए सभी कार्य सही ही हैं। चाहे वे कार्य दूसरों की नज़र में ग़लत या…
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