हर साल की तरह इस बार भी पाँच सितम्बर को ‘शिक्षक दिवस’ मना लिया गया। बधाईयाँ दीं और ली गईं। लेकिन शिक्षा और शिक्षित होने…
View More इन शिक्षकों के लिए बच्चों के जीवन का मोल 50 रुपए के बराबर!! बधाई…,शिक्षक दिवस की!Tag: सरोकार
पहाड़ो से नीचे आकर मैदानों में तबाही ला रही आपदा प्राकृतिक नहीं, मानव निर्मित है!
अचानक कहीं बादल फटे और पहाड़ाें से बाढ़ की सूरत में पानी ओर मिट्टी ने नीचे आकर बस्तियों की बस्तियाँ, गाँव के गाँव तबाह कर…
View More पहाड़ो से नीचे आकर मैदानों में तबाही ला रही आपदा प्राकृतिक नहीं, मानव निर्मित है!हम अपने विचारों पर नियंत्रण रख सकते हैं, ये सात तरीके हैं, आजमा कर देखिए
क्या हम खुश हैं? यह प्रश्न अपने आप में बहुत गहराई रखता है। सच कहें तो अधिकांश लोग इसका मिला-जुला उत्तर देंगे। जीवन शायद ही…
View More हम अपने विचारों पर नियंत्रण रख सकते हैं, ये सात तरीके हैं, आजमा कर देखिएआज एआई और मशीन लर्निंग के दौर में संस्कृत भाषा फिर से चर्चा में क्यों है?
आज जब विश्व अगले चरण की औद्योगिक क्रान्ति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग के दौर में प्रवेश कर चुका है, तब संस्कृत के महत्त्व…
View More आज एआई और मशीन लर्निंग के दौर में संस्कृत भाषा फिर से चर्चा में क्यों है?एक भावना, एक पत्र ‘रजिस्टर्ड डाक’ के नाम…जो सिर्फ चिट्ठी नहीं, आत्मा का दस्तावेज थी!
आगामी एक सितम्बर को भारतीय डाक की ‘रजिस्टर्ड सेवा’ औपचारिक रूप से समाप्त कर दी जाएगी। यह समाचार जितना सामान्य प्रतीत होता है, उतना है…
View More एक भावना, एक पत्र ‘रजिस्टर्ड डाक’ के नाम…जो सिर्फ चिट्ठी नहीं, आत्मा का दस्तावेज थी!दो लाख डेवलपर्स, 47 करोड़ लती…‘खेल दिवस’ पर जरा पैसों के इस खेल के पहलू भी समझें!
आज, 29 अगस्त को ‘राष्ट्रीय खेल दिवस’ होता है। ‘हॉकी के जादूगर’ मेजर ध्यानचंद की याद में यह आयोजन होता है, जिन्होंने अपने दौर में…
View More दो लाख डेवलपर्स, 47 करोड़ लती…‘खेल दिवस’ पर जरा पैसों के इस खेल के पहलू भी समझें!कृषि मंत्री खेती का उत्पादन बढ़ाने की बात करते हैं, मगर पशु चिकित्सा की क्यो नहीं करते?
भारत में पशुपालन केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ ही नहीं है बल्कि यह करोड़ों परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार भी है। देश में 20…
View More कृषि मंत्री खेती का उत्पादन बढ़ाने की बात करते हैं, मगर पशु चिकित्सा की क्यो नहीं करते?दिव्यांगों पर अभद्र टिप्पणी! सच है, ऐसे बेहूदा हास्य को अभिव्यक्ति की आजादी कैसे कहें?
समय रैना। इन्हें न तो हास्य कलाकार कहा जा सकता है, और न कलाकार। हाँ, ‘कलहकार’ जरूर कह सकते हैं इन्हें, क्योंकि इनकी अमर्यादित भाषा…
View More दिव्यांगों पर अभद्र टिप्पणी! सच है, ऐसे बेहूदा हास्य को अभिव्यक्ति की आजादी कैसे कहें?‘रील’ बनाई और ‘रियल’ में जान गँवाई, ओडिशा के इस लड़के की तरह ऐसा मत कीजिए!
यूट्यूब, इंस्टाग्राम, आदि पर रील बनाकर लोकप्रिय होने का पागलपन लगातार युवाओं को अपना शिकार बना रहा है। ताजा मामला ओडिशा के कोरापुट का है।…
View More ‘रील’ बनाई और ‘रियल’ में जान गँवाई, ओडिशा के इस लड़के की तरह ऐसा मत कीजिए!क्या भारत-अमेरिका की कारोबारी लड़ाई का असर भारतीयों की नौकरियों पर पड़ने लगा है?
मैंने ऑरेकल (सूचना-तकनीक क्षेत्र की दिग्गज अमेरिकी कम्पनी) साल 2006 में छोड़ी क्योंकि मुझे वहाँ ऐसा लगने लगा था, जैसे मैं कोई सरकारी नौकरी कर…
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