मुझे जहान की गर्द में मत ढूँढना प्यारे।मैं जब नहीं रहूँगा, तो गाँव की उसी ‘सुनहरी-भस्म’ के साथ उड़ता मिलूँगा, जिसे तुम धूल कहते हो।…
View More कविता : मैं मरते ही ‘शब्द’ हो जाऊँगा, और गाँव की हर किताब के पन्नों पर मिलूँगा…!Tag: हुनर
कविता : बड़ा मुश्किल है प्रेम में अलविदा कहना!
मैंने कब कहा कि तुम प्रतीक्षारत रहो। मैं अकिंचन की तरह समय की देहरी पर जब तुमसे विदा ले रहा था। वहीं ढलते रिश्ते की…
View More कविता : बड़ा मुश्किल है प्रेम में अलविदा कहना!कविता : मैं अपना हाल-ए-दिल कैसे बयाँ करूँ?
मैं अपना हाल ए दिल कैसे बयाँ करूँ।दर्द की भट्टी में वक्त-बेवक्त तपा करूँ।मैं अपना हाल-ए-दिल कैसे बयाँ करूँ। मौत को बस छूकर फिर से…
View More कविता : मैं अपना हाल-ए-दिल कैसे बयाँ करूँ?कविता जो बताती है- पहला ऑपरेशन सिन्दूर नरेन्द्र मोदी ने नहीं, तो किसने शुरू किया!
तन सिन्दूरी-मन सिन्दूरी, ऊपर शोभित गगन सिन्दूरी।सींचा अपने खून से जिसको, वीरों की यह धरा सिन्दूरी।।(भारत की इस धरती को लाखों-करोड़ों साल से वीरों ने…
View More कविता जो बताती है- पहला ऑपरेशन सिन्दूर नरेन्द्र मोदी ने नहीं, तो किसने शुरू किया!एक कविता…. “मैं लिखूँगा और लिखता रहूँगा”
मैं लिखूँगा और लिखता रहूँगा। खुद ही खुद से पूरा रीत जाने तक मैं लिखता रहूँगा। मेरी जिन्दगी की स्याही की आख़िरी बूँद सूख जाने…
View More एक कविता…. “मैं लिखूँगा और लिखता रहूँगा”राग झिंझोटी : एक छोटी सी कोशिश
बहुत मधुर राग है। राग झिंझोटी। खमाज थाट के अन्तर्गत इसे वर्गीकृत किया गया है। रात के दूसरे पहर (नौ से 12 बजे के बीच)…
View More राग झिंझोटी : एक छोटी सी कोशिशछेड़ो नहीं बस, रंग दो लाल…
होली के मौके पर भोपाल, मध्य प्रदेश की जानी-मानी भरतनाट्यम गुरु श्रीमति लतासिंह मुंशीजी की शिष्या वैष्णवी द्विवेदी द्वारा तैयार की गई एक सुन्दर नृत्य…
View More छेड़ो नहीं बस, रंग दो लाल…रंगी सारी गुलाबी चुनरिया रे….
‘अपनी डिजिटल डायरी’ की ओर से सभी पाठकों, दर्शकों, श्रोताओं को होली की अनन्त शुभकामनाएँ। इन शुभकामनाओं को और रंगीन किया है, भोपाल की वैष्णवी…
View More रंगी सारी गुलाबी चुनरिया रे….शिव हैं, तो समझिए संकट नहीं ही है
शिव हैं, तो सत्य है। शिव हैं, तो साहित्य है। शिव हैं, तो गीत है। शिव हैं, तो संगीत है। शिव हैं, साधना है। शिव…
View More शिव हैं, तो समझिए संकट नहीं ही हैबाँसुरी की धुन पर जनकल्याण की कामना और नववर्ष की मंगलकामनाएँ
नए साल की सुबह की शुरुआत अगर बाँसुरी की धुन से हो जाए तो कितना ही बेहतर। वह भी जनकल्याण की कामना करती ‘वैष्णव जन’…
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