भीड़भरे शहरों में अक्सर रहा हूँ, जहाँ ट्रैफिक सिग्नल को देखते-समझते ही उम्र के दशक गुजरते जाते हैं। हम भीड़ में फँसे हों और सामने…
View More जीवन इसी का नाम है, ख़तरों और सुरक्षित घेरे के बीच से निकलकर पार हो जानाTag: अपना पन्ना
जाे जिनेन्द्र कहे गए, वे कौन लोग हैं और क्यों?
इन्द्रियों को जीत लिया है जिस व्यक्ति ने, वह जिन या जिनेन्द्र आदि विशेषणों से पुकारा जाता है। भारतीय धर्म-दर्शन इन्द्रियों पर विजय पाने की महत्त्वपूर्ण चर्चा करता…
View More जाे जिनेन्द्र कहे गए, वे कौन लोग हैं और क्यों?जीवन में हमें ग़लत साबित करने वाले बहुत मिलेंगे, पर हम हमेशा ग़लत नहीं होते
एक मैयत में गया था आज। घर में तो सब ठीक था। रास्ते में भी दुख उमग रहा था। पर श्मशान में मुखाग्नि से कपाल क्रिया के…
View More जीवन में हमें ग़लत साबित करने वाले बहुत मिलेंगे, पर हम हमेशा ग़लत नहीं होतेकब अहिंसा भी परपीड़न का कारण बनती है?
प्राचीन काल की बात है। किसी गाँव में चन्द्रभूषण नामक एक विद्वान पंडित रहते थे। उनकी वाणी में गज़ब का आकर्षण था। भागवत् कथा सुनाने में निपुण थे।…
View More कब अहिंसा भी परपीड़न का कारण बनती है?ऊँचाईयाँ नीचे देखने से मना करती हैं
एक मीना बाज़ार लगता था, हर वर्ष नवरात्रि में। उसमें घूमने जाने का मज़ा ही कुछ और होता था। बड़े-बड़े झूले उसकी पहचान थी। कई…
View More ऊँचाईयाँ नीचे देखने से मना करती हैंसोचिए कि जो हुआ, जो कहा, जो जाना, क्या वही अंतिम सत्य है
तैत्तिरीय उनिषद् में एक प्रसंग है। ऋषि भृगु और उनके पिता का। ऋषि भृगु अपने पिता वरुण के पास जाते हैं और पूछते हैं, परमात्मा…
View More सोचिए कि जो हुआ, जो कहा, जो जाना, क्या वही अंतिम सत्य हैस्मृतियों के जंगल मे यादें कभी नहीं मरतीं
दो बार फोन लगाया पर नहीं उठाया, आख़िर रख दिया। सोचा कि अगला ड्यूटी पर होगा और जब समय मिलेगा तो ख़ुद कर लेगा। आख़िर…
View More स्मृतियों के जंगल मे यादें कभी नहीं मरतींजो क्षमा करे वो महावीर, जो क्षमा सिखाए वो महावीर…
एक सेठ ने अपने छोटे भाई को व्यापार शुरू करने के लिए कुछ धन दिया। लेकिन छोटे भाई ने व्यापार जमने के बाद धन वापस…
View More जो क्षमा करे वो महावीर, जो क्षमा सिखाए वो महावीर…विचित्र हैं हम.. जाना भीतर है और चलते बाहर हैं, दबे पाँव
जिनसे उम्र भर लड़ते-भिड़ते रहते हैं, वे एक दिन हम सबसे दूर हो जाते हैं। सदा के लिए संसार त्याग देते हैं। हम दुख मनाते…
View More विचित्र हैं हम.. जाना भीतर है और चलते बाहर हैं, दबे पाँवबौद्ध अपनी ही ज़मीन से छिन्न होकर भिन्न क्यों है?
अभी तक विविध कड़ियों के माध्यम से बुद्ध के सिद्धान्तों, उपदेशों, उनके जीवन की घटनाओं का परिचय प्राप्त किया। इन विविध प्रसंगों से यह ज्ञात होता…
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