प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है। पत्नी के साथ फ़ोटो खिंचा रहे हैं। सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी, कुर्ता और धोती पहने…
View More प्रेमचंद जी के फटे जूते देख परसाईं जी ने लिखा- तुम परदे का महत्त्व नहीं जानते, और हम…Tag: रोचक-सोचक
आपको वहीं होना चाहिए, जहाँ आपकी क़द्र हो….. ये वीडियो ऐसा समझाता है
पिता ने बेटी को उसकी स्नातक डिग्री पूरी होने पर बधाई दी। फिर कहा, “बहुत पहले मैंने एक कार ली थी जो उस समय की…
View More आपको वहीं होना चाहिए, जहाँ आपकी क़द्र हो….. ये वीडियो ऐसा समझाता हैप्रकृति के प्रति हम कैसे-कितने उत्तरदायी हों, ‘एपल’ कम्पनी के इस वीडियो से सीखें
प्रकृति के प्रति हम कैसे और कितने उत्तरदायी हों? कैसे समझें कि सम्पोषी (सस्टेनेबल) विकास के नाम पर हम जो प्रयास कर रहे हैं, वे…
View More प्रकृति के प्रति हम कैसे-कितने उत्तरदायी हों, ‘एपल’ कम्पनी के इस वीडियो से सीखेंभाई ‘समानतावादी’…, कैसा है आपका, ये ‘खुला खेल फ़रुक्ख़ाबादी’?
बड़के भाई ‘समानतावादी’…, पाँय लागी। कैसा है आपका, ये ‘खुला खेल फ़रुक्ख़ाबादी’?? नहीं प्रकृति, कहीं भी समानतावादी। कहीं मैदान, पठार, चोटी तो कहीं वादी।। मिट्टी,…
View More भाई ‘समानतावादी’…, कैसा है आपका, ये ‘खुला खेल फ़रुक्ख़ाबादी’?लोकतंत्र में जैसे ‘नेता’ चाहिए, उसकी मिसालें सिर्फ़ गाँधी-शास्त्री तक क्यों ठहरी है?
लोकतंत्र में जिस तरह के ‘नेता’ होने की परिकल्पना की गई, वे हिन्दुस्तान तो क्या दुनियाभर में दुर्लभ हैं। हर कहीं कुछ अँगुलियों पर गिनने…
View More लोकतंत्र में जैसे ‘नेता’ चाहिए, उसकी मिसालें सिर्फ़ गाँधी-शास्त्री तक क्यों ठहरी है?संस्कृत की संस्कृति : वर्ण यानी अक्षर आखिर पैदा कैसे होते हैं, कभी सोचा है? ज़वाब पढ़िए!
संस्कृत अध्येताओं द्वारा वर्णों के शुद्ध उच्चारण के महत्त्व पर दिए उदाहरणों को मैंने कई बार देखा। इस प्रक्रिया के दौरान मन में प्रश्न उत्पन्न…
View More संस्कृत की संस्कृति : वर्ण यानी अक्षर आखिर पैदा कैसे होते हैं, कभी सोचा है? ज़वाब पढ़िए!देखिए, अगर ‘यक्ष’ आज के सन्दर्भ में ‘धर्म’ से प्रश्न पूछें तो वे और उनके उत्तर कैसे होंगे?
हर समय कोई यक्ष अपने प्रश्न लिए उपस्थित रहता है, जहाँ कर्तव्य-अकर्तव्य, कर्म-अकर्म, धर्म-अधर्म के झंझावत में मनुष्य का सम्पूर्ण अस्तित्त्व दाँव पर लगा होता…
View More देखिए, अगर ‘यक्ष’ आज के सन्दर्भ में ‘धर्म’ से प्रश्न पूछें तो वे और उनके उत्तर कैसे होंगे?दूषित वाणी वक्ता का विनाश कर देती है….., समझिए कैसे!
वर्णों के उच्चारण की प्रक्रिया ‘शिक्षा’ नामक वेदांग से सीखने को मिलती है। वर्णों के स्पष्ट उच्चारण को संस्कृत व्याकरण परम्परा के ऋषि अत्यधिक महत्त्व…
View More दूषित वाणी वक्ता का विनाश कर देती है….., समझिए कैसे!गणेशोत्सव का सन्देश : सर्जन, अर्जन और फिर विसर्जन… यही जीवन है!
इसी सोमवार, मंगलवार से देश भर में गणेशोत्सव की धूम शुरू हो गई। अब 10 दिन तक यूँ ही चलने वाली है। इस दौरान लगातार…
View More गणेशोत्सव का सन्देश : सर्जन, अर्जन और फिर विसर्जन… यही जीवन है!‘उनके मीडिया’ का बहिष्कार : हम्माम में सब नंगे हैं, पहले सुना था, अब देख भी रहे हैं
अभी 13 सितम्बर को एक ख़बर आई कि कांग्रेस के नेतृत्त्व वाले विपक्षी दलों के गठबन्धन ने देश के 14 नामी पत्रकारों और कुछ न्यूज़
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